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खाते में रुपये तो पहुंचे पर परिजनों ने नहीं खरीदी बच्चों की ड्रेस

Tue, 14 Jun 2022 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jun 2022 11:51 PM IST
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Money reached the account but the family did not buy the children's dress
आजमगढ़। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेस, बैग, जूता, मोजा खरीदने के लिए शासन स्तर से परिजनों के खाते में 1100 रुपये भेजे गए थे। इसके बावजूद बच्चे या तो बिना ड्रेस स्कूल पहुंच रहे थे या फिर पुराना ड्रेस पहन कर ही काम चला रहे थे। बीएसए दफ्तर से जब इसका फीडबैक लिया गया तो परिजनों द्वारा घर गृहस्थी में रकम खर्च कर देने की बात कही गई। ऐसे में बच्चे बिना ड्रेस के ही स्कूल जाने को विवश हो रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए ड्रेस, बैग, जूता, मोजा और टाई खरीदने के लिए उनके परिजनों के खाते में 1100 रुपये भेजे गए थे। इसके बावजूद सत्र 2021-22 में परिषदीय विद्यालयों में बच्चे या तो पुराने ड्रेस या फिर बिना ड्रेस के ही पहुंच रहे थे। शिक्षकों के कहने के बाद भी वह पूरे साल बिना ड्रेस ही आते रहे। रुपये मिलने के बाद भी परिजनों ने ड्रेस क्यों नहीं खरीदी बीएसए दफ्तर से इसका फीडबैक जुटाया गया। जिसमें कुछ ने साग सब्जी तो कुछ ने इलाज में रकम खर्च हो जाने की बात कही। कुछ ने तो रकम को कम बताते हुए उसमें पूरी यूनिफार्म खरीद पाने में असमर्थता जाहिर की।
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अब ड्रेस पहनकर फोटो भेजने पर मिलेगी रकम
बच्चों के रुपये की बंदरबांट न हो इसके लिए परिजनों के खाते में रकम भेजने की व्यवस्था शासन द्वारा की गई। लेकिन इसमें भी खामियां मिलने पर नए सत्र से नया नियम बनाने के लिए मंथन चल रहा है। नए नियम में परिषदीय स्कूल के बच्चों को ड्रेस पहनकर फोटो शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। फोटो अपलोड करने पर ही उनके खाते में यूनिफार्म के लिए 1100 रुपये भेजे जाएंगे। इस नए नियम से जिन बच्चों के पास ड्रेस नहीं है उन्हें परेशानी होगी। इस मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि यूनिफार्म, जूता, मोजा खरीदने के लिए बच्चों के अभिभावकों के खाते में धनराशि भेजी गई थी। बहुत से अभिभावकों ने ड्रेस नहीं खरीदा है। शासन के निर्देश पर उनका फीड बैक लिया गया तो वह धनराशि कम होने व अन्य काम में प्रयोग होने की बात कह रहे हैं। हालांकि बहुतायत अभिभावकों ने बच्चों के यूनिफार्म खरीदे हैं।
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