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जर्जर स्कूलों में पढ़ने की है मजबूरी

Fri, 22 Jul 2016 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ Updated Fri, 22 Jul 2016 11:50 PM IST
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 Shabby is the compulsion to read in schools
जर्जर स्कूल
सरकार शिक्षा पर हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन इसके बाद भी बच्चों के शैक्षिक स्तर में सुधार नहीं हो पा रहा है। वहीं, प्राथमिक विद्यालयों की अपेक्षा निजी विद्यालयों में बच्चों की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है। कई स्थानों पर भवन जर्जर होने के कारण छात्रों को दूसरे विद्यालयों में जाकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रह रही है। सबसे ज्यादा खराब हालत प्रबंधकीय विद्यालयों की है। जिले में 90 विद्यालयों के भवन जर्जर हैं।
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जनपद में कुल प्राथमिक विद्यालय 2267 और जूनियर विद्यालय 283 हैं। इनमें से बहुत से स्थानों पर जर्जर भवनों के स्थान पर नए भवन तो बन गए लेकिन पुराने भवनों को गिराया नहीं जा सका है। इसके कारण हमेशा दुर्घटना का भय सताता रहता है। इन विद्यालयों में लगभग 90 विद्यालयों के भवन जर्जर हैं। जहानागंज संवाददाता के अनुसार, विकास खंड में कुल 107 प्राथमिक और 46 जूनियर विद्यालय हैं। इनमें से 15 विद्यालय जर्जर हैं।
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जिनमें से जूनियर हाईस्कूल धरवारा की बिंल्डिंग काफी जर्जर है। इसके कारण विद्यालय के बच्चे प्राथमिक विद्यालय धरवारा के भवन में बैठकर शिक्षण कार्य करते हैं। जूनियर हाईस्कूल बड़ौरा, प्राथमिक विद्यालय बोहना, प्राथमिक विद्यालय कादीपुर, प्राथमिक विद्यालय बारीगांव, प्राथमिक विद्यालय शेरपुर, प्राथमिक विद्यालय भुजहीं, प्राथमिक विद्यालय जिगरसंडी आदि के भवन जर्जर हैं। लाटघाट संवाददाता के अनुसार, हरैया विकास खंड में कुल 172 परिषदीय विद्यालय हैं।
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इनमें 117 प्राथमिक विद्यालय और जूनियर विद्यालयों की संख्या 55 है। इनमें से प्राथमिक विद्यालय रामपुर नरैना और बर्जला गांगेपुर के भवन जर्जर हैं। प्रबंधकीय विद्यालय चंद्रबली ब्रह्मचारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय खैरघाट बाजार गोसाई की हालत खस्ता है। गोसाईं की बाजार संवाददाता के अनुसार, राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल लालगंज का भवन जर्जर है। इसके कारण बच्चों को मसीरपुर में स्थानांतरित कर दिया गया लेकिन अभिभावक बच्चों को मसीरपुर भेजने के बजाए प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं।


अहरौला संवाददाता के अनुसार, अहरौला विकास खंड में कुल 113 प्राथमिक और 45 जूनियर विद्यालय हैं। कुछ स्कूलों के भवन काफी जर्जर हो गए हैं। इसके चलते शिक्षकों और बच्चों को हमेशा दुर्घटना होने का भय सताता रहता है। विसईपुर प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक देवेंद्र यादव ने बताया कि उनके स्कूल का पुराना मुख्य भवन जर्जर हो चुका है। खंड शिक्षाधिकारी अहरौला पंकज सिंह ने बताया की जर्जर भवनों की जानकारी ले रहा हूं।
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