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आजमगढ़ में बिजकी कर्मचारियों की हड़ताल से गुल हुई बिजली, मचा हाहाकार, प्रशासनिक व्यवस्था फेल

Mon, 05 Oct 2020 11:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2020 11:21 PM IST
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Power failure, administrative system fails in Azamgarh
सिधारी हाईडिल पर यिजिकरण के विरोध में प्रडदर्शन करते विद्युत कर्मचारी। - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों के आंदोलन की शुरूआत तो सोमवार से हुई, लेकिन रविवार की रात से ही शहर से लेकर ग्रामीणांचल की बिजली व्यवस्था बेपटरी हो गई। रात 10 बजे से ही शहर से लेकर ग्रामीणांचल के ज्यादतर उपकेंद्रों से बिजली आपूर्ति ठप हो गई। उमस भरी गर्मी में रविवार की रात लोग रतजगा करने को मजबूर हुए। प्रस्तावित हड़ताल को लेकर प्रशासन द्वारा विद्युत आपूर्ति बहाल रखने का दावा फेल नजर आया।
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पावर कारर्पोरेशन के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में बिजली कर्मचारी लामबंद है। सोमवार की सुबह 10 बजे से बिजली कर्मचारियों ने पूर्ण हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी। इसके 12 घंटे पूर्व रविवार की रात 10 बजे से ही शहर से लेकर ग्रामीणांचल तक की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो गई। रातभर बत्ती गुल थी ही वहीं सोमवार को भी कुछ क्षेत्रों में ही लाइट आई और ज्यादातर में कटौती जारी रही। नगर से सटे मातनपुर फीडर में रविवार की रात लगभग 11 बजे फाल्ट हो गया। सोमवार की शाम तक इसकी मरम्मत नहीं हो सकी। इसके कारण इस फीडर से जुड़े लोग बिजली और पानी को तरस गए। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्रशासन द्वारा तैनात किए गए आईटीआई और पालिटेक्निक के पासआउट छात्र फाल्ट को दुरुस्त नहीं कर पाए। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों का भी हाल बुरा रहा। बिजली विभाग के कर्मचारी स्टेशन से आपूर्ति को बंद कर मौके से फरार हो गए। और तो और बिजली विभाग के कर्मचारियों ने कई ग्रामीण इलाकों में रविवार को ही फ्यूज को उड़ा दिया ताकि आपूर्ति तो हो लेकिन लोगों के घरों तक बिजली न पहुंच सके।
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बिजली कर्मचारियों के हड़ताल को देखते हुए जिला प्रशासन ने रविवार से ही सभी सब स्टेशनों पर पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगा दिया था। भारी संख्या में पुलिस फोर्स हाफिजपुर व सिधारी केंद्रों पर मौजूद रही। कर्मचारियों के धरना स्थल चीफ इंजीनियर आफिस परिसर के आसपास भी काफी संख्या में पुलिस व पीएसी के जवानों की तैनाती थी। वहीं एडीएम प्रशासन, एसडीएम, सीओ व संबंधित थानों के एसओ भी अपने-अपने क्षेत्रों में दिन भर चक्रमण करते नजर आए।
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चीफ इंजीनियर आफिस पर प्रदर्शन
सोमवार की सुबह चीफ इंजीनियर आफिस पर संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बिजली कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया। मुख्य अभियंता राजेश रंजन सिंह ने कहा कि दो दौर की वार्ता विफल हो चुकी है। इसके बाद भी सरकार ने कोई सकारात्मक पहल नहीं किया है। इसके चलते ही कर्मचारी हड़ताल पर जाने का विवश हुए है। एक्सईएन प्रथम अशोक कुमार ने कहा कि ऊर्जा मंत्री के साथ भी वार्ता का समय निर्धारित है। यदि यह वार्ता भी विफल होती है तो पूरे प्रदेश में बड़ा संकट उत्पन्न हो सकता है। कर्मचारियों ने घोषणा किया कि वे किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे। एसएन सिंह ने कहा कि सरकर आनन-फानन में गैर तकनीक कर्मचारियों लेखपाल, अमीन, सप्लाई इंस्पेक्टर आदि की ड्यूटी सब स्टेशनों पर लगाया गया है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। धरना प्रदर्शन में अरविंद सिंह, निखिल शेखर सिंह, अखिल पांडेय, रामवृक्ष, गोपेश, देवेंद्र, रामकुंजन, चंदन, अखिलेश, हरिओम, अंबुज, लालबहादुर, मुनव्वर अली समेत कभी कर्मचारी मौजूद रहे।
प्रशासन का दावा पूरी तरह दिखा फेल
जिला प्रशासन बिजली कर्मचारियों के हड़ताल को देखते हुए कई दिनों से अलर्ट पर थी। लगातार बिजली व्यवस्था हड़ताल होने पर भी दुरूस्त रखने का दावा किया जा रहा था। बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के पहले ही शहर से लेकर ग्रामीणांचल की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई। जिला प्रशासन का दावा पूरी तरह से फेल नजर आया। बिजली कर्मचारियों ने कहीं की बत्ती नहीं गुल किया लेकिन जहां फाल्ट हुआ उसे ठीक करने नहीं गए। जिला प्रशासन ने पॉलिटेक्निक व आईटीआई के पास आउट छात्रों के अलावा ठेकेदारी व्यवस्था के कर्मचारियों के बल पर निर्बाध बिजली व्यवस्था चालू रखने का दावा किया था लेकिन रविवार की रात दस बजे से ही बिजली गुल हुई जो सोमवार की देर शाम तक नहीं आई। प्रशासनिक दावे के पूरी तरह से फेल होन से आम जनता में आक्रोश भी देखने को मिला।

निजी प्रतिष्ठान भी हुए बंद, इंवर्टर ने भी दिया जवाब
बिजली की आपूर्ति बाधित होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दुकानों और घरों में लगे लोगों के इंवर्टर जवाब दे गए। जिसके कारण लोगों को रात के बाद दिन भी हाथ के पंखे के सहारे गुजारना पड़ा। निजी प्रतिष्ठानों में लोगों ने इंवर्टर लगाए थे लेकिन वह भी जवाब दे गया। जिसके कारण लोगों को अपने निजी प्रतिष्ठान भी बंद करने पड़े।

अहरौला के रेडहा विद्युत सब स्टेशन पर तैनात पुलिस।

अहरौला के रेडहा विद्युत सब स्टेशन पर तैनात पुलिस।- फोटो : AZAMGARH

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