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फाइलों में रह गया पर्यावरण सहेजने के लिए बना नगर वन का प्रस्ताव

Mon, 15 Feb 2021 12:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 15 Feb 2021 12:19 AM IST
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Municipal forest proposal made to save environment in files
आजमगढ़। शहर की बिगड़ती आबोहवा को दुरुस्त रखने के लिए शहर के समीप वन बनाना था। कोरोना संकट के दौरान पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने शहरों में फिर से जंगल विकसित करने की पहल शुरू की थी। शहरी वन योजना के तहत इसको विकसित करने का प्रस्ताव मांगा गया था। वन विभाग ने शहर से सटे सेहदा में 10.10 हेक्टेयर भूमि चिह्नित करके इसका प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन योजना अभी अधर में ही लटकी है।
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बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए केंद्र सरकार ने शहरी क्षेत्रों में भी जैव-विविधता संरक्षण के लिए शहरों में वन विकसित करने का निर्णय लिया था। नगर वन योजना में शर्त थी कि नगरीय निकाय सीमा में 10 से 50 हेक्टेयर के बीच रिजर्व फारेस्ट की जमीन होनी चाहिए। योजना के तहत पांच सालों में देशभर में दो सौ नगर वन विकसित किए जाने थे। इसके लिए राज्यों से प्रस्ताव मांगे गए थे। इसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से जनपदों से प्रस्ताव मांगा गया था। शासन की योजना नगर वन में पौधों की स्थानीय प्रजातियों को सहेजने और एक मनोरम पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की थी। ताकि इसे ऐसा बनाया जाए शहरी क्षेत्र में लोगों को जंगल का अहसास हो सके। यहां पौधारोपण के साथ जॉगिंग ट्रैक, साइकिल ट्रैक व ओपेन जिम व तरह-तरह की वाटिकाएं बनाने की बात कही गई थी। इसके तहत वन विभाग ने सेहदा में 10.10 हेक्टेयर भूमि को चिह्नित कर इसका प्रस्ताव भेजा था।
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योजना के लिए बनाया गया था माडल
आजमगढ़। यह योजना नगरीय निकायों, विकास प्राधिकरण, गैर सरकारी संगठनों, उद्योगों तथा स्थानीय नागरिकों के बीच भागीदारी और सहयोग पर आधारित है। केंद्र सरकार की ओर से नगर वन के लिए लगभग दो करोड़ रुपये और पौधारोपण के लिए फेंसिंग आदि दी जानी थी। चिह्नित स्थान को इस तरह विकसित किया जाना था कि लोग जंगल के बारे में जागरूक हो सकें। साथ ही शहर के प्रदूषण में भी कमी आए।
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शासन के निर्देश पर सेहदा में 10.10 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर इसका प्रस्ताव भेजा गया था। अभी इस पर निर्णय नहीं हो सका है।
संजय विश्वाल, डीएफओ
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