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संस्कृत विवि के फर्जी अंकपत्र पर कई ने पाई नौकरी
आजमगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Nov 2017 11:42 PM IST
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fraud for employment
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आजमगढ़। वर्ष 2016 के दौरान हुई 15000 और 16448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में जिले में विशिष्ट बीटीसी से भर्ती हुए अभ्यर्थियों की ओर से बड़े पैमाने में फर्जीवाड़ा किया गया है। संपूर्णानंद संस्कृत विवि के फर्जी अंकपत्र के आधार पर नौकरी पाई गई है। ऐसे शिक्षकों की संख्या तीस से ज्यादा है, फर्जीवाड़े का आलम ये है कि एक भी भर्ती में अभ्यर्थियों ने दो-दो बार अपनी काउंसलिंग करा ली और शिक्षक भी बन गए। मामले की रिपोर्ट जल्द ही डीएम को सौंपने की तैयारी है।
वर्ष 2016 के दौरान हुई 15000 और 16448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले में लगभग 625 शिक्षकों की भर्ती हुई थी। एक शिकायत के आधार कुछ शिक्षकों की भर्ती की जांच की गई तो बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से नौकरी पाने वालों की संख्या सामने आने लगी है। छह शिक्षकों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने की पुष्टी होने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर भी कराई जा चुकी है। साथ ही सौ से अधिक के संदिग्ध मिलने की बात बताई गई। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी डॉ. अर्चना सिंह और अपर संख्याधिकारी सुनील सिंह को पूरी भर्ती प्रक्रिया की जांच सौंप दी गई है।
दोनों ही भर्ती प्रक्रिया के तहत विशिष्ट बीटीसी से जिले में नौकरी पाने वाले 30 से ज्यादा अभ्यर्थियों की ओर से संपूर्णानंद संस्कृत विवि के फर्जी मार्कशीट के सहारे नौकरी पाने के तथ्य सामने आ रहे हैं। सभी को ये मार्कशीट बरदह के एक कालेज से निर्गत हुए हैं। मजे की बात ये है कि 15000 शिक्षकों की भर्ती चयनित ऐसे अभ्यर्थियों की ओर से एक बार दूसरी मार्कशीट पर काउंसलिंग कराई गई। इसमें वो नंबर कम होने से बाहर हो गए।
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इस बीच हाईकोर्ट से बीपीएड और कुछ अन्य डिग्रियों वाले अभ्यर्थियों को इस भर्ती में शामिल होने के आदेश दे दिए गए। इनके आवेदन के विए विभाग की वेबसाइट खोली गई। इस दौरान बाहर हुए विशिष्ट बीटीसी वाले इन अभ्यर्थियों की ओर से संस्कृत विवि की फर्जी मार्कशीट से न सिर्फ आवेदन कर दिया गया, जबकि विभागीय मिलिभगत से दोबारा काउंसलिंग कराके चयनित होकर शिक्षक भी बन गए। बिना बेसिक शिक्षा विभाग की मिलीभत के इनकी दौबारा काउंसलिंग संभव नहीं थी।
ऐसे ही फर्जी मार्कशीट के सहारे 16448 शिक्षकों की भर्ती में भी 15 से ज्यादा अभ्यर्थियों की ओर से नौकरी पाने के बात सामने आ रही है। उक्त सभी ने वर्ष 2007-08 के दौरान विशिष्ट बीटीसी की है। फिलहाल इस फर्जीवाड़े की पुष्टि के लिए डायट से इस वर्ष में बीटीसी करने वाले अभ्यर्थियों की चयन सूची मांगी गई है। चयन सूची में यदि इन अभ्यर्थियों ने दूसरी मार्कशीट का प्रयोग किया होगा तो इनका पकड़ा जाना तय है।
जांच टीम पूरी भर्ति प्रक्रिया की जांच कर रही है। संबंधित विभागों को भी उनकी मदद को कहा गया है। रिपोर्ट मिलते ही सभी के खिलाफ एफआईआर और विभागीय कार्रवाई कराई जाएगी।
चंद्र भूषण सिंह, जिलाधिकारी
बीएसएस कार्यालय से विवि तक फैला फर्जीवाड़े का तार
आजमगढ़। एक भर्ती में दो बार काउंसलिंग कराने वाले अभ्यर्थियों के पकड़े जाने से मामले में विभागीय संलिप्तता को पुष्ट कर रही है। भर्ती के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से ही इन फर्जी मार्कशीटों का विवि से सत्यापन भी कराया गया है। सत्यापन इनके सही होने की पुष्टी की गई है। अब जांच में इन मार्कशीटों के फर्जी मिलने से बेसिक शिक्षा विभाग और विवि प्रबंधन भी जांच के घेरे में आ रहा है।
