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Azamgarh News: आरएम ने पहली टीम की भूमिका को बताया संदिग्ध, परिचालक का अनुबंध निरस्त, प्राथमिकी दर्ज
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रोडवेज बसों में टिकट चेकिंग की व्यवस्था पर एक ही बस की दो अलग-अलग जांच ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच सितंबर को बलिया डिपो की बस संख्या यूपी 78 एलएन 6113 की दो प्रवर्तन टीमों ने महज 48 मिनट के अंतराल में जांच की।
पहली टीम ने बस में 12 यात्री बिना टिकट पकड़े, जबकि दूसरी टीम को उसी बस में पांच यात्री बिना टिकट मिले। दूसरी टीम ने परिचालक द्वारा यात्रियों को दिए गए अवैध टिकट भी बरामद किए।
मामले में परिचालक प्रिया यादव का संविदा अनुबंध निरस्त करने के साथ उसके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। पांच सितंबर को बलिया डिपो की बस रसड़ा-बलिया मार्ग पर संचालित थी। पहली प्रवर्तन टीम ने देवस्थली के पास दोपहर 3:44 बजे बस को रोककर जांच की।
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उस समय बस में 32 यात्री सवार थे। भौतिक जांच में रसड़ा से विभिन्न स्थानों के लिए यात्रा कर रहे 12 यात्री बिना टिकट मिले। परिचालक ने इन यात्रियों से पहले ही किराया प्राप्त कर लिया था।
निरीक्षण टीम ने प्रशमन सहित ईटीआईएम से टिकट बनाकर यात्रियों को जारी किए। इन 12 यात्रियों से संबंधित टिकटों की कुल धनराशि 3,960 रुपये बताई गई है। मामले की वीडियोग्राफी बॉडीवार्न कैमरे से की गई।
निरीक्षणकर्ता की ओर से परिचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए रसड़ा थाने में तहरीर भी दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश प्रसाद ने प्रधान प्रबंधक (प्रवर्तन), परिवहन निगम मुख्यालय लखनऊ को रिपोर्ट भेजी है।
रिपोर्ट में पहली निरीक्षण टीम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसकी भूमिका संदिग्ध प्रतीत होने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि पहली जांच के महज 48 मिनट बाद शाम 4.32 बजे दूसरी प्रवर्तन टीम ने सागरपाली के पास उसी बस को रोककर जांच की।
इस समय बस में 20 यात्री सवार थे। जांच के दौरान रसड़ा से बलिया जा रहे पांच यात्री बिना टिकट पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक परिचालक ने इन यात्रियों से किराया प्राप्त करने के बाद उन्हें अवैध टिकट वितरित किए थे।
दूसरी टीम ने पांचों यात्रियों के लिए प्रशमन सहित कुल 2,530 रुपये का टिकट बनाया। साथ ही परिचालक द्वारा यात्रियों को दिए गए अवैध टिकटों को भी अपने कब्जे में ले लिया गया। इस पूरे प्रकरण की वीडियोग्राफी भी बॉडीवार्न कैमरे से की गई।
उन्होंने बताया कि संविदा परिचालक कु. प्रिया यादव, बलिया डिपो को दोषी मानते हुए छह सितंबर को जारी आदेश के तहत उनकी प्रतिभूति धनराशि जब्त करते हुए परिचालक आबद्धीकरण सूची से नाम अलग कर दिया गया तथा संविदा अनुबंध निरस्त कर दिया गया।
इसके साथ ही परिचालक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। विभागीय रिपोर्ट में बिना टिकट यात्रियों से किराया लेने और उन्हें अवैध टिकट वितरित किए जाने को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पहली टीम ने इन पांच यात्रियों को बिना टिकट होने के बावजूद छोड़ दिया और परिचालक द्वारा वितरित किए गए अवैध टिकटों को भी कलेक्ट नहीं किया। इसी आधार पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने पहली निरीक्षण टीम की भूमिका को संदिग्ध बताया है।
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पांच सितंबर को बलिया डिपो की बस में दो अलग-अलग प्रवर्तन टीमों ने निरीक्षण किया था। पहली टीम ने 12 यात्रियों को बिना टिकट पकड़ा, जबकि करीब 48 मिनट बाद दूसरी टीम ने उसी बस में पांच यात्री बिना टिकट पकड़े और परिचालक द्वारा दिए गए अवैध टिकट भी बरामद किए।पहली निरीक्षण टीम की कार्यप्रणाली भी संदिग्ध प्रतीत हुई है। दोनों टीमों की रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियोग्राफी के आधार पर मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई है। -जगदीश प्रसाद, आरएम आजमगढ़।
