आजमगढ़। उप्र शासन नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति अनुभाग-3 एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग उप्र लखनऊ द्वारा बिना एनओसी प्राप्त किए संचालित उद्योगों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने दिया है।
डीएम ने बताया कि उप्र भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम-2019 प्रख्यापित होने के बाद ट्यूबवेल, बोरवेल, सबमर्सिबल के माध्यम से भूजल निष्कषर्ण कर रहे समस्त वाणिज्यिक, औद्योगिक, अवसंरचनात्मक और सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ताओं तथा वेधन अभिकरण (ड्रिलिंग एजेंसी) को जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) व पंजीकरण कराना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि अन्यथा की स्थिति में उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम, 2019 की धारा-39 के तहत दो लाख से पांच लाख तक का जुर्माना व छह माह से एक वर्ष तक के कारावास के साथ दंडित किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने समस्त वाणिज्यिक, औद्योगिक अवसंरचनात्मक और सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ता तथा वेधन अभिकरण (ड्रिलिंग एजेंसी) को निर्देशित किया है कि उपरोक्त आदेशों के क्रम में भूगर्भ जल दोहन के संबंध में आवश्यक उपकरण व अन्य मानकों की पूर्ति करते हुए 15 दिवसों के अंदर ऑनलाइन पंजीकरण के लिए वेबसाइट पर कराते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर सकते हैं। समस्या होने पर आनंद प्रकाश हाइड्रोलॉजिस्ट एवं नोडल अधिकारी (जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद), भूगर्भ जल विभाग सिधारी से संपर्क कर सकते हैं।