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बैंकों की हड़ताल से जनपद में एक अरब से अधिक का कारोबार प्रभावित

Mon, 15 Mar 2021 11:52 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 15 Mar 2021 11:52 PM IST
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More than one billion business affected in the district due to the strike of banks
अपनी मागों को लेकर प्रदर्शन करते बैंक कर्मी। - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। सरकार द्वारा बैंकों, बीमा और अन्य राष्ट्रीयकृत क्षेत्र की सेवाओं के निजीकरण के विरुद्ध हड़ताल के पहले दिन सोमवार को सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मी हड़ताल पर रहे। बैंक कर्मियों की इस हड़ताल से जनपद में लगभग ड़ेढ़ अरब रुपये का कारोबार और पांच करोड़ की क्लीयरिंग प्रभावित हुई। हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने यूनियन बैंक आफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय सिविल लाइन से जुलूस निकाला और धरना प्रदर्शन किया।
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सोमवार की सुबह लगभग 200 की संख्या में अधिकारी व कर्मवारी यूनियन बैंक के सिविल लाइन स्थित क्षेत्रीय कार्यालय परिसर में जमा हुए। इसके बाद धरना और प्रदर्शन शुरू हुआ। इसके बाद वहां से जुलूस निकाला गया जो सिविल लाइन चौक, कलेक्ट्रेट चौराहा, स्टेट बैंक रैदोपुर, डीएवी होते हुए पुन: क्षेत्र कार्यालय सिविल लाइन पहुंचकर धरने में परिवर्तित हो गया। इस मौके पर मुहम्मद आरिफ, विष्णु गुप्ता, विकास सिंह, ब्रजेश यादव, प्रवीण मौर्य, रामप्रीत, राजेश सिंह आदि उपस्थित थे।वहीं यूनाइटेड फोरम आफ आरआरबी यूनियंस के आहवान पर बड़ौदा यूपी बैंक आजमगढ़ के बैक कर्मियों ने 75 बैंक शाखाओं का कार्यभार ठप रखकरचौक स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। यूपी ग्रामीण बैंक अधिकारी एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चंद्र तिवारी कुंदन ने कहा कि बैकिंग उद्योग में नवंबर 2020 में हुए वेतन समझौते को ग्रामीण बैंकों में लागू करने को अभी तक भारत सरकार ने आदेश जारी नहीं किया हैं जिसके कारण बैंकर्स बेहद नाराज हैं। कई बार सरकार से बात की गई लेकिन आज तक कोई सकारात्मक कार्य नहीं हुआ और विवश होकर जनसहयोग की भावना रखने वाले बैंककर्मी अपने हक-हकूक के लिए हड़ताल को बाध्य हुए। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको में 11वां वेतन समझौता, पुरानी पेंशन स्कीम सहित अन्य सभी मांगे जल्द ही पूर्ण नहीं हुई तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जिसके तहत अनिश्चित कालीन हड़ताल भी की जाएगी। इंप्लॉइज फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष एलके सिंह ने भारत सरकार की बैंक विरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि सरकार ने बैंकों के निजीकरण का निर्णय कारपोरेट घरानों के पक्ष में लिया है। सरकारी बैंकों के निजीकरण से सोशल बैंकिंग समाप्त हो जाएगी जिससे जनता को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इस मौके पर
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शशिकांत श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार, यशवीर सिंह, सचिव गौरव दुबे, सुभाष यादव, अनुज श्रीवास्तव, आशीष तिवारी, आईसी श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, आलोक सिंह, निशांत सिंह, सूरज झा, आशुतोष सिंह, शाहिद खान, पवन सिंह आदि उपस्थित थे।
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