{"_id":"6484cef01566ac229b0064d4","slug":"no-x-ray-and-sonography-facility-in-chc-azamgarh-news-c-20-1-246612-2023-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Azamgarh News: सीएचसी में एक्सरे और सोनोग्राफी की सुविधा नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Azamgarh News: सीएचसी में एक्सरे और सोनोग्राफी की सुविधा नहीं
विज्ञापन
आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर 2014 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना कराई गई थी। उस समय ही यहां एक्सरे व सोनोग्राफी मशीन स्थापित किए जाने की बात कही गई थी लेकिन अब तक वह स्थापित नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी अब तक तैनाती नहीं हुई है तो वहीं ओपीडी में बैठने वाले डॉक्टर अस्पताल की सरकारी दवाओं के अलावा बाहर की दवाएं भी लिखते हैं। यहां भी 30 बेड के बजाय मात्र 25 बेड की ही सुविधा उपलब्ध है।
अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को सीएचसी अहरौला की पड़ताल की। निर्धारित आठ बजे के समय तक लगभग सभी डॉक्टरों के ओपीडी कक्ष, दवा काउंटर आदि खुल गए थे। कुछ डॉक्टर अपनी ओपीडी में मौजूद थे तो कुछ ओपीडी खाली भी पड़ी थी। प्रभारी अधीक्षक डॉ. योगेश कुमार अपने कक्ष में बैठ कर मरीज देख रहे थे। उन्होंने बताया कि 2014 में यह सीएचसी स्थापित की गई। इसके पूर्व यहां पीएचसी थी। मरीजों की भीड़ को देखते हुए शासन ने उसे उच्चीकृत कर सीएचसी बनाया था। नया भवन भी बना हुआ है। यहां एक्स-रे व सोनोग्राफी मशीन भी लगाई जानी थी लेकिन अब तक मशीनें उपलब्ध नहीं हो सकी है। आयुर्वेदिक डॉक्टर सुनीता पांडेय, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके वर्मा, होम्योपैथ डॉक्टर सुरेंद्र कुमार अपने-अपने कक्ष में मरीज देख रहे थे। सर्जन डॉ. एचएल सरोज अपने ओपीड कक्ष में तो नहीं थे लेकिन नसबंदी कैंप में ड्यूटी कर रहे थे।
बाहर से करानी पड़ती है एक्सरे, सोनोग्राफी
अहरौला। स्थापना के नौ साल बाद भी शासन से एक्सरे व सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध नहीं कराए जाने के चलते यहां आने वाले मरीजों को बाहर से जांच करानी पड़ती है। पैथोलॉजी में भी मात्र सामान्य जांच ही होती है। बड़ी जांच के लिए फिर बाहर स्थित प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटरों पर जाना पड़ता है। सीएचसी बनने के बाद यहां एक साल बाद ही टेक्नीशियन की भी तैनाती कर दी गई थी लेकिन मशीन नहीं लगने के चलते उन्हें पवई स्वास्थ्य केंद्र से अटैच कर दिया गया। इसके अलावा यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ, स्टाफ नर्स की कमी है। मात्र तीन स्टाफ नर्स ही यहां तैनात है।
विज्ञापन
000000000000
प्रतिदिन होती है डेढ़ से दो सौ मरीजों की ओपीडी
अहरौला। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहरौला पर मरीजों की संख्या प्रतिदिन ठीक ठाक रहती है। अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार प्रतिदिन डेढ़ से दो सौ मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते है। वहीं प्रसव केस की बात की जाए तो वह भी प्रतिदिन चार से पांच यहां आ ही जाते है। दवाएं अंदर के साथ ही बाहर की भी लिखी जाती है।
000000000000
कुछ डॉक्टरों व संसाधनों की कमी है, जिसके लिए मुख्यालय को मांग भेजी गई है। दवाएं 90 प्रतिशत तक अंदर की ही लिखी जाती है, जो दवा नहीं होती है, उसे ही बाहर से लिखा जाता है।
डॉ. योगेश कुमार, प्रभारी अधीक्षक, सीएचसी अहरौला।
विज्ञापन
अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को सीएचसी अहरौला की पड़ताल की। निर्धारित आठ बजे के समय तक लगभग सभी डॉक्टरों के ओपीडी कक्ष, दवा काउंटर आदि खुल गए थे। कुछ डॉक्टर अपनी ओपीडी में मौजूद थे तो कुछ ओपीडी खाली भी पड़ी थी। प्रभारी अधीक्षक डॉ. योगेश कुमार अपने कक्ष में बैठ कर मरीज देख रहे थे। उन्होंने बताया कि 2014 में यह सीएचसी स्थापित की गई। इसके पूर्व यहां पीएचसी थी। मरीजों की भीड़ को देखते हुए शासन ने उसे उच्चीकृत कर सीएचसी बनाया था। नया भवन भी बना हुआ है। यहां एक्स-रे व सोनोग्राफी मशीन भी लगाई जानी थी लेकिन अब तक मशीनें उपलब्ध नहीं हो सकी है। आयुर्वेदिक डॉक्टर सुनीता पांडेय, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके वर्मा, होम्योपैथ डॉक्टर सुरेंद्र कुमार अपने-अपने कक्ष में मरीज देख रहे थे। सर्जन डॉ. एचएल सरोज अपने ओपीड कक्ष में तो नहीं थे लेकिन नसबंदी कैंप में ड्यूटी कर रहे थे।
विज्ञापन
बाहर से करानी पड़ती है एक्सरे, सोनोग्राफी
अहरौला। स्थापना के नौ साल बाद भी शासन से एक्सरे व सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध नहीं कराए जाने के चलते यहां आने वाले मरीजों को बाहर से जांच करानी पड़ती है। पैथोलॉजी में भी मात्र सामान्य जांच ही होती है। बड़ी जांच के लिए फिर बाहर स्थित प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटरों पर जाना पड़ता है। सीएचसी बनने के बाद यहां एक साल बाद ही टेक्नीशियन की भी तैनाती कर दी गई थी लेकिन मशीन नहीं लगने के चलते उन्हें पवई स्वास्थ्य केंद्र से अटैच कर दिया गया। इसके अलावा यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ, स्टाफ नर्स की कमी है। मात्र तीन स्टाफ नर्स ही यहां तैनात है।
विज्ञापन
000000000000
प्रतिदिन होती है डेढ़ से दो सौ मरीजों की ओपीडी
अहरौला। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहरौला पर मरीजों की संख्या प्रतिदिन ठीक ठाक रहती है। अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार प्रतिदिन डेढ़ से दो सौ मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते है। वहीं प्रसव केस की बात की जाए तो वह भी प्रतिदिन चार से पांच यहां आ ही जाते है। दवाएं अंदर के साथ ही बाहर की भी लिखी जाती है।
000000000000
कुछ डॉक्टरों व संसाधनों की कमी है, जिसके लिए मुख्यालय को मांग भेजी गई है। दवाएं 90 प्रतिशत तक अंदर की ही लिखी जाती है, जो दवा नहीं होती है, उसे ही बाहर से लिखा जाता है।
डॉ. योगेश कुमार, प्रभारी अधीक्षक, सीएचसी अहरौला।