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Azamgarh News: बारिश से स्कूलों के परिसर में कीचड़ और जलभराव की समस्या

Sat, 09 Aug 2025 01:43 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 09 Aug 2025 01:43 AM IST
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Problem of mud and waterlogging in school premises due to rain
बारिश के बाद स्कूल परिसर में कीचड़: संवाद - फोटो : samvad
आजमगढ़। जिले में 2706 परिषदीय स्कूलों में से ज्यादातर विद्यालय ऐसे हैं जो बरसात में बारिश और कीचड़ की समस्या से जूझते हैं। बारिश से कई स्कूलों के परिसर में कीचड़ और जलभराव की समस्या हो गई है। इससे पठन पाठन पर असर पड़ेगा। वहीं कुछ विद्यालय ऐसे हैं जिनके रास्ते आज भी कच्चे हैं इन रास्तों से विद्यालय पहुंचते हैं। देवारा क्षेत्र में 36 विद्यालय ऐसे हैं जो प्रतिवर्ष घाघरा की बाढ़ में डूब जाते हैं। वहीं विभाग के पास जिले के अन्य विद्यालय में जिनमें बरसात में पानी भरता है और पहुंच मार्ग कच्चा या नहीं है इसका आंकड़ा मौजूद नहीं है।
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केस 1
पल्हना। पल्हना ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय पर आने जाने के लिए संपर्क मार्ग कीचड़ युक्त है, इससे छात्राओं एवं शिक्षिकाओं को विद्यालय आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बिल्डिंग मैटेरियल लेकर गाड़ियां आती जाती रहती हैं जिससे बच्चों के खेलने का मैदान भी कीचड़ युक्त हो गया है। थोड़ी सी बारिश में भी विद्यालय पर जाने वाला रास्ता कीचड़ से सराबोर हो जाता है इससे विद्यालय पर आने जाने में छात्राओं सहित सभी लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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केस 2
निजामाबाद। कंपोजिट विद्यालय खोजापुर माधोपट्टी पल्हनी में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से पूरे कैंपस में कीचड़, गंदगी और जल भराव हो गया है। जल भराव हर बरसात में विद्यालय कैंपस में होता है। इससे मच्छरों का प्रकोप भी ज्यादा है। इसकी वजह से बच्चे विद्यालय जाने में कतराते हैं। जगह-जगह गंदगी, कीचड़ और घास उगी हुई है। सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
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केस 3
निजामबाद। सदर तहसील के इंग्लिश मीडियम प्राथमिक विद्यालय किशुनदासपुर पल्हनी परिसर में चारो तरफ पानी भरा हुआ है। छात्रों के आने जाने के लिए भी जगह नहीं बची है। पूरे प्रांगण में जगह-जगह गंदगी कीचड़ और घास उगी हुई है। यह पानी विद्यालय प्रांगण में हर बरसात में भर जाता है इसके निकासी की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है। ठीक बगल से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का सर्विस लेन बना हुआ है जिसकी वजह से पानी का निकास प्रभावित है।
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केस 4

पवई। पवई के भीमलपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय जाने के लिए रास्ता नहीं है। इससे बच्चों को पगडंडी के सहारे जाना पड़ रहा है। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है। 1979 में प्राथमिक विद्यालय बना। विद्यालय में 35 छात्रों का नामांकन है। एक प्रधानाध्यापक व एक शिक्षा मित्र की तैनाती है। विद्यालय बनने के 45 वर्ष बाद भी स्कूल जाने के लिए संपर्क मार्ग नहीं बनाया जा सका है।

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जिले में देवारा क्षेत्र के 36 परिषदीय विद्यालय हैं जिनमें बाढ़ के दौरान पानी घुस जाता है। इस दौरान इन विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को दूसरे विद्यालय में शिफ्ट कर दिया जाता है। अन्य विद्यालयों में जो पानी लगता है वह सूख जाता है।


अनिल सिंह, जेई बेसिक विभाग।
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