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कम बजट से रुका रोडवेज भवन का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Mon, 24 Oct 2016 12:03 AM IST
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रोडवेज भवन
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कम बजट के चलते अत्याधुनिक रोडवेज भवन का निर्माण कार्य रुक गया है। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्था निर्माण इकाई को 6.41 करोड़ रुपये की दरकार है। रुपये की डिमांड रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। धन के अभाव में निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है। समय पर धन नहीं जारी हुआ तो सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर ग्रहण लग सकता है।
जून 2015 में रोडवेज भवन का निर्माण शुरू होने के बाद से ही रोडवेज की सभी बसें सड़क पर खड़ी हो रही हैं जिससे प्रतिदिन जाम की समस्या पैदा होती है, जिससे लोगों को परेशान होना पड़ता है। ऐसे में रोडवेज कर्मचारियों के अलावा आमजन को अगले वर्ष भी समस्याओं से छुटकारा नहीं मिलने की संभावना नहीं नजर आ रही है। परिवहन निगम विभाग के प्रमुख 10 डिपो में आजमगढ़ का नाम भी शामिल है। प्रतिमाह करोड़ों रुपये की आमदनी देने वाले इस डिपो में सुविधाओं का अभाव था।
इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए आजमगढ़ डिपो को अत्याधुनिक बस अड्डा बनाने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे अपने ड्रीम प्रोजेक्टों में शामिल करते हुए रोडवेज भवन निर्माण की हरी झंडी देते हुए 10.51 करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिया खा। निर्माण को पूरा कराने की जिम्मेदारी निर्माण निगम को सौंपी गई थी। जून 2015 में पुराने रोडवेज भवन को तोड़कर नए भवन का निर्माण शुरू हुआ।
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रोडवेज परिसर में भवन निर्माण होने की वजह से बसों के संचालन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हालांकि व्यवस्था सुचारु करने के लिए अधिकारियों ने जजी का मैदान, पायलट वर्कशाप जैसे जगहों का चयन किया लेकिन खींचतान के चलते इन दोनों स्थानों पर बसें न जाकर रोडवेज के बाहर सड़क पर ही खड़ी होती हैं और सड़क पर ही कंडेक्टर सवारी भरते हैं। इस स्थिति के चलते यात्रियों को पता ही नहीं चलता कि किस स्थान के लिए बस कहां से मिलेगी।
उधर, निर्माण इकाई ने कार्य युद्धस्तर पर करते हुए लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा कर दिया। नए रोडवेज भवन को निर्धारित समय के अनुसार दिसंबर 2016 में भवन हैंडओवर करना था लेकिन धनाभाव के कारण करीब 15 दिनों से भवन निर्माण का कार्य ठप हो गया है।
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जून 2015 में रोडवेज भवन का निर्माण शुरू होने के बाद से ही रोडवेज की सभी बसें सड़क पर खड़ी हो रही हैं जिससे प्रतिदिन जाम की समस्या पैदा होती है, जिससे लोगों को परेशान होना पड़ता है। ऐसे में रोडवेज कर्मचारियों के अलावा आमजन को अगले वर्ष भी समस्याओं से छुटकारा नहीं मिलने की संभावना नहीं नजर आ रही है। परिवहन निगम विभाग के प्रमुख 10 डिपो में आजमगढ़ का नाम भी शामिल है। प्रतिमाह करोड़ों रुपये की आमदनी देने वाले इस डिपो में सुविधाओं का अभाव था।
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इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए आजमगढ़ डिपो को अत्याधुनिक बस अड्डा बनाने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे अपने ड्रीम प्रोजेक्टों में शामिल करते हुए रोडवेज भवन निर्माण की हरी झंडी देते हुए 10.51 करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिया खा। निर्माण को पूरा कराने की जिम्मेदारी निर्माण निगम को सौंपी गई थी। जून 2015 में पुराने रोडवेज भवन को तोड़कर नए भवन का निर्माण शुरू हुआ।
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रोडवेज परिसर में भवन निर्माण होने की वजह से बसों के संचालन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हालांकि व्यवस्था सुचारु करने के लिए अधिकारियों ने जजी का मैदान, पायलट वर्कशाप जैसे जगहों का चयन किया लेकिन खींचतान के चलते इन दोनों स्थानों पर बसें न जाकर रोडवेज के बाहर सड़क पर ही खड़ी होती हैं और सड़क पर ही कंडेक्टर सवारी भरते हैं। इस स्थिति के चलते यात्रियों को पता ही नहीं चलता कि किस स्थान के लिए बस कहां से मिलेगी।
उधर, निर्माण इकाई ने कार्य युद्धस्तर पर करते हुए लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा कर दिया। नए रोडवेज भवन को निर्धारित समय के अनुसार दिसंबर 2016 में भवन हैंडओवर करना था लेकिन धनाभाव के कारण करीब 15 दिनों से भवन निर्माण का कार्य ठप हो गया है।