{"_id":"65ce4122424157c5b4094570","slug":"lease-of-flat-land-for-fish-farming-azamgarh-news-c-258-1-svns1001-111365-2024-02-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Azamgarh News: समतल जमीन का मछली पालन के लिए कर दिया पट़्टा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Azamgarh News: समतल जमीन का मछली पालन के लिए कर दिया पट़्टा
विज्ञापन
लालगंज विकास खंड के सरावां गांव में संतोष कुमार पत्नी दुष्यंत सिंह को तीन साल पूर्व प्रशासन की ओर से मत्स्य पालन के लिए समतल भूमि का पट्टा कर दिया गया। अब पट्टा लेने के बाद पट्टा धारक अधिकारियों के पास इसकी खोदाई कराने के लिए चक्कर काट रहा है।
ग्राम पंचायतों में स्थित पोखरे और पोखरियों का मत्स्य पालन के लिए पट्टा कर प्रशासन की ओर से आय अर्जित की जाती है। जितने साल का पट्टा होता है, उक्त पोखरी या पोखरा उतने साल तक उस व्यक्ति के अधीन रहता है। ऐसा ही एक पट्टा लालगंज तहसील के सरावां गांव में तीन साल पूर्व किया गया। प्रशासन की ओर से डेढ़ लाख रुपये में 10 साल का पट्टा सरावां गांव निवासी संतोष कुमारी के नाम से किया गया। पट्टा लेने के बाद जब संतोष कुमारी के पति दुष्यंत कुमार मौके पर पहुंचे तो वहां पर समतल जमीन पाई। इस बात पर उन्हें काफी आश्चर्य हुआ। फिर उन्होंने प्रशासन से उक्त भूमि की मनरेगा खोदाई कराने की मांग की ताकि वह उसमें मत्स्य पालन कर सकें। तीन साल बीत गए अभी तक उक्त पोखरी की खोदाई नहीं हो सकी है। इसके कारण संतोष कुमारी के पति दुष्यंत सिंह अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक उन्हें इस कार्य में सफलता नहीं मिल सकी है। वहीं अधिकारी भी मान रहे हैं कि ऐसी जमीन का मत्स्य पालन के लिए पट्टा नहीं हो सकता।
संतोष कुमारी के नाम से पट्टा हुआ है लेकिन मत्स्य पालन के लिए जमीन पर गहराई नहीं है। इनके द्वारा मनरेगा से खोदाई कराने की मांग की जा रही है, जिस पर लाखों रुपये खर्च होंगे, जो वर्तमान में हमारे पास नहीं है कि इसकी खोदाई कराई जाए। - राणा प्रताप सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी।
विज्ञापन
इनके द्वारा जो पट्टा कराया गया है, वह पूरी तरह से समतल जमीन है। नियमत: मत्स्य पालन के लिए ऐसी जमीन का पट्टा नहीं किया जा सकता है। आखिर यह पट्टा किस प्रकार किया गया। इस बारे कुछ कह नहीं सकते हैं। - आलोक कुमार सिंह, खंड विकास अधिकारी ठेकमा।
विज्ञापन
ग्राम पंचायतों में स्थित पोखरे और पोखरियों का मत्स्य पालन के लिए पट्टा कर प्रशासन की ओर से आय अर्जित की जाती है। जितने साल का पट्टा होता है, उक्त पोखरी या पोखरा उतने साल तक उस व्यक्ति के अधीन रहता है। ऐसा ही एक पट्टा लालगंज तहसील के सरावां गांव में तीन साल पूर्व किया गया। प्रशासन की ओर से डेढ़ लाख रुपये में 10 साल का पट्टा सरावां गांव निवासी संतोष कुमारी के नाम से किया गया। पट्टा लेने के बाद जब संतोष कुमारी के पति दुष्यंत कुमार मौके पर पहुंचे तो वहां पर समतल जमीन पाई। इस बात पर उन्हें काफी आश्चर्य हुआ। फिर उन्होंने प्रशासन से उक्त भूमि की मनरेगा खोदाई कराने की मांग की ताकि वह उसमें मत्स्य पालन कर सकें। तीन साल बीत गए अभी तक उक्त पोखरी की खोदाई नहीं हो सकी है। इसके कारण संतोष कुमारी के पति दुष्यंत सिंह अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक उन्हें इस कार्य में सफलता नहीं मिल सकी है। वहीं अधिकारी भी मान रहे हैं कि ऐसी जमीन का मत्स्य पालन के लिए पट्टा नहीं हो सकता।
विज्ञापन
संतोष कुमारी के नाम से पट्टा हुआ है लेकिन मत्स्य पालन के लिए जमीन पर गहराई नहीं है। इनके द्वारा मनरेगा से खोदाई कराने की मांग की जा रही है, जिस पर लाखों रुपये खर्च होंगे, जो वर्तमान में हमारे पास नहीं है कि इसकी खोदाई कराई जाए। - राणा प्रताप सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी।
विज्ञापन
इनके द्वारा जो पट्टा कराया गया है, वह पूरी तरह से समतल जमीन है। नियमत: मत्स्य पालन के लिए ऐसी जमीन का पट्टा नहीं किया जा सकता है। आखिर यह पट्टा किस प्रकार किया गया। इस बारे कुछ कह नहीं सकते हैं। - आलोक कुमार सिंह, खंड विकास अधिकारी ठेकमा।