निशाने पर फर्जी मार्कशीट बनवाने वाला रैकेट
आजमगढ़। जिस तरह से जांच में फर्जी मार्कशीट के ये मामले सामने आ रहे हैं। उससे लग रहा है इसे तैयार कराने वाला पूरा रैकेट काम कर रहा है। जो संस्कृत विवि और बीएसए कार्यालय तक जुड़ा हुई है। मिलीभगत से इस फर्जीवाड़े का अंजाम दिया जा रहा है और शासकीय धन का गबन किया जा रहा है।
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वर्ष 2016 के दौरान हुई 15000 और 16448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले में लगभग 625 शिक्षकों की भर्ती हुई थी। एक शिकायत के आधार कुछ शिक्षकों की भर्ती की जांच की गई तो बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से नौकरी पाने वालों की संख्या सामने आने लगी है। छह शिक्षकों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने की पुष्टी होने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर भी कराई जा चुकी है। साथ ही सौ से अधिक के संदिग्ध मिलने की बात बताई गई। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी डॉ. अर्चना सिंह और अपर संख्याधिकारी सुनील सिंह को पूरी भर्ती प्रक्रिया की जांच सौंप दी गई है।
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दोनों ही भर्ती प्रक्रिया के तहत विशिष्ट बीटीसी से जिले में नौकरी पाने वाले 30 से ज्यादा अभ्यर्थियों की ओर से संपूर्णानंद संस्कृत विवि के फर्जी मार्कशीट के सहारे नौकरी पाने के तथ्य सामने आ रहे हैं। सभी को ये मार्कशीट बरदह के एक कालेज से निर्गत हुए हैं। मजे की बात ये है कि 15000 शिक्षकों की भर्ती चयनित ऐसे अभ्यर्थियों की ओर से एक बार दूसरी मार्कशीट पर काउंसलिंग कराई गई। इसमें वो नंबर कम होने से बाहर हो गए।
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इस बीच हाईकोर्ट से बीपीएड और कुछ अन्य डिग्रियों वाले अभ्यर्थियों को इस भर्ती में शामिल होने के आदेश दे दिए गए। इनके आवेदन के विए विभाग की वेबसाइट खोली गई। इस दौरान बाहर हुए विशिष्ट बीटीसी वाले इन अभ्यर्थियों की ओर से संस्कृत विवि की फर्जी मार्कशीट से न सिर्फ आवेदन कर दिया गया, जबकि विभागीय मिलिभगत से दोबारा काउंसलिंग कराके चयनित होकर शिक्षक भी बन गए। बिना बेसिक शिक्षा विभाग की मिलीभत के इनकी दौबारा काउंसलिंग संभव नहीं थी।
ऐसे ही फर्जी मार्कशीट के सहारे 16448 शिक्षकों की भर्ती में भी 15 से ज्यादा अभ्यर्थियों की ओर से नौकरी पाने के बात सामने आ रही है। उक्त सभी ने वर्ष 2007-08 के दौरान विशिष्ट बीटीसी की है। फिलहाल इस फर्जीवाड़े की पुष्टि के लिए डायट से इस वर्ष में बीटीसी करने वाले अभ्यर्थियों की चयन सूची मांगी गई है। चयन सूची में यदि इन अभ्यर्थियों ने दूसरी मार्कशीट का प्रयोग किया होगा तो इनका पकड़ा जाना तय है।
जांच टीम पूरी भर्ति प्रक्रिया की जांच कर रही है। संबंधित विभागों को भी उनकी मदद को कहा गया है। रिपोर्ट मिलते ही सभी के खिलाफ एफआईआर और विभागीय कार्रवाई कराई जाएगी।
चंद्र भूषण सिंह, जिलाधिकारी
बीएसएस कार्यालय से विवि तक फैला फर्जीवाड़े का तार
आजमगढ़। एक भर्ती में दो बार काउंसलिंग कराने वाले अभ्यर्थियों के पकड़े जाने से मामले में विभागीय संलिप्तता को पुष्ट कर रही है। भर्ती के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से ही इन फर्जी मार्कशीटों का विवि से सत्यापन भी कराया गया है। सत्यापन इनके सही होने की पुष्टी की गई है। अब जांच में इन मार्कशीटों के फर्जी मिलने से बेसिक शिक्षा विभाग और विवि प्रबंधन भी जांच के घेरे में आ रहा है।
निशाने पर फर्जी मार्कशीट बनवाने वाला रैकेट
आजमगढ़। जिस तरह से जांच में फर्जी मार्कशीट के ये मामले सामने आ रहे हैं। उससे लग रहा है इसे तैयार कराने वाला पूरा रैकेट काम कर रहा है। जो संस्कृत विवि और बीएसए कार्यालय तक जुड़ा हुई है। मिलीभगत से इस फर्जीवाड़े का अंजाम दिया जा रहा है और शासकीय धन का गबन किया जा रहा है।