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Azamgarh News: अब सरकारी स्कूल के बच्चे भी चलेंगे राजा और वजीर की चाल

Tue, 21 May 2024 01:47 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 May 2024 01:47 AM IST
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Now government school children will also follow the tricks
आजमगढ़। सरकारी स्कृूल के बच्चों की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने शतरंज समेत आठ नए खेलों को स्पोर्ट्स फॉर स्कूल कार्यक्रम में शामिल किया है। अब सरकारी स्कूल के बच्चे भी शह और मात के खेल में राजा, वजीर, घोड़े, ऊंट, हाथी और प्यादे की बिसात विछाते दिखेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में इसे शामिल किया है।
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शतरंज को बुद्धिमता का खेल माना जाता है। इसमें एक चाल चलने से पहले आगे की तीन चाल सोचनी पड़ती है। यही कारण है कि इसमें शारीरिक श्रम की अपेक्षा बौद्धिक श्रम अधिक लगाना पड़ता है। अब तक सरकारी स्कूलों के खेल में यह शामिल नहीं था। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सत्र 2024-2025 के शैक्षिक सत्र में स्पोर्ट्स फार स्कूल कार्यक्रम में इसे शामिल किया है। साईं इंटरनेशन स्कूल के शतरंज के शिक्षक मलयज दीक्षित ने बताया कि गुजरात सहित अन्य प्रदेशों में शतरंज के खेल को अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं था।
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ये खेल भी शामिल : मलखंब, योगासन, वुशू, कुराश, गतका, सेपक टकरा किक वॉलीबाल, कलारीपट्टू व शांगता मार्शल आर्ट को शामिल किया गया है।
शतरंज से बेहतर कोई खेल नहीं : बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए शतरंज से बेहतर कोई खेल नहीं है। प्रदेश सरकार ने इसे माध्यमिक विद्यालयों के खेलों में शामिल करके सराहनीय कार्य किया है। इससे शतरंज के पुराने खिलाड़ियों को रोजगार भी मुहैया होगा।- मलयज दीक्षित, शतरंज शिक्षक।
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शतरंज को माध्यमिक विद्यालयों में होने वाली वार्षिक प्रतियोगिताओं में शामिल करके सरकार ने सराहनीय कार्य किया है। शतरंज से उनकी बौद्धिक क्षमता में भी वृद्धि होगी। - मनोज कुमार मिश्रा, डीआईओएस आजमगढ़।
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