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तमसा के किनारे कई भवन
Azamgrah
Updated Sun, 24 Jun 2018 11:52 PM IST
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प्रतिबंधित क्षेत्र में बनाया गया भवन।
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तमसा तीरे ग्रीनलैंड में बने कृष्णा कालेज को तो आजमगढ़ विकास प्राधिकरण की टीम ने रविवार को ढहा दिया, लेकिन अब यह यक्ष प्रश्न उठता है कि इसी तमसा तीरे स्थित ग्रीनलैंड में स्थापित अन्य कंकरीट के इमारतों पर एडीए की नजरें पड़ेंगी और पड़ेगी तो कब। रविवार को शहर में ये चर्चाएं जोरों पर रहीं।
जिले में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण की स्थापना के बाद से ग्रीनलैंड क्षेत्र में सर्वाधिक निर्माण हुए है। कृष्णा कालेज की जहां तक बात है तो वह विकास प्राधिकरण के स्थापना के पूर्व का बना हुआ है। इसके बाद भी रविवार को एडीए की टीम ने ग्रीनलैंड में खड़ी कंकरीट की इस इमरारत को जमींदोज करा ही दिया।
इस कंकरीट की इमारत के अलावा भी सैकड़ों की संख्या में रिहायशी मकान और कई दर्जन भर व्यवसायिक प्रतिष्ठान ग्रीनलैंड में बड़े-बड़े कंकरीट के इमारत खड़ी कर संचालित हो रहे है। कृष्णा कालेज की भांति इन्हें भी एडीए ने ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद भी ये इमारतें बनकर न सिर्फ पूरी तहत तैयार हुईं, बल्कि इसमें बिना पंजीकरण व्यावसयिक गतिविधियां भी चालू हो रही हैं। ऐसे व्यवायिक भवनो में ठंडी सड़क पर बंधे से नदी की ओर तमसा की तलहटी तक होटल मानसरोवर का निर्माण हुआ है। इसके निर्माण के दौरान ही धवस्तीकरण नोटिस भेजी गई, लेकिन सचिव और अन्य कर्मचारियों ने सुविधा शुल्क लेने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की। वर्तमान में भी इस होटल में व्यावसायिक गतिविधि शुरू हो गई है। पिछले हिस्से में निर्माण कार्य अभी वर्तमान में रिववार को भी जारी था। वहीं शारदा तिराहे पर बंधे से नदी की तरफ एक दो नहीं कई होटल संचालित हो रहे है।
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इसमें होटल राजमहल के नीचले हिस्से में तो हर वर्ष बरसात के मौसम में तमसा नदी का पानी घुस जाता है। वहीं बगल में स्थित होटल मयूर को कई बार बंद भी कराया जा चुका है, लेकिन इसे जमीदोज नहीं कराया गया। रिहायशी मकानों की बात की जाए तो इनकी संख्या तो सैकड़ों में हैं।
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जिले में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण की स्थापना के बाद से ग्रीनलैंड क्षेत्र में सर्वाधिक निर्माण हुए है। कृष्णा कालेज की जहां तक बात है तो वह विकास प्राधिकरण के स्थापना के पूर्व का बना हुआ है। इसके बाद भी रविवार को एडीए की टीम ने ग्रीनलैंड में खड़ी कंकरीट की इस इमरारत को जमींदोज करा ही दिया।
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इस कंकरीट की इमारत के अलावा भी सैकड़ों की संख्या में रिहायशी मकान और कई दर्जन भर व्यवसायिक प्रतिष्ठान ग्रीनलैंड में बड़े-बड़े कंकरीट के इमारत खड़ी कर संचालित हो रहे है। कृष्णा कालेज की भांति इन्हें भी एडीए ने ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद भी ये इमारतें बनकर न सिर्फ पूरी तहत तैयार हुईं, बल्कि इसमें बिना पंजीकरण व्यावसयिक गतिविधियां भी चालू हो रही हैं। ऐसे व्यवायिक भवनो में ठंडी सड़क पर बंधे से नदी की ओर तमसा की तलहटी तक होटल मानसरोवर का निर्माण हुआ है। इसके निर्माण के दौरान ही धवस्तीकरण नोटिस भेजी गई, लेकिन सचिव और अन्य कर्मचारियों ने सुविधा शुल्क लेने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की। वर्तमान में भी इस होटल में व्यावसायिक गतिविधि शुरू हो गई है। पिछले हिस्से में निर्माण कार्य अभी वर्तमान में रिववार को भी जारी था। वहीं शारदा तिराहे पर बंधे से नदी की तरफ एक दो नहीं कई होटल संचालित हो रहे है।
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इसमें होटल राजमहल के नीचले हिस्से में तो हर वर्ष बरसात के मौसम में तमसा नदी का पानी घुस जाता है। वहीं बगल में स्थित होटल मयूर को कई बार बंद भी कराया जा चुका है, लेकिन इसे जमीदोज नहीं कराया गया। रिहायशी मकानों की बात की जाए तो इनकी संख्या तो सैकड़ों में हैं।