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Azamgarh News: मुक्तिधाम को अव्यवस्था से मुक्ति का इंतजार, गंदगी और झाड़ियां बढ़ा रहीं परेशानी
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19 अहरौला के शमशाबाद ग्राम सभा में मझुई नदी के तट पर बना मुक्तिधाम।संवाद
अंतिम संस्कार के लिए लोगों को दूर-दूर तक भटकना पड़ता था। इसे देखते हुए शासन स्तर से गांव के नजदीक नदियों के किनारे जहां लोग अंतिम संस्कार करते थे, वहां पर अंत्येष्टि स्थल के निर्माण का निर्णय लिया गया।
निर्णय के तहत लाखों रुपये खर्च कर अंत्येष्टि स्थल बनाए गए, लेकिन वर्तमान में इनकी हालत गंभीर है। कहीं इनके ऊपर छाया के लिए लगाया एल्युमिनियम गायब हो चुका है तो कहीं लाइटें खराब पड़ी हैं तो कहीं बैठने की व्यवस्था तक नहीं है।
शासन के निर्देश पर 24-24 लाख रुपये खर्च कर जगह-जगह अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण कराया गया। जिले में कुल 140 अंत्येष्टि स्थल बनाए गए हैं। अभी आठ अंत्येष्टि स्थल निर्माणाधीन हैं।
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लाखों रुपये खर्च करके इनका निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन देखभाल के अभाव में ये अंत्येष्टि स्थल बदहाल पड़े हुए हैं। कहीं छाया के लिए लगाया गया एल्युमिनियम गायब हो गया है तो कहीं झड़ रहा है। लाइटें तो लगी हैं, लेकिन उनकी रोशनी गायब है।
अंत्येष्टि स्थल तक जाने वाले रास्ते की हालत और खस्ता है। रास्ते झाड़ियों से पटे हैं। लाइटें खराब होने और रास्तों पर झाड़ियों के कारण लोगों को यहां पहुंचने में डर लगता है। रात के समय सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
मुक्तिधाम परिसर में जगह-जगह गंदगी और बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। इन झाड़ियों के कारण लोगों को जहरीले कीड़ों का डर बना रहता है। परिसर में नियमित साफ-सफाई और रखरखाव का अभाव साफ दिखाई देता है। भगवान शिव की प्रतिमा से त्रिशूल भी गायब है, जो कुछ दिन बाद ही चोरी हो गया था। यह स्थिति परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की कमी को दर्शाती है।
खराब लाइटों के कारण अंधेरे में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पेयजल की अनुपलब्धता और टूटी कुर्सियां भी समस्या बढ़ाती हैं। लोगों को पानी के लिए बाहर से व्यवस्था करनी पड़ती है।
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अंत्येष्टि स्थल बदहाल, रास्ता टूटा, लाइट खराब महाराजगंज। भैरव धाम के पूरब स्थित अंत्येष्टि स्थल खस्ताहाल है। यहां जाने वाला रास्ता टूटा हुआ है और उस पर ईंटें डालकर भरी गई हैं। अंत्येष्टि स्थल पर लगी स्टील लाइट कई महीने से खराब पड़ी है। बगल में बना सामुदायिक शौचालय भी गंदगी और घास-फूस से भरा है। शवदाह के ऊपर लगा टिन शेड झड़ गया है, जिससे शवों को नदी किनारे जलाना पड़ रहा है। अंत्येष्टि स्थल पर रहने वाली रुमादेवी डोम ने बताया कि लाइट तीन महीने से खराब है। शिकायत के बाद भी इसे ठीक नहीं किया गया, जिससे रात में शव आने पर अंधेरे में अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
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बड़गहन में 24 लाख का अंत्येष्टि स्थल बदहाल
बरदह। ठेकमा ब्लॉक के बड़गहन गांव में 24 लाख रुपये की लागत से बना अंत्येष्टि स्थल बदहाल है। यह स्थल झाड़ियों और सरपत से घिरा है, जहां अंदर जाना भी मुश्किल है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां लंबे समय से साफ-सफाई नहीं हुई है। इसकी बाउंड्रीवाल टूटी है और दो कमरे भी उपयोग में नहीं हैं। परिसर में पेयजल, बिजली या प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय भी घास-फूस से घिरा होने के कारण अनुपयोगी है। सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण शव लेकर यहां जाने से कतराते हैं। उन्हें अंतिम संस्कार के लिए 30 से 60 किलोमीटर दूर जौनपुर या वाराणसी जाना पड़ता है। इसमें 10 से 15 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है।
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शमशाबाद मुक्तिधाम की दीवारें फटीं, इंटरलॉकिंग टूटी, रास्ता भी नहीं
