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शराब की सौ दूकानों पर लगे ताले
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 07 Apr 2017 11:36 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नेशनल हाईवे के किनारे स्थित शराब की 172 दूकानों को आबकारी विभाग ने एक अप्रैल से पहले ही हटवा दिया। इनमें से 18 दूकानों को जगह नहीं मिलने की वजह से उन्हें जगह मिलने तक बंद करवा दिया गया। हाईवे से हटाकर दूसरे स्थान पर शेष 154 दूकानें खुल रही थी, जिसको लेकर विरोध शुरू हो गया है। आबकारी विभाग के लोगों की मानें तो अब शराब की दूकान को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। इसमें क्षेत्रीय नेता और थानों के सिपाही, दरोगाओं की भूमिका अहम मानी जा रही। इसके चलते बीते दो दिनों से करीब 100 दूकानों पर ताला लगा है।
जिले में 294 देशी, 128 अंग्रेजी, 102 बीयर की दूकानें हैं। ये दूकाने दिसंबर माह में ही रिनुवल की गई हैं। इसके बाद करीब 50 करोड़ एकमुश्त रकम सरकारी खजाने में जमा हुआ। सूत्रों की मानें तो ज्यादातर दूकानें राजनीतिक पकड़ रखने वालों की हैं, इसमें हर दल के लोग शामिल हैं। अनुज्ञापी अभी अपनी लागत भी नहीं निकाल पाए थे कि सुप्रीम कोर्ट ने एक अप्रैल से नेशनल हाईवे से सटी शराब की दूकानों को हटाने का फरमान जारी कर दिया। इसमें इलाहाबाद-आजमगढ़ मार्ग, आजमगढ़-वाराणसी मार्ग,आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग, आजमगढ़-मऊ और गाजीपुर मार्ग, बिलारमऊ-फूलपुर मार्ग आदि पर स्थित 172 शराब की दूकानों को हटवा दिया गया। इसमें देशी की 74, अंग्रेजी की 50 और बीयर की 48 दूकानें शामिल हैं। हटाई गई दूकानों में 154 को के लिए जगह मिल गई जबकि 18 को जगह न मिलने की वजह से बंद करवा दिया गया। इनके लिए नई जगह तलाशी जा रही है। इसी बीच कुछ लोग राजनीति चमकाने के लिए शराब की नई दूकानों का विरोध करना शुरू किया। लोगों के विरोध का परिणाम है कि बीते दो दिनों से करीब 100 दूकानों पर ताला लटक गया है।
आबकारी विभाग के अधिकारियों की मानें तो ग्रामीणों को उकसाने में कहीं क्षेत्रीय नेता तो कहीं थाने के सिपाही और दरोगा शामिल हैं। जिन स्थानों पर मामला राजनीति से प्रेरित होते दिखा। उसमें शहर के नरौली मुहल्ला, रानी की सराय, शाहगढ़, गुलउर, बागखालिस, सरायमीर, लालगंज, फूलपुर आदि क्षेत्र शामिल है। विरोध का परिणाम है कि बीते दो दिनों से अंग्रेजी, देशी और बीयर की करीब 100 दूकानें बंद हैं। इससे ना केवल अनुज्ञापियों को नुकसान हो रहा है बल्कि सरकार का राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। एसपी आनंद कुलकर्णी का कहना है किअगर कोई कानून अपने हाथ में लेता है तो आरोपी और भड़काने वालों दोनों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जिला आबकारी अधिकारी राम सिंह का कहना है किअब तक हुए कई मामलों की पड़ताल से जानकारी हुई कि कुछ जगहों पर तो विरोध हो रहा लेकिन ज्यादातर लोग क्षेत्रीय नेता या कुछ पुलिसवालों के उकसाने पर विरोध कर रहे हैं। इसके चलते करीब 100 दूकानें प्रभावित हैं। इससे राजस्व का नुकसान हो रहा। सरकार के अगले आदेश के बाद ही आगे कोई कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में 294 देशी, 128 अंग्रेजी, 102 बीयर की दूकानें हैं। ये दूकाने दिसंबर माह में ही रिनुवल की गई हैं। इसके बाद करीब 50 करोड़ एकमुश्त रकम सरकारी खजाने में जमा हुआ। सूत्रों की मानें तो ज्यादातर दूकानें राजनीतिक पकड़ रखने वालों की हैं, इसमें हर दल के लोग शामिल हैं। अनुज्ञापी अभी अपनी लागत भी नहीं निकाल पाए थे कि सुप्रीम कोर्ट ने एक अप्रैल से नेशनल हाईवे से सटी शराब की दूकानों को हटाने का फरमान जारी कर दिया। इसमें इलाहाबाद-आजमगढ़ मार्ग, आजमगढ़-वाराणसी मार्ग,आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग, आजमगढ़-मऊ और गाजीपुर मार्ग, बिलारमऊ-फूलपुर मार्ग आदि पर स्थित 172 शराब की दूकानों को हटवा दिया गया। इसमें देशी की 74, अंग्रेजी की 50 और बीयर की 48 दूकानें शामिल हैं। हटाई गई दूकानों में 154 को के लिए जगह मिल गई जबकि 18 को जगह न मिलने की वजह से बंद करवा दिया गया। इनके लिए नई जगह तलाशी जा रही है। इसी बीच कुछ लोग राजनीति चमकाने के लिए शराब की नई दूकानों का विरोध करना शुरू किया। लोगों के विरोध का परिणाम है कि बीते दो दिनों से करीब 100 दूकानों पर ताला लटक गया है।
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आबकारी विभाग के अधिकारियों की मानें तो ग्रामीणों को उकसाने में कहीं क्षेत्रीय नेता तो कहीं थाने के सिपाही और दरोगा शामिल हैं। जिन स्थानों पर मामला राजनीति से प्रेरित होते दिखा। उसमें शहर के नरौली मुहल्ला, रानी की सराय, शाहगढ़, गुलउर, बागखालिस, सरायमीर, लालगंज, फूलपुर आदि क्षेत्र शामिल है। विरोध का परिणाम है कि बीते दो दिनों से अंग्रेजी, देशी और बीयर की करीब 100 दूकानें बंद हैं। इससे ना केवल अनुज्ञापियों को नुकसान हो रहा है बल्कि सरकार का राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। एसपी आनंद कुलकर्णी का कहना है किअगर कोई कानून अपने हाथ में लेता है तो आरोपी और भड़काने वालों दोनों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जिला आबकारी अधिकारी राम सिंह का कहना है किअब तक हुए कई मामलों की पड़ताल से जानकारी हुई कि कुछ जगहों पर तो विरोध हो रहा लेकिन ज्यादातर लोग क्षेत्रीय नेता या कुछ पुलिसवालों के उकसाने पर विरोध कर रहे हैं। इसके चलते करीब 100 दूकानें प्रभावित हैं। इससे राजस्व का नुकसान हो रहा। सरकार के अगले आदेश के बाद ही आगे कोई कार्रवाई की जाएगी।