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कोविड के बाद मानसिक त्रास, सुलझाने वाला कोई नहीं
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आजमगढ़। कोरोना चला गया लेकिन वह फेफड़ों, खून की नलियों और मस्तिष्क पर अपने निशान छोड़ गया है। पोस्ट कोविड स्वास्थ्य परेशानियों के साथ-साथ लोगों को इन बीमारियों का फोबिया भी सता रहा है। तमाम लोग कोविड से मुक्ति पाने के बाद अवसाद की स्थिति से गुजर रहे हैं।
कोरोना संक्रमण के बाद ठीक हुए लोग अवसाद का शिकार हो रहे हैं। किसी को ब्लैक फंगस, गले में खराश, एसिडिटी और फोबिया सता रहा है तो किसी को दोबारा संक्रमित होने का हर लग रहा है। बहुत से लोग डेल्टा वैरिएंट को लेकर चिंता में हैं। ऐसे लोगों को काउंसिलिंग की सख्त जरूरत है लेकिन जनपद में सरकारी अस्पतालों में एक भी मनोचिकित्सक की तैनाती नहीं है, जो इनकी उलझन को सुलझा सके। ऐसे में लोग भयभीत होकर इधर-उधर भटक रहे हैं। जिनको समस्या की समझ है वे निजी चिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। चिकित्सकों कहना है कि रोजाना पोस्ट कोविड अवसाद के शिकार 30 से 40 मरीज उनके पास आ रहे हैं। उनकी बीमारी का इलाज काउंसिलिंग से ही किया जा सकता है।
जिले में एक भी मनोचिकित्सक की तैनाती नहीं है। चार से पांच चिकित्सकों को लखनऊ में प्रशिक्षण दिलाकर इसके लिए तैयार किाय गया है। इनमें दो चिकित्सकों ने हफ्ते में दो दिन जिला चिकित्सालय में बैठना शुरू कर दिया है। वैैसे भी पोस्ट कोविड फोबिया से ग्रसित मरीजों की काउंसिलिंग फिजिशियन भी कर सकते हैं।
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डा. एके मिश्रा, सीएमओ
कोरोना से संक्रमण के बाद बहुत से लोग अवसाद से ग्रसित हो गए हैं। जो पहले से कमजोर थे वे ज्यादा चिंता में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे मरीजों की काउंसिंलिंग करनी पड़ रही है। कुछ लोग जल्दी ठीक हो रहे हैं लेकिन कुछ में बीमारी ने जटिल रूप धारण कर लिया है। रोजाना 30 से 40 मरीज काउंसिलिंग के लिए आ रहे हैं। डा. ऋचा सक्सेना, मनोवैैज्ञानिक
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कोरोना संक्रमण के बाद ठीक हुए लोग अवसाद का शिकार हो रहे हैं। किसी को ब्लैक फंगस, गले में खराश, एसिडिटी और फोबिया सता रहा है तो किसी को दोबारा संक्रमित होने का हर लग रहा है। बहुत से लोग डेल्टा वैरिएंट को लेकर चिंता में हैं। ऐसे लोगों को काउंसिलिंग की सख्त जरूरत है लेकिन जनपद में सरकारी अस्पतालों में एक भी मनोचिकित्सक की तैनाती नहीं है, जो इनकी उलझन को सुलझा सके। ऐसे में लोग भयभीत होकर इधर-उधर भटक रहे हैं। जिनको समस्या की समझ है वे निजी चिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। चिकित्सकों कहना है कि रोजाना पोस्ट कोविड अवसाद के शिकार 30 से 40 मरीज उनके पास आ रहे हैं। उनकी बीमारी का इलाज काउंसिलिंग से ही किया जा सकता है।
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जिले में एक भी मनोचिकित्सक की तैनाती नहीं है। चार से पांच चिकित्सकों को लखनऊ में प्रशिक्षण दिलाकर इसके लिए तैयार किाय गया है। इनमें दो चिकित्सकों ने हफ्ते में दो दिन जिला चिकित्सालय में बैठना शुरू कर दिया है। वैैसे भी पोस्ट कोविड फोबिया से ग्रसित मरीजों की काउंसिलिंग फिजिशियन भी कर सकते हैं।
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डा. एके मिश्रा, सीएमओ
कोरोना से संक्रमण के बाद बहुत से लोग अवसाद से ग्रसित हो गए हैं। जो पहले से कमजोर थे वे ज्यादा चिंता में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे मरीजों की काउंसिंलिंग करनी पड़ रही है। कुछ लोग जल्दी ठीक हो रहे हैं लेकिन कुछ में बीमारी ने जटिल रूप धारण कर लिया है। रोजाना 30 से 40 मरीज काउंसिलिंग के लिए आ रहे हैं। डा. ऋचा सक्सेना, मनोवैैज्ञानिक