अहरौला। विकासखंड के शमशाबाद ग्राम सभा में मझुई नदी किनारे बना मुक्तिधाम बदहाल स्थिति में है। बीते 2025-26 वित्तीय वर्ष में लगभग साढ़े चौबीस लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण हुआ था। बने कुछ ही माह हुए हैं, लेकिन मुक्तिधाम की चारदीवारी में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। अंदर लगाई गई इंटरलॉकिंग भी कई स्थानों से टूट चुकी है। मुक्तिधाम के भीतर दुर्व्यवस्था और गंदगी का अंबार है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता घटिया बताई जा रही है। वहां तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है। बरसात होने पर मुक्तिधाम तक गाड़ी या पैदल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
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बदहाल अंत्येष्टि स्थल, शेड उड़े, घास उगी
ठेकमा। विकासखंड के सराय मोहन गांव में बेसो नदी किनारे बना अंत्येष्टि स्थल इन दिनों बदहाल पड़ा है। कोरोना काल के बाद देखरेख के अभाव में इसकी स्थिति खराब हो गई है। बारिश के मौसम में परिसर में लंबी घास उग गई है। यहां बने टिनशेड भी पूरी तरह से उड़ चुके हैं। इससे अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को धूप और बारिश से बचाव नहीं मिल पाता। ग्रामीणों के अनुसार, अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने का रास्ता ठीक है।
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बोले लोग
हमारे गांव में बना अंत्येष्टि स्थल बदहाल स्थिति में है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी इसकी देखरेख का कोई इंतजाम नहीं है। इसका टिनशेड तक उखड़ चुका है। -शरद राय, सरायमोहन।
मुक्ति धाम के निर्माण में मानक की अनदेखी की गई है। अभी से इंटरलाकिंग आदि उखड़ने लगी है। इसकी चहारदीवारी में भी दरारें पड़ने लगी हैं। -शशांक पांडेय, शमशाबाद।
अंत्येष्टि स्थल पर जाने का रास्ता झाड़ियों से पटा है। पेयजल, बिजली और प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके कारण हमें जौनपुर या वाराणसी अंतिम संस्कार के लिए जाना पड़ता है। -आदर्श सिंह, बड़गहन।
अंत्येष्टि स्थल पर लगी लाइटें तीन महीने से खराब पड़ी हैं। यहां जाने वाला रास्ता भी खराब है। इसे ईंटों से भरा गया है। इससे आने में परेशानी होती है। -हरिबंश मिश्र, महेशपुर।
00 वर्जन
2018 से पहले अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण 17 लाख रुपये की लागत से होता था, अब इसका निर्माण 24 लाख रुपये की लागत में हो रहा है। अगर किसी अंत्येष्टि स्थल पर अव्यवस्था है तो उसे दिखवाकर दूर कराया जाएगा। -कुंवर अमरेंद्र सिंह, डीपीआरओ।
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निर्णय के तहत लाखों रुपये खर्च कर अंत्येष्टि स्थल बनाए गए, लेकिन वर्तमान में इनकी हालत गंभीर है। कहीं इनके ऊपर छाया के लिए लगाया एल्युमिनियम गायब हो चुका है तो कहीं लाइटें खराब पड़ी हैं तो कहीं बैठने की व्यवस्था तक नहीं है।
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शासन के निर्देश पर 24-24 लाख रुपये खर्च कर जगह-जगह अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण कराया गया। जिले में कुल 140 अंत्येष्टि स्थल बनाए गए हैं। अभी आठ अंत्येष्टि स्थल निर्माणाधीन हैं।
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लाखों रुपये खर्च करके इनका निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन देखभाल के अभाव में ये अंत्येष्टि स्थल बदहाल पड़े हुए हैं। कहीं छाया के लिए लगाया गया एल्युमिनियम गायब हो गया है तो कहीं झड़ रहा है। लाइटें तो लगी हैं, लेकिन उनकी रोशनी गायब है।
अंत्येष्टि स्थल तक जाने वाले रास्ते की हालत और खस्ता है। रास्ते झाड़ियों से पटे हैं। लाइटें खराब होने और रास्तों पर झाड़ियों के कारण लोगों को यहां पहुंचने में डर लगता है। रात के समय सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
मुक्तिधाम परिसर में जगह-जगह गंदगी और बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। इन झाड़ियों के कारण लोगों को जहरीले कीड़ों का डर बना रहता है। परिसर में नियमित साफ-सफाई और रखरखाव का अभाव साफ दिखाई देता है। भगवान शिव की प्रतिमा से त्रिशूल भी गायब है, जो कुछ दिन बाद ही चोरी हो गया था। यह स्थिति परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की कमी को दर्शाती है।
खराब लाइटों के कारण अंधेरे में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पेयजल की अनुपलब्धता और टूटी कुर्सियां भी समस्या बढ़ाती हैं। लोगों को पानी के लिए बाहर से व्यवस्था करनी पड़ती है।
