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मुबारकपुर से फिर ताल ठोकेंगे लाल बिहारी मृतक

Sun, 13 Feb 2022 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 11:24 PM IST
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Lal Bihari will beat again from Mubarakpur
सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित किए जाने के बाद 18 वर्ष तक संघर्ष के बाद जिंदा घोषित किए गए लालबिहारी मृतक विधानसभा चुनाव में इस बार भी मुबारकपुर से ताल ठोकने के लिए तैयार हैं। उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया है।
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अमिलो के निवासी लालबिहारी मृतक ने मृतक संघ भी बनाया है जिसके वे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। लालबिहारी को जुलाई 1976 में जीवित रहते हुए भी सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया। खुद को जिंदा घोषित करने के लिए उन्होंने 18 वर्षों तक संघर्ष किया। तब जाकर जिला प्रशासन ने इन्हें 30 जून 1994 में पुन: जिंदा घोषित कर दिया लेकिन तब तक लालबिहारी मृतक प्रशासन की पूरी कलई ही खोल कर रख दी थी। लालबिहारी इस बार सातवीं बार मैदान में हैं। विधानसभा मुबारकपुर से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं और नामांकन पत्र भी खरीद चुके हैं। जब अभिलेखों में लालबिहारी को मृत घोषित कर दिया गया था तो उन्होंने खुद को जिंदा साबित करने के लिए पहला चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के खिलाफ इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र से 1988 में लड़ा था। इसके बाद भी जब इन्हें सफलता नहीं मिली और इन्हें जिंदा घोषित नहीं किया गया तो उन्होंने 1989 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के विरुद्घ अमेठी से चुनाव लड़ा लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके और ना ही अभिलेखों में उन्हें जिंदा घोषित किया गया। खुद को जिंदा साबित करने के लिए लाल बिहारी मृतक ने बहुत संघर्ष किया। चुनाव ही नहीं लड़ा बल्कि अपहरण भी किया, इसके बाद यह खुद को जिंदा साबित नहीं कर सके। जब अभिलेखों में जिंदा हुए तो अपने नाम के आगे मृतक शब्द जोड़ लिया और आज अभिलेखों में मृत घोषित किए गए लोगों के लिए संघर्ष करते हैं।
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लाल बिहारी मृतक ने अबतक लड़े चुनाव
- 1988 में इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र से पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के खिलाफ।
- 1989 में अमेठी से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ।
- 1991 में मुबाकरपुर से विधानसभा का चुनाव।
- 2002 में मुबारकपुर से विधानसभा का चुनाव।
- 2004 में लालगंज से लोकसभा का चुनाव।
- 2007 में एक बार फिर मुबारकपुर विधानसभा सीट से चुनाव।
भारत के इतिहास में पहली बार लालबिहारी मृतक के नाम से चुनाव लड़ने का अवसर मिला है। इससे पहले मतदाता सूची में उनका नाम सिर्फ लालबिहारी ही था लेकिन सरकारी अभिलेखों में मृत थे। सरकारी अभिलेखों में मुझे तो जिंदा कर दिया गया पर किसी अदालत ने मेरे जिंदा होने की मुहर नहीं लगाई है।-लाल बिहारी मृतक, राष्ट्रीय अध्यक्ष, मृतक संघ।
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