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पाक नागरिकों की करोड़ों की संपत्ति हुई सरकारी
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आजमगढ़। देश के बंटवारा के बाद जनपद के भी तमाम लोग देश छोड़कर पाकिस्तान चले गए। वहां की नागरिकता लेकर पाक के नागरिक बन गए। यहां रहने वाले इनके पड़ोसी आदि ने अभिलेखों में हेराफेरी कर उनकी करोड़ों की जमीन को हड़प लिया, जो नियमत: सरकारी (शत्रु संपत्ति) होनी चाहिए। इसी तरह से जुड़े एक मामले में 23 अक्तूबर को डीएम नागेंद्र प्रसाद सिंह ने फैसला देते हुए बिलरियागंज थाना क्षेत्र के छीही गांव में मौजूद पाक नागरिकों की करोड़ों रुपये की जमीन (1.8360 हेक्टेयर) को राज्य सरकार की संपत्ति घोषित कर दिया है। डीएम के निर्देश पर गांव में पहुंची पुलिस ने आरोपियों को खेत में बोए गए धान के फसल को न काटने की चेतावनी दी है।
बिलरियागंज थाना क्षेत्र के छीही गांव निवासी जुबैर अहमद पुत्र सुल्तान ने मुख्य राजस्व अधिकारी कोर्ट में वाद दाखिल किया था कि छीहीं गांव निवासी सरीफ, नसीम और कलीम 1947-48 में पाकिस्तान चले गए। लोग वहीं की नागरिकता लेकर बस गए हैं। गांव या देश में अब इनके परिवार का कोई सदस्य नहीं मौजूद है। ऐसे में इन तीनों के पड़ोसी छीही गांव निवासी सेराज, मेराज, मेनाज के पिता सफीक अहमद ने 15 अक्तूबर 1979 को राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से पाकिस्तान जाने वाले तीनों लोगों की करोड़ों रुपये की जमीन अपने नाम करा लिया। आरोप लगाया कि सफीक अहमद पुत्र मो. नईम काफी चालाक, फितरती और जालसाज किस्म के व्यक्ति थे।
कमिश्नर प्रकरण को डीएम की कोर्ट में स्थानांतरित किया था। डीएम एनपी सिंह ने प्रकरण में सुनवाई के दौरान विद्वान अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों पर गौर करने के बाद अपना फैसला सुनाया है। तीनों पाक नागरिकों की करोड़ो रुपये मूल्य की जमीन को राज्य सरकार की संपत्ति ( कस्टोडियन) घोषित करने का फैसला दिया है। डीएम के आदेश के बाद आदेश की राजस्व अभिलेखों में अमल दरामद भी कर दी गई है। तहसीलदार सगड़ी ने उक्त जमीन में बोई गई फसल को काटने पर रोक लगा दी है। फसल न काटने और न बोने की चेतावनी दी है। आशीष तिवारी
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बिलरियागंज थाना क्षेत्र के छीही गांव निवासी जुबैर अहमद पुत्र सुल्तान ने मुख्य राजस्व अधिकारी कोर्ट में वाद दाखिल किया था कि छीहीं गांव निवासी सरीफ, नसीम और कलीम 1947-48 में पाकिस्तान चले गए। लोग वहीं की नागरिकता लेकर बस गए हैं। गांव या देश में अब इनके परिवार का कोई सदस्य नहीं मौजूद है। ऐसे में इन तीनों के पड़ोसी छीही गांव निवासी सेराज, मेराज, मेनाज के पिता सफीक अहमद ने 15 अक्तूबर 1979 को राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से पाकिस्तान जाने वाले तीनों लोगों की करोड़ों रुपये की जमीन अपने नाम करा लिया। आरोप लगाया कि सफीक अहमद पुत्र मो. नईम काफी चालाक, फितरती और जालसाज किस्म के व्यक्ति थे।
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कमिश्नर प्रकरण को डीएम की कोर्ट में स्थानांतरित किया था। डीएम एनपी सिंह ने प्रकरण में सुनवाई के दौरान विद्वान अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों पर गौर करने के बाद अपना फैसला सुनाया है। तीनों पाक नागरिकों की करोड़ो रुपये मूल्य की जमीन को राज्य सरकार की संपत्ति ( कस्टोडियन) घोषित करने का फैसला दिया है। डीएम के आदेश के बाद आदेश की राजस्व अभिलेखों में अमल दरामद भी कर दी गई है। तहसीलदार सगड़ी ने उक्त जमीन में बोई गई फसल को काटने पर रोक लगा दी है। फसल न काटने और न बोने की चेतावनी दी है। आशीष तिवारी
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