{"_id":"581f73414f1c1bf77eb37786","slug":"offer-water-to-the-sun","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Sun, 06 Nov 2016 11:45 PM IST
विज्ञापन
छठ पूजा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुत्रों की दीर्घायु और परिवार के सुख समृद्घि की कामना के साथ छठ व्रत रखने वाली महिलाएं रविवार की शाम को नदी, तलाबों के घाटों पर पहुुंचकर अस्तागामी सूर्य की पूजा कर अर्घ्य दिया। पूजा अर्चन के लिए अपराह्न तीन बजे से ही श्रद्धालु महिलाएं घाटों की तरफ साज बाज के साथ रवाना हो गई थी। नगर क्षेत्र में तमसा तट पर मौजूद 17 घाट दीपों की रौशनी और झालरों की सजावट से जगमगा उठे। पूरे क्षेत्र में छठ मैय्या के गीत गूंजते रहे।
सूर्य उपासना के चार दिवसीय महापर्व डाला छठ पर रविवार की शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने के लिए आस्था का सैलाब घाटों पर उमड़ पड़ा। गाजे-बाजे के साथ व्रती महिलाएं घाटों की ओर निकल पड़ीं। शहर के लगभग हर मोहल्लों से घाटों तक छठ मैय्या की गीत गाती आस्था में डूबी महिलाओं का रेला लगा रहा। आगे-आगे परिवार के बच्चों सहित पुरुष डलिया में पूजन सामग्री लिए चल रहे थे।
भीड़ का आलम यह था कि गौरीशंकर घाट, कदम घाट, भोला घाट, सिधारी, नरौली, राजघाट पर तिल रखने भर के लिए जगह नहीं बची। पानी में व्रती महिलाएं अपनी-अपनी वेदियों के सामने सूर्य उपासना में डूबी अस्ताचलगामी सूर्य की तरफ टकटकी लगाए रखीं। भगवान सूर्य के अस्त होते ही अर्घ्य देने के लिए हाथ एक साथ आगे बढ़े तो हर तरफ भगवान भास्कर के जयकारे लगने लगे। सूर्य का पूजन-अर्चन कर महिलाओं ने पूजा वेदी पर दीप जलाया और प्रसाद भी चढ़ाया।
विज्ञापन
अर्घ्य देने के लिए इस कदर होड़ मची थी कि घाटों पर जगह नहीं मिल पा रही थी। कारण कि व्रती महिलाओं के साथ उनके साथ गई महिलाएं और पति भी अर्घ्य देने में पीछे नहीं रहे। सर्वाधिक भीड़ दलाल घाट, गौरी शंकर घाट, कटम घाट, भोला घाट और सिधारी घाट, हरबंशपुर घाट पर रही। इस दौरान पूजा पंडालों में दर्शन-पूजन के लिए तांता लगा रहा।
विज्ञापन
सूर्य उपासना के चार दिवसीय महापर्व डाला छठ पर रविवार की शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने के लिए आस्था का सैलाब घाटों पर उमड़ पड़ा। गाजे-बाजे के साथ व्रती महिलाएं घाटों की ओर निकल पड़ीं। शहर के लगभग हर मोहल्लों से घाटों तक छठ मैय्या की गीत गाती आस्था में डूबी महिलाओं का रेला लगा रहा। आगे-आगे परिवार के बच्चों सहित पुरुष डलिया में पूजन सामग्री लिए चल रहे थे।
विज्ञापन
भीड़ का आलम यह था कि गौरीशंकर घाट, कदम घाट, भोला घाट, सिधारी, नरौली, राजघाट पर तिल रखने भर के लिए जगह नहीं बची। पानी में व्रती महिलाएं अपनी-अपनी वेदियों के सामने सूर्य उपासना में डूबी अस्ताचलगामी सूर्य की तरफ टकटकी लगाए रखीं। भगवान सूर्य के अस्त होते ही अर्घ्य देने के लिए हाथ एक साथ आगे बढ़े तो हर तरफ भगवान भास्कर के जयकारे लगने लगे। सूर्य का पूजन-अर्चन कर महिलाओं ने पूजा वेदी पर दीप जलाया और प्रसाद भी चढ़ाया।
विज्ञापन
अर्घ्य देने के लिए इस कदर होड़ मची थी कि घाटों पर जगह नहीं मिल पा रही थी। कारण कि व्रती महिलाओं के साथ उनके साथ गई महिलाएं और पति भी अर्घ्य देने में पीछे नहीं रहे। सर्वाधिक भीड़ दलाल घाट, गौरी शंकर घाट, कटम घाट, भोला घाट और सिधारी घाट, हरबंशपुर घाट पर रही। इस दौरान पूजा पंडालों में दर्शन-पूजन के लिए तांता लगा रहा।