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‘मुंतजिर’ नाटक से बयां किया दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Thu, 18 Feb 2016 11:38 PM IST
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सूत्रधार संस्थान की ओर से संस्कृति विभाग नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित 11वें आरंगम की नाट्य संध्या का शुभारंभ गुरुवार शाम शारदा टाकिज के सभागार में हुआ। सबसे पहले भारतेंदु कश्यप की लिखित नाटक मुंतजिर का मंचन रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ के निर्देशन में हुआ।
नाटक में महिंद्र पाल, नितिश भारद्वाज और आशुतोष सोहन गुप्ता ने शानदार अभिनय किया। इसमेें तीन अलग-अलग कैदी आईएसआई के कैद खाने में बंद हैं। वह मौत के साये में जिंदगी तलाशने की कोशिश करते हैं। कैदियों के इसी प्रयास को कलाकारों ने अभिनय से सजीव बना दिया।
इस प्रस्तुति में देवाशीष मिश्रा, सुग्रीव विश्वकर्मा, सचिन जायसवाल, विनय मिश्रा, शुभम तिवारी और सूरज सिंह ने सफल योगदान दिया। नाटक असंगतियों में मानवीय जिजिविषा, सह अस्तित्व, राजनीतिक उठापटक और आशा निराशा के मनोविज्ञान को दर्शाता है। इस कड़ी में दूसरी प्रस्तुति अभिनय रंग मंच हिसार की प्रस्तुति थिएटर वाला का मंचन हुआ। इसका निर्देशन प्रसिद्ध युवा निर्देशक मनीष जोशी ने अपने जादुई अंदाज में किया।
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नाटक में एक कलाकार का उसकी कला के प्रति जो संबंध होता है उसका जीवंत रूप दिखाया गया। इस नाटक में एक रंगकर्मी की समर्पण और इमानदारी की व्याख्या है। यह कहानी सफजर हाशमी, पाश और हबीब तनवीर की मंच कलाओं की भी व्याख्या है।
निर्देशक ने कठपुतली और जादू कला के साथ-साथ इम्प्रोवाइजेशन का इस्तेमाल करते हुए नाटक को हास्य व्यंग के माध्यम से प्रस्तुत किया। नाट्य संध्या के पहले दिन की आखिरी प्रस्तुति इंद्रवती नाट्य समिति, सीधी मध्यप्रदेश की रही। नीरज कुंदेर और रोशनी मिश्रा के निर्देशन में नाटक कर्णभारम का मंचन किया गया।
इसमें नरेंद्र बहादुर सिंह ने महाभारत के पात्र कर्ण का किरदार प्रस्तुत किया। उन्होंने जगह-जगह पर कर्ण के साथ होने वाले भेदभाव से उसके मन पर पड़ने वाले प्रभाव को बखूबी प्रदर्शित किया गया। नाटक में मंच पर शिवनरायण, प्रवीण, रजनीश, पुष्पेंद्र, आरती, देवेंद्र, सुनील, रोशनी प्रसाद मिश्र रहे।
इसके पहले नाट्य संध्या का शुभारंभ सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव और पालिकाध्यक्ष इंदिरा देवी जायसवाल ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष डा. सीके त्यागी, महोत्सव के संरक्षक फौजदार सिंह, इंद्रासन राय, सुदर्शन दास अग्रवाल, डा. अमित सिंह, डा. स्वास्ति सिंह, डा. एके सिंह, डा. अनूप कुमार सिंह, सचिव अभिषेक पंडित, संयोजक ममता पंडित आदि उपस्थित थे।
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नाटक में महिंद्र पाल, नितिश भारद्वाज और आशुतोष सोहन गुप्ता ने शानदार अभिनय किया। इसमेें तीन अलग-अलग कैदी आईएसआई के कैद खाने में बंद हैं। वह मौत के साये में जिंदगी तलाशने की कोशिश करते हैं। कैदियों के इसी प्रयास को कलाकारों ने अभिनय से सजीव बना दिया।
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इस प्रस्तुति में देवाशीष मिश्रा, सुग्रीव विश्वकर्मा, सचिन जायसवाल, विनय मिश्रा, शुभम तिवारी और सूरज सिंह ने सफल योगदान दिया। नाटक असंगतियों में मानवीय जिजिविषा, सह अस्तित्व, राजनीतिक उठापटक और आशा निराशा के मनोविज्ञान को दर्शाता है। इस कड़ी में दूसरी प्रस्तुति अभिनय रंग मंच हिसार की प्रस्तुति थिएटर वाला का मंचन हुआ। इसका निर्देशन प्रसिद्ध युवा निर्देशक मनीष जोशी ने अपने जादुई अंदाज में किया।
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नाटक में एक कलाकार का उसकी कला के प्रति जो संबंध होता है उसका जीवंत रूप दिखाया गया। इस नाटक में एक रंगकर्मी की समर्पण और इमानदारी की व्याख्या है। यह कहानी सफजर हाशमी, पाश और हबीब तनवीर की मंच कलाओं की भी व्याख्या है।
निर्देशक ने कठपुतली और जादू कला के साथ-साथ इम्प्रोवाइजेशन का इस्तेमाल करते हुए नाटक को हास्य व्यंग के माध्यम से प्रस्तुत किया। नाट्य संध्या के पहले दिन की आखिरी प्रस्तुति इंद्रवती नाट्य समिति, सीधी मध्यप्रदेश की रही। नीरज कुंदेर और रोशनी मिश्रा के निर्देशन में नाटक कर्णभारम का मंचन किया गया।
इसमें नरेंद्र बहादुर सिंह ने महाभारत के पात्र कर्ण का किरदार प्रस्तुत किया। उन्होंने जगह-जगह पर कर्ण के साथ होने वाले भेदभाव से उसके मन पर पड़ने वाले प्रभाव को बखूबी प्रदर्शित किया गया। नाटक में मंच पर शिवनरायण, प्रवीण, रजनीश, पुष्पेंद्र, आरती, देवेंद्र, सुनील, रोशनी प्रसाद मिश्र रहे।
इसके पहले नाट्य संध्या का शुभारंभ सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव और पालिकाध्यक्ष इंदिरा देवी जायसवाल ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष डा. सीके त्यागी, महोत्सव के संरक्षक फौजदार सिंह, इंद्रासन राय, सुदर्शन दास अग्रवाल, डा. अमित सिंह, डा. स्वास्ति सिंह, डा. एके सिंह, डा. अनूप कुमार सिंह, सचिव अभिषेक पंडित, संयोजक ममता पंडित आदि उपस्थित थे।