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चीनी मिल पर 18 हजार किसानों का 66 करोड़ से अधिक का बकाया
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सठियांव। जनपद की इकलौती औद्योगिक इकाई दि किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव में गन्ना भुगतान न होने के कारण आगामी पेराई सत्र प्रभावित हो सकता है। चीनी मिल पर 18000 किसानों का 66 करोड़ 64 लाख 80 हजार रुपये बकाया हैं। वर्तमान सत्र करने के लिए सर्वे टीम जब खेत में पहुंच रही है तो किसान उन्हें अपने खेत से भगा रहे हैं।
सठियांव मिल ने पेराई सीजन 2020-21 में कुल 74 करोड़ 21 लाख 40 हजार रुपये का गन्ना खरीदा । जिसके सापेक्ष 7 करोड़ 56 लाख 60 हजार का भुगतान किया है। जो कुल क्रय किए गए कुल गन्ने के सापेक्ष 10 प्रतिशत है। बीते साल में मिल ने निर्धारित रिकवरी लक्ष्य के अनुरूप कम चीनी बनाते हुए दो लाख चार हजार कुंतल चीनी का उत्पादन किया। जिसकी बिक्री के बाद पिछले सत्र का बकाया 66 करोड़ 55 लाख 17 हजार किसानों का भुगतान करने के बाद मिल के पास अपने कर्मचारियों की तनख्वाह देने तक को पैसे नहीं है। जबकि बीते सत्र का अभी 18000 किसानों का कुल 66 करोड़ 64 लाख 80 हजार रुपये बकाया है। मिल पुरानी चीनी की उठान नहीं के बराबर है। गन्ना भुगतान न होने से गांवो में जा रही सर्वे टीम के साथ किसान दुर्व्यवहार पर उतर रहे हैं। ऐसी रिपोर्ट गन्ना पर्यवेक्षकों ने प्रधान प्रबंधक को दी है। कुल मिलाकर मिल संघ से आर्थिक मदद और पुरानी चीनी जो घटिया किस्म की है जिसकी बिक्री नहीं के बराबर है। वहीं किसानों द्वारा पूर्व में बिक्री किए गए गन्ने का भुगतान न होने के कारण सर्वे कार्य में जुटी टीम को खेत से भगाया जा रहा है। इस संबंध में सर्वे टीम के सदस्यों द्वारा प्रबंध निदेशक उप्र सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड को पत्र भेजा गया है। मुख्य गन्ना अधिकारी का कहना है कि एक दो दिन में शासन से पैसा मिलने की उम्मीद है। पैसा मिलते ही किसानों के बकाए का भुगतान कर दिया जाएगा।
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सठियांव मिल ने पेराई सीजन 2020-21 में कुल 74 करोड़ 21 लाख 40 हजार रुपये का गन्ना खरीदा । जिसके सापेक्ष 7 करोड़ 56 लाख 60 हजार का भुगतान किया है। जो कुल क्रय किए गए कुल गन्ने के सापेक्ष 10 प्रतिशत है। बीते साल में मिल ने निर्धारित रिकवरी लक्ष्य के अनुरूप कम चीनी बनाते हुए दो लाख चार हजार कुंतल चीनी का उत्पादन किया। जिसकी बिक्री के बाद पिछले सत्र का बकाया 66 करोड़ 55 लाख 17 हजार किसानों का भुगतान करने के बाद मिल के पास अपने कर्मचारियों की तनख्वाह देने तक को पैसे नहीं है। जबकि बीते सत्र का अभी 18000 किसानों का कुल 66 करोड़ 64 लाख 80 हजार रुपये बकाया है। मिल पुरानी चीनी की उठान नहीं के बराबर है। गन्ना भुगतान न होने से गांवो में जा रही सर्वे टीम के साथ किसान दुर्व्यवहार पर उतर रहे हैं। ऐसी रिपोर्ट गन्ना पर्यवेक्षकों ने प्रधान प्रबंधक को दी है। कुल मिलाकर मिल संघ से आर्थिक मदद और पुरानी चीनी जो घटिया किस्म की है जिसकी बिक्री नहीं के बराबर है। वहीं किसानों द्वारा पूर्व में बिक्री किए गए गन्ने का भुगतान न होने के कारण सर्वे कार्य में जुटी टीम को खेत से भगाया जा रहा है। इस संबंध में सर्वे टीम के सदस्यों द्वारा प्रबंध निदेशक उप्र सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड को पत्र भेजा गया है। मुख्य गन्ना अधिकारी का कहना है कि एक दो दिन में शासन से पैसा मिलने की उम्मीद है। पैसा मिलते ही किसानों के बकाए का भुगतान कर दिया जाएगा।
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