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नदी ने बदली धारा, तो जमीन पर बसा लिया गया शहर
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Wed, 17 Jan 2018 12:21 AM IST
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field of tamsa river
- फोटो : अमर उजाला
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अंबुज राय
नगर क्षेत्र की जीवनदायिनी कही जाने वाली तमसा की जमीन भी भूमाफियाओं की नजर में चढ़ गई है। नदी ने जैसे ही अपनी धारा बदली वैसे ही लोगों ने इसके पुराने रास्ते पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया।
आज नदी के पुराने रास्ते लोगों के आशियानों के बीच गुम हो गया है। और तो और लोगों ने पुराने रास्ते के जरिए बह रहे नाले को भी नहीं छोड़ा और उसमें पिलर खड़ाकर बिल्डिंग खड़ी कर ली। शिकायत होने के बाद मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंच गया, जिस पर जल्द ही फैसला आने की संभावना है।
तमसा लगभग 35 वर्ष पूर्व शहर से सटे गुरुघाट और रामघाट को स्पर्श करते हुए बवाली मोड़ के पास निकलती थी। जिस स्थान पर वर्तमान में बड़ा गणेश मंदिर है उसके पीछे से होकर नदी का बहाव था।
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लेकिन समय के साथ ही नदी ने भी अपनी धारा बदली और वह अपने पुराने स्थान से लगभग एक किमी दूर चली गई। नदी के पुराना स्थान छोड़ने के बाद बीच का यह भाग खाली हो गया। नदी के पुराने रास्ते से होकर शहर से निकलने वाले गंदे पानी का निकास होने लगा।
शहर से सटी होने के कारण इस बहुमूल्य भूमि पर भू-माफियाओं की नजर पड़ी और उन्होंने इस जमीन पर प्लाटिंग कराकर बेचना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने नदी की जमीन पर कब्जा कर अपना आशियाना बना लिया और यहां तक कि कुछ लोगों ने नाले में पिलर खड़ाकर उसपर कई मंजिला मकान बना लिया।
आज नदी के खाते की जमीन कब्जे के कारण अपना अस्तित्व खो चुकी है। नदी की इस जमीन पर होटल आदि व्यावसायिक भवनों का निर्माण किए जाने के कारण नदी के पुराने स्वरूप का अस्तित्व तो खत्म हुआ ही नाला भी लगभग समाप्ति के कगार पर पहुंच गया।
बारिश होने के बाद नदी के इस भू-भाग में बसे कोलपांडेय और कोल घाट के लोगों को पानी में से होकर अपने घरों तक पहुंचना पड़ता है।
इतना ही नहीं बड़ा गणेश मंदिर के सामने स्थित पोखरी को भी पाटने में भू-माफिया जुट गए थे लेकिन गहरी होने की वजह से पोखरी को पाटा नहीं पाए। हालांकि पोखरी अब भी भू-माफियाओं के निशाने पर है।
नदी की जमीन पर हुए कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन से होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जांच के दौरान जब उक्त जमीन नदी की पाई गई तो मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंच गया।
सूत्रों की मानें तो सुनवाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही इस पर फैसला आने की संभावना है। अगर जिलाधिकारी ने कब्जेदारों के खिलाफ फैसला दिया तो कई लोगों के आशियाने जमींदोज हो सकते हैं।
कुछ लोगों ने नदी की जमीन पर फर्जी इंट्री कराकर कब्जा कर रखा है। इसे खारिज कराने के लिए जिलाधिकारी न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। जैसे ही यह खारिज होगा आगे की कार्रवाई की जाएगी।-प्रशांत कुमार, एसडीएम सदर।
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नगर क्षेत्र की जीवनदायिनी कही जाने वाली तमसा की जमीन भी भूमाफियाओं की नजर में चढ़ गई है। नदी ने जैसे ही अपनी धारा बदली वैसे ही लोगों ने इसके पुराने रास्ते पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया।
आज नदी के पुराने रास्ते लोगों के आशियानों के बीच गुम हो गया है। और तो और लोगों ने पुराने रास्ते के जरिए बह रहे नाले को भी नहीं छोड़ा और उसमें पिलर खड़ाकर बिल्डिंग खड़ी कर ली। शिकायत होने के बाद मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंच गया, जिस पर जल्द ही फैसला आने की संभावना है।
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तमसा लगभग 35 वर्ष पूर्व शहर से सटे गुरुघाट और रामघाट को स्पर्श करते हुए बवाली मोड़ के पास निकलती थी। जिस स्थान पर वर्तमान में बड़ा गणेश मंदिर है उसके पीछे से होकर नदी का बहाव था।
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लेकिन समय के साथ ही नदी ने भी अपनी धारा बदली और वह अपने पुराने स्थान से लगभग एक किमी दूर चली गई। नदी के पुराना स्थान छोड़ने के बाद बीच का यह भाग खाली हो गया। नदी के पुराने रास्ते से होकर शहर से निकलने वाले गंदे पानी का निकास होने लगा।
शहर से सटी होने के कारण इस बहुमूल्य भूमि पर भू-माफियाओं की नजर पड़ी और उन्होंने इस जमीन पर प्लाटिंग कराकर बेचना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने नदी की जमीन पर कब्जा कर अपना आशियाना बना लिया और यहां तक कि कुछ लोगों ने नाले में पिलर खड़ाकर उसपर कई मंजिला मकान बना लिया।
आज नदी के खाते की जमीन कब्जे के कारण अपना अस्तित्व खो चुकी है। नदी की इस जमीन पर होटल आदि व्यावसायिक भवनों का निर्माण किए जाने के कारण नदी के पुराने स्वरूप का अस्तित्व तो खत्म हुआ ही नाला भी लगभग समाप्ति के कगार पर पहुंच गया।
बारिश होने के बाद नदी के इस भू-भाग में बसे कोलपांडेय और कोल घाट के लोगों को पानी में से होकर अपने घरों तक पहुंचना पड़ता है।
इतना ही नहीं बड़ा गणेश मंदिर के सामने स्थित पोखरी को भी पाटने में भू-माफिया जुट गए थे लेकिन गहरी होने की वजह से पोखरी को पाटा नहीं पाए। हालांकि पोखरी अब भी भू-माफियाओं के निशाने पर है।
नदी की जमीन पर हुए कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन से होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जांच के दौरान जब उक्त जमीन नदी की पाई गई तो मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंच गया।
सूत्रों की मानें तो सुनवाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही इस पर फैसला आने की संभावना है। अगर जिलाधिकारी ने कब्जेदारों के खिलाफ फैसला दिया तो कई लोगों के आशियाने जमींदोज हो सकते हैं।
कुछ लोगों ने नदी की जमीन पर फर्जी इंट्री कराकर कब्जा कर रखा है। इसे खारिज कराने के लिए जिलाधिकारी न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। जैसे ही यह खारिज होगा आगे की कार्रवाई की जाएगी।-प्रशांत कुमार, एसडीएम सदर।