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कठघोड़वा नृत्य पेश कर उड़ीसा के कलाकारों ने लूटी वाहवाही

Sat, 28 Dec 2019 11:48 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 28 Dec 2019 11:48 PM IST
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Orissa artists looted applause by presenting a dance sequence
आजमगढ़। हुनर संस्थान द्वारा आयोजित पांच दिवसीय हुनर रंग महोत्सव का तीसरा शनिवार का दिन स्व. राजेश्वरी देवी अग्रवाल के नाम रहा। जिसका शुभारंभ पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा, डा. पीयूष सिंह यादव व अभिषेक जायसवाल दीनू ने संयुक्त रूप से किया।
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दीप प्रज्ज्वलन के बाद मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व राजेश्वरी देवी अग्रवाल के चित्र पर पुष्प अर्पित किया गया। इसके बाद नंद संगीत खुर्दा उड़ीसा द्वारा वहां का पारंपरिक लोकनृत्य कठघोड़वा पेश किया गया। कलाकारों की वेशभूषा व उनकी गायन शैली लोगों को आकर्षित कर रही थी। दूसरी प्रस्तुति के रूप में वेस्टर्न स्टाइल में रॉकस्टार डांस ग्रुप मिर्जापुर द्वारा समूह नृत्य की प्रस्तुति हुई। तीसरी प्रस्तुति के रूप में नर्तन कला केंद्र असम की मृदुस्मिता कश्यप ने बिहू उप शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। जिसकी उपस्थित दर्शकों ने सराहना की। फिर शुरू हुआ नाटकों का दौर जिसकी प्रथम प्रस्तुति के रूप में स्वच्छ भारत अभियान को इंगित करता मणिपुर ड्रैमेटिक यूनियन इंफाल द्वारा ‘‘स्वच्छ भारत’’ का मंचन किया गया। नाटक का मूल उद्देश्य ये था कि एक अच्छे समाज के लिए सिर्फ साफ. सफाई ही नहीं बल्कि साफ स्वच्छ परिवेश भी होना चाहिए। इसलिए यह आवश्यक है कि हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना चाहिए। तभी स्वच्छ भारत अभियान सफल होगा। दूसरी नाट्य प्रस्तुति भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर द्वारा लिखित व अभय सिंह द्वारा निर्देशित जागो सेवा संस्थान बलिया द्वारा लोकनाट्य ‘‘विदेशिया’’ का भावपूर्ण मंचन किया गया। नाटक विदेशिया अपने आप में बहुत कुछ बयां करता है। यह उस काल प्रवेश की बात है। जब व्यक्ति कमाने के लिए परदेस जाता है और वहां की चकाचौंध में फंसकर अपने परिवार को भूल जाता है। लेकिन जब वापस अपने परिवार में आता है। तो अपने परिवार का त्याग, पत्नी का अंतंद्वंद देख उसका ह्रदय परिवर्तित होता है। यह नाटक सभी को एक संदेश देता है कि जहां भी रहे लेकिन अपने परिवार को ना भूलिए। तीसरी प्रस्तुति के रूप में प्रदीर्घ रंगशाला खैरागढ़ राजनंदगांव छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा डॉ ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा लिखित अमन रावत द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘दीवानों की दास्तान’’ की प्रस्तुति हुई जो एक व्यंग नाटक है। यह नाटक एक आम ऑफिस के ऊपर आधारित है। जहां के कर्मचारी अलग.अलग पोजीशन पर स्थापित हैं। यह काम ऑफिस की तरह साफ है इसमें भी सभी सारी चीजें सामान्य सी होती हैं। लेकिन तब तक जब तक ऑफिस में एक असामान्य घटना नहीं होती। यह घटना धीरे.धीरे ऑफिस के कर्मचारियों के असल व्यक्तित्व को प्रदर्शित करने लगती है। कुल डमिलाकर नाटक समाज में मौजूद आम और खास लोगों के व्यक्तित्व को दर्शाता एक व्यंग नाटक है। कार्यक्रम को सफल बनाने में गौरव अग्रवाल, रमाकांत वर्मा, मनीष रतन अग्रवाल, नीरज अग्रवाल, प्रवीण सिंह, अमरजीत विश्वकर्मा, रवि चौरसिया, कमलेश सोनकर, नौशाद अहमद आदि लगे हुए हैं। कार्यक्रम का संचालन सुनील दत्त विश्वकर्मा ने किया।
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