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पहली टीम ने बस में 12 यात्री बिना टिकट पकड़े, जबकि दूसरी टीम को उसी बस में पांच यात्री बिना टिकट मिले। दूसरी टीम ने परिचालक द्वारा यात्रियों को दिए गए अवैध टिकट भी बरामद किए।
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मामले में परिचालक प्रिया यादव का संविदा अनुबंध निरस्त करने के साथ उसके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। पांच सितंबर को बलिया डिपो की बस रसड़ा-बलिया मार्ग पर संचालित थी। पहली प्रवर्तन टीम ने देवस्थली के पास दोपहर 3:44 बजे बस को रोककर जांच की।
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उस समय बस में 32 यात्री सवार थे। भौतिक जांच में रसड़ा से विभिन्न स्थानों के लिए यात्रा कर रहे 12 यात्री बिना टिकट मिले। परिचालक ने इन यात्रियों से पहले ही किराया प्राप्त कर लिया था।
निरीक्षण टीम ने प्रशमन सहित ईटीआईएम से टिकट बनाकर यात्रियों को जारी किए। इन 12 यात्रियों से संबंधित टिकटों की कुल धनराशि 3,960 रुपये बताई गई है। मामले की वीडियोग्राफी बॉडीवार्न कैमरे से की गई।
निरीक्षणकर्ता की ओर से परिचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए रसड़ा थाने में तहरीर भी दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश प्रसाद ने प्रधान प्रबंधक (प्रवर्तन), परिवहन निगम मुख्यालय लखनऊ को रिपोर्ट भेजी है।
रिपोर्ट में पहली निरीक्षण टीम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसकी भूमिका संदिग्ध प्रतीत होने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि पहली जांच के महज 48 मिनट बाद शाम 4.32 बजे दूसरी प्रवर्तन टीम ने सागरपाली के पास उसी बस को रोककर जांच की।
इस समय बस में 20 यात्री सवार थे। जांच के दौरान रसड़ा से बलिया जा रहे पांच यात्री बिना टिकट पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक परिचालक ने इन यात्रियों से किराया प्राप्त करने के बाद उन्हें अवैध टिकट वितरित किए थे।
दूसरी टीम ने पांचों यात्रियों के लिए प्रशमन सहित कुल 2,530 रुपये का टिकट बनाया। साथ ही परिचालक द्वारा यात्रियों को दिए गए अवैध टिकटों को भी अपने कब्जे में ले लिया गया। इस पूरे प्रकरण की वीडियोग्राफी भी बॉडीवार्न कैमरे से की गई।
उन्होंने बताया कि संविदा परिचालक कु. प्रिया यादव, बलिया डिपो को दोषी मानते हुए छह सितंबर को जारी आदेश के तहत उनकी प्रतिभूति धनराशि जब्त करते हुए परिचालक आबद्धीकरण सूची से नाम अलग कर दिया गया तथा संविदा अनुबंध निरस्त कर दिया गया।
इसके साथ ही परिचालक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। विभागीय रिपोर्ट में बिना टिकट यात्रियों से किराया लेने और उन्हें अवैध टिकट वितरित किए जाने को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पहली टीम ने इन पांच यात्रियों को बिना टिकट होने के बावजूद छोड़ दिया और परिचालक द्वारा वितरित किए गए अवैध टिकटों को भी कलेक्ट नहीं किया। इसी आधार पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने पहली निरीक्षण टीम की भूमिका को संदिग्ध बताया है।
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पांच सितंबर को बलिया डिपो की बस में दो अलग-अलग प्रवर्तन टीमों ने निरीक्षण किया था। पहली टीम ने 12 यात्रियों को बिना टिकट पकड़ा, जबकि करीब 48 मिनट बाद दूसरी टीम ने उसी बस में पांच यात्री बिना टिकट पकड़े और परिचालक द्वारा दिए गए अवैध टिकट भी बरामद किए।पहली निरीक्षण टीम की कार्यप्रणाली भी संदिग्ध प्रतीत हुई है। दोनों टीमों की रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियोग्राफी के आधार पर मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई है। -जगदीश प्रसाद, आरएम आजमगढ़।