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‘मैं ज़िंदा हूँ’ ड्रीम प्रोजेक्ट, दस साल से कर रहा इस पर कामः सतीश कौशिक
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Thu, 18 Jan 2018 11:43 PM IST
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satish kaushik
- फोटो : अमर उजाला
आजमगढ़ के मुबारकपुर के अमिलो में रहने वाले मृतक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल बिहारी मृतक पर बॉलीवुड के मशहूर प्रोड्यूसर डायरेक्टर सतीश कौशिक ‘मैं ज़िंदा हूं’ नाम से फिल्म बनायेंगे।
जिसकी शूटिंग आजमगढ़, लखनऊ व मुम्बई में अप्रैल में शुरू हो जायेगी और इस वर्ष के अंत तक फिल्म पूरी कर रिलीज़ करेंगे। वैसे इस फिल्म का प्री प्रोडक्शन मुम्बई में शुरू हो चुका है।
कलाकारों का चयन जल्द करेंगे और इसमे स्थानीय कलाकार भी रहेंगे। गुरुवार को जनपद के एक होटल में पहुंचे सतीश कौशिक ने मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में बताया कि दस वर्ष पूर्व ही उन्होंने फिल्म बनाने का निर्णय ले लिया था।
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2006 में उन्हें स्क्रिप्ट मिली थी जिसपर दस वर्ष तक काम किया। उनके लिए यह फिल्म ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसने कई रात सोने नहीं दिया। आज के दौर में जिस प्रकार से बायो पिक पर फिल्म का जोर है उसमे यह फिल्म पूरी तरह से प्रासंगिक है।
लालबिहारी के बचपन से लेकर बड़े होने और फिर खुद को ज़िंदा दिखाने तक के संघर्ष पर फिल्म है। लाल बिहारी के बारे बहुत पहले स्क्रिप्ट पढ़ कर बहुत प्रभावित हुए थे।
सतीश कौशिक आजमगढ़ में शुक्त्रस्वार को विभिन्न लोकेशन जिसमे सदर तहसील, मुबारकपुर थाना, निजामाबाद थाना और मृतक के घर के अलावा अन्य लोकेशन की जांच करेंगे।
लाल बिहारी ने बताया कि उन्होंने 18 वर्ष 1976 से 1994 तक खुद को ज़िंदा करने के लिए काफी संघर्ष किया। फिल्म देख कर लोगों के आखों में पानी नहीं खून होगा।
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जिसकी शूटिंग आजमगढ़, लखनऊ व मुम्बई में अप्रैल में शुरू हो जायेगी और इस वर्ष के अंत तक फिल्म पूरी कर रिलीज़ करेंगे। वैसे इस फिल्म का प्री प्रोडक्शन मुम्बई में शुरू हो चुका है।
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कलाकारों का चयन जल्द करेंगे और इसमे स्थानीय कलाकार भी रहेंगे। गुरुवार को जनपद के एक होटल में पहुंचे सतीश कौशिक ने मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में बताया कि दस वर्ष पूर्व ही उन्होंने फिल्म बनाने का निर्णय ले लिया था।
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2006 में उन्हें स्क्रिप्ट मिली थी जिसपर दस वर्ष तक काम किया। उनके लिए यह फिल्म ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसने कई रात सोने नहीं दिया। आज के दौर में जिस प्रकार से बायो पिक पर फिल्म का जोर है उसमे यह फिल्म पूरी तरह से प्रासंगिक है।
लालबिहारी के बचपन से लेकर बड़े होने और फिर खुद को ज़िंदा दिखाने तक के संघर्ष पर फिल्म है। लाल बिहारी के बारे बहुत पहले स्क्रिप्ट पढ़ कर बहुत प्रभावित हुए थे।
सतीश कौशिक आजमगढ़ में शुक्त्रस्वार को विभिन्न लोकेशन जिसमे सदर तहसील, मुबारकपुर थाना, निजामाबाद थाना और मृतक के घर के अलावा अन्य लोकेशन की जांच करेंगे।
लाल बिहारी ने बताया कि उन्होंने 18 वर्ष 1976 से 1994 तक खुद को ज़िंदा करने के लिए काफी संघर्ष किया। फिल्म देख कर लोगों के आखों में पानी नहीं खून होगा।