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UP: आजमगढ़ में बोले श्याम बिहारी- पहले कसाई को देखकर गाय कांपती थीं, अब गाय को देख कसाई कांप रहे

Wed, 27 Aug 2025 06:56 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 27 Aug 2025 06:56 PM IST
सार

यूपी के आजमगढ़ जिले में उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग ने पत्रकारवार्ता कर कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने सरकार की योजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया। कहा कि देश में बायोगैस प्लांट का विस्तार करने की योजना है।

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Shyam Bihari gupta said Earlier cows used to tremble on seeing butcher now butchers trembling on seeing cow
उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Azamgarh News: उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बुधवार को मंडलीय समीक्षा बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय मिशन घोषित किया है।

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उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत किसानों को गोआश्रय से गाय ले जाने पर प्रतिमाह 1500 रुपये दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले कसाई को देखकर गाय कांपती थीं, अब गाय को देखकर कसाई कांप रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 1 करोड़ 90 लाख देसी गायें हैं। प्रदेश की 25 करोड़ आबादी में से 22 करोड़ से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि मिल रही है। योगी सरकार बनने के बाद किसानों का कर्ज माफ हुआ, कत्लखाने और गोतस्करी पर रोक लगी और प्रदेश में 7717 गोआश्रय स्थल बनाए गए। 

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उन्होंने बताया कि गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम हो रहा है। हरे चारे का उत्पादन बढ़ाने, गोबर और गोमूत्र आधारित प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने तथा बायोगैस प्लांट का विस्तार करने की योजना है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक किसान के दरवाजे पर कम से कम दो गाय हों और खेतों में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती हो।

कहा वर्तमान में 7717 गोशालाओं में 12 लाख 58 हजार गोवंश संरक्षित हैं। चारागाह भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कर चारे के उत्पादन में उपयोग किया जाएगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर गोबर-गोमूत्र प्रसंस्करण इकाइयां और बायोगैस नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।

किसानों को गोपालन के लिए प्रेरित करने और मॉडल किसानों के नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए स्थलीय यात्राएं भी कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से खेत उपजाऊ रहेंगे, शुद्ध अन्न की प्राप्ति होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इससे गरीबी, बेरोजगारी और बीमारियों की समस्याओं का भी समाधान होगा।

उन्होने बताया कि सरकार ने गो संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए जिले की 20 से अधिक गोशालाओं के एक लाख गोवंश के संरक्षण के लिए इन्हें प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां प्राकृतिक कृषि, बायोगैस ऊर्जा और जैविक उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे स्वयं सहायता समूहों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

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