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अंत्येष्टि स्थल बदहाल, रास्ता टूटा, लाइट खराब महाराजगंज। भैरव धाम के पूरब स्थित अंत्येष्टि स्थल खस्ताहाल है। यहां जाने वाला रास्ता टूटा हुआ है और उस पर ईंटें डालकर भरी गई हैं। अंत्येष्टि स्थल पर लगी स्टील लाइट कई महीने से खराब पड़ी है। बगल में बना सामुदायिक शौचालय भी गंदगी और घास-फूस से भरा है। शवदाह के ऊपर लगा टिन शेड झड़ गया है, जिससे शवों को नदी किनारे जलाना पड़ रहा है। अंत्येष्टि स्थल पर रहने वाली रुमादेवी डोम ने बताया कि लाइट तीन महीने से खराब है। शिकायत के बाद भी इसे ठीक नहीं किया गया, जिससे रात में शव आने पर अंधेरे में अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
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बड़गहन में 24 लाख का अंत्येष्टि स्थल बदहाल
बरदह। ठेकमा ब्लॉक के बड़गहन गांव में 24 लाख रुपये की लागत से बना अंत्येष्टि स्थल बदहाल है। यह स्थल झाड़ियों और सरपत से घिरा है, जहां अंदर जाना भी मुश्किल है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां लंबे समय से साफ-सफाई नहीं हुई है। इसकी बाउंड्रीवाल टूटी है और दो कमरे भी उपयोग में नहीं हैं। परिसर में पेयजल, बिजली या प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय भी घास-फूस से घिरा होने के कारण अनुपयोगी है। सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण शव लेकर यहां जाने से कतराते हैं। उन्हें अंतिम संस्कार के लिए 30 से 60 किलोमीटर दूर जौनपुर या वाराणसी जाना पड़ता है। इसमें 10 से 15 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है।
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शमशाबाद मुक्तिधाम की दीवारें फटीं, इंटरलॉकिंग टूटी, रास्ता भी नहीं
अहरौला। विकासखंड के शमशाबाद ग्राम सभा में मझुई नदी किनारे बना मुक्तिधाम बदहाल स्थिति में है। बीते 2025-26 वित्तीय वर्ष में लगभग साढ़े चौबीस लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण हुआ था। बने कुछ ही माह हुए हैं, लेकिन मुक्तिधाम की चारदीवारी में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। अंदर लगाई गई इंटरलॉकिंग भी कई स्थानों से टूट चुकी है। मुक्तिधाम के भीतर दुर्व्यवस्था और गंदगी का अंबार है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता घटिया बताई जा रही है। वहां तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है। बरसात होने पर मुक्तिधाम तक गाड़ी या पैदल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
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बदहाल अंत्येष्टि स्थल, शेड उड़े, घास उगी
ठेकमा। विकासखंड के सराय मोहन गांव में बेसो नदी किनारे बना अंत्येष्टि स्थल इन दिनों बदहाल पड़ा है। कोरोना काल के बाद देखरेख के अभाव में इसकी स्थिति खराब हो गई है। बारिश के मौसम में परिसर में लंबी घास उग गई है। यहां बने टिनशेड भी पूरी तरह से उड़ चुके हैं। इससे अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को धूप और बारिश से बचाव नहीं मिल पाता। ग्रामीणों के अनुसार, अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने का रास्ता ठीक है।
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बोले लोग
हमारे गांव में बना अंत्येष्टि स्थल बदहाल स्थिति में है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी इसकी देखरेख का कोई इंतजाम नहीं है। इसका टिनशेड तक उखड़ चुका है। -शरद राय, सरायमोहन।
मुक्ति धाम के निर्माण में मानक की अनदेखी की गई है। अभी से इंटरलाकिंग आदि उखड़ने लगी है। इसकी चहारदीवारी में भी दरारें पड़ने लगी हैं। -शशांक पांडेय, शमशाबाद।
अंत्येष्टि स्थल पर जाने का रास्ता झाड़ियों से पटा है। पेयजल, बिजली और प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके कारण हमें जौनपुर या वाराणसी अंतिम संस्कार के लिए जाना पड़ता है। -आदर्श सिंह, बड़गहन।
अंत्येष्टि स्थल पर लगी लाइटें तीन महीने से खराब पड़ी हैं। यहां जाने वाला रास्ता भी खराब है। इसे ईंटों से भरा गया है। इससे आने में परेशानी होती है। -हरिबंश मिश्र, महेशपुर।
00 वर्जन
2018 से पहले अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण 17 लाख रुपये की लागत से होता था, अब इसका निर्माण 24 लाख रुपये की लागत में हो रहा है। अगर किसी अंत्येष्टि स्थल पर अव्यवस्था है तो उसे दिखवाकर दूर कराया जाएगा। -कुंवर अमरेंद्र सिंह, डीपीआरओ।

19 अहरौला के शमशाबाद ग्राम सभा में मझुई नदी के तट पर बना मुक्तिधाम।संवाद

19 अहरौला के शमशाबाद ग्राम सभा में मझुई नदी के तट पर बना मुक्तिधाम।संवाद

19 अहरौला के शमशाबाद ग्राम सभा में मझुई नदी के तट पर बना मुक्तिधाम।संवाद