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बगैर जुर्म के जेल में बिताए 27 दिन
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sun, 30 Oct 2016 12:06 AM IST
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दीदारगंज के सिसवारा गांव के एक युवक को बगैर जुर्म के 27 दिन जेल में बिताना पड़ा। सच्चाई सामने आने पर बरदह पुलिस की पहल पर उसे 28 वें दिन कोर्ट के आदेश पर रिहा कर दिया गया। धनतेरस के दिन युवक घर लौटा।
सिसवारा गांव के बबलू बिंद की बरदह थाने के नरवें गांव निवासी रोहित और सूरजभान से दोस्ती थी।
उसने सूरजभान से 20 हजार रुपये उधार लिए थे, लेकिन तंगी के चलते चुका नहीं पा रहा था। 16 सितंबर की शाम बबलू बिंद सिसवारा बाजार गया था। वहां तीन दोस्त मिल गए। सभी ने शराब पी। इसके बाद साथियों ने बबलू बिंद की हत्या कर लाश नहर में फेंक दी। 17 सितंबर को बबलू की लाश बरदह के मैनपुर गांव स्थित नहर में मिली। चूंकि बबलू और उसके गांव के जगन्नाथ के बीच किसी बात को लेकर नोकझोंक हुई थी।
इसलिए बबलू की मां शारदा देवी ने बरदह थाने में जगन्नाथ के खिलाफ नामजद और तीन अज्ञात के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा दी। गांव के एक व्यक्ति से जगन्नाथ की रंजिश भी है। विपक्षी जगन्नाथ की गिरफ्तारी का दबाव बनाने लगे। पुलिस ने एक अक्तूबर को जगन्नाथ को गिरफ्तार कर चालान कर दिया। जगन्नाथ के जेल जाने के बाद उसके बूढ़े मां-बाप, पत्नी, दो बच्चे और छोटी बहन की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा। पुलिस ने पड़ताल में पाया कि जगन्नाथ दोषी नहीं है। पुलिस ने सबूतों के आधार पर 17 अक्तूबर को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जबकि तीसरा आरोपी 27 अक्तूबर को कोर्ट में हाजिर हो गया। 28 अक्तूबर को एसओ बरदह की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने जगन्नाथ को बाइज्जत बरी कर दिया।
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सिसवारा गांव के बबलू बिंद की बरदह थाने के नरवें गांव निवासी रोहित और सूरजभान से दोस्ती थी।
उसने सूरजभान से 20 हजार रुपये उधार लिए थे, लेकिन तंगी के चलते चुका नहीं पा रहा था। 16 सितंबर की शाम बबलू बिंद सिसवारा बाजार गया था। वहां तीन दोस्त मिल गए। सभी ने शराब पी। इसके बाद साथियों ने बबलू बिंद की हत्या कर लाश नहर में फेंक दी। 17 सितंबर को बबलू की लाश बरदह के मैनपुर गांव स्थित नहर में मिली। चूंकि बबलू और उसके गांव के जगन्नाथ के बीच किसी बात को लेकर नोकझोंक हुई थी।
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इसलिए बबलू की मां शारदा देवी ने बरदह थाने में जगन्नाथ के खिलाफ नामजद और तीन अज्ञात के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा दी। गांव के एक व्यक्ति से जगन्नाथ की रंजिश भी है। विपक्षी जगन्नाथ की गिरफ्तारी का दबाव बनाने लगे। पुलिस ने एक अक्तूबर को जगन्नाथ को गिरफ्तार कर चालान कर दिया। जगन्नाथ के जेल जाने के बाद उसके बूढ़े मां-बाप, पत्नी, दो बच्चे और छोटी बहन की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा। पुलिस ने पड़ताल में पाया कि जगन्नाथ दोषी नहीं है। पुलिस ने सबूतों के आधार पर 17 अक्तूबर को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जबकि तीसरा आरोपी 27 अक्तूबर को कोर्ट में हाजिर हो गया। 28 अक्तूबर को एसओ बरदह की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने जगन्नाथ को बाइज्जत बरी कर दिया।
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