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140वीं जयंती पर याद किए गए मुंशी प्रेमचंद, आजमगढ़ में हुई संगोष्ठी
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आजमगढ़। मुंशी प्रेमचंद की 140वीं जयंती पर ‘वतमान समय में प्रेमचंद और उनके साहित्य की सार्थकता’ विषयक संगोष्ठी राहुल चिल्ड्रेन एकेडमी रैदोपुर में जनवादी लोक मंच, अखिल भारत प्रगतिशील छात्र मंच, नागरिक मंच और राहुल चिल्ड्रेन एकेडमी की ओर से अंबिका पटेल की अध्यक्षता में हुई। गोष्ठी में हवलदार यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद चाहते थे देश के हर गरीब आदमी को ऊंची से ऊंची तालीम नि:शुल्क मिले और वह ऊंचे से ऊंचा ओहदा पा सके। यूनिवर्सिटी के दरवाजे सबके लिए खुले रहें और सारा खर्च गवर्नमेंट पर पड़ना चाहिए, देश को फौज से ज्यादा शिक्षा की जरूरत है।
डॉ. रवींद्र नाथ राय ने कहा कि सुविधाओं पर कोई आंच ना आने देने की शर्त पर हमारे देश का बुद्धिजीवी वर्ग सत्ता और अन्याय का विरोध करता है। यह दबे कुचले लोगों के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात है कि जन संघर्षों में आम लोगों के साथ लाठी गोली खाने और जेल जाने वाले पढ़े लिखे साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, पत्रकारों और राजनीतिज्ञों का अभाव होता जा रहा है। संचालक शिवधन यादव ने कहा कि आज भी वे लोग महान है जो आमजन की बात लिखते हैं और उनके लिए बोलते हैं। संघर्ष करते हैं और खतरे मोल लेने पड़ते हैं। पूंजीपतियों का विरोध और गरीबों का पक्ष लेने से बाज नहीं आते हैं। यही हमें प्रेमचंद से सबसे बड़ी सीख मिलती है। संदीप, अजित, मीनू राय, वेद प्रकाश, सर्वजीत, राकेश, जगजीवन, अशरफ, अनिल, कंचन, सरिता, रजनी आदि उपस्थित रहे।
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डॉ. रवींद्र नाथ राय ने कहा कि सुविधाओं पर कोई आंच ना आने देने की शर्त पर हमारे देश का बुद्धिजीवी वर्ग सत्ता और अन्याय का विरोध करता है। यह दबे कुचले लोगों के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात है कि जन संघर्षों में आम लोगों के साथ लाठी गोली खाने और जेल जाने वाले पढ़े लिखे साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, पत्रकारों और राजनीतिज्ञों का अभाव होता जा रहा है। संचालक शिवधन यादव ने कहा कि आज भी वे लोग महान है जो आमजन की बात लिखते हैं और उनके लिए बोलते हैं। संघर्ष करते हैं और खतरे मोल लेने पड़ते हैं। पूंजीपतियों का विरोध और गरीबों का पक्ष लेने से बाज नहीं आते हैं। यही हमें प्रेमचंद से सबसे बड़ी सीख मिलती है। संदीप, अजित, मीनू राय, वेद प्रकाश, सर्वजीत, राकेश, जगजीवन, अशरफ, अनिल, कंचन, सरिता, रजनी आदि उपस्थित रहे।
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