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निजी सफाईकर्मियों के नाम पर लाखों का फर्जीवाड़ा
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Mon, 23 Oct 2017 11:23 PM IST
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सफाई कर्मचारी
आजमगढ़। डीएम की बिना अनुमति के तत्कालीन पालिकाध्यक्ष और ईओ की ओर से नियम विरुद्ध ठेका देकर निजी सफाईकर्मियों से सफाई के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा किया गया। मामला पकड़ में आने के बाद शासकीय धन के दुरुपयोग, फर्जीवाड़े की जांच और आरोपी अधिकारी एवं पदाधिकारी पर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए जिलाधिकारी की ओर से तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।
शासन ने वर्ष 2004 और 05 में निकार्यों में वार्डों की सफाई के लिए कर्मचारियों की कमी को देखते हुए ठेके के माध्यम से दैनिक सफाईकर्मियों को रखने के निर्देश दिए थे। इसके लिए जिलाधिकारी की अनुमति से ठेका दिया गया था। वर्ष 2005 से 11 तक जनपद में भी जिलाधिकारी के आदेश पर ठेके पर आठ वार्डों की सफाई के लिए दैनिक कर्मचारी रखे गए।
वर्ष 2016 में बिना जिलाधिकारी के अनुमति के तत्कालीन पालिकाध्यक्ष इंदिरा देवी जायसवाल और ईओ दिनेश कुमार विश्वकर्मा की ओर से एक वर्ष के लिए ठेके पर सफाई कर्मचारियों को रखने के लिए निविदा निकाली गई और नियम विरुद्ध पांच साल के लिए अनुबंध करा दिया गया है। ठेके की पत्रावली में भी छेड़छाड़ और हेराफेरी की गई।
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आठ वार्डों की सफाई के लिए 90 कर्मचारी रखे गए। इनको संसाधन भी ठेकेदार की ओर से उपलब्ध कराना था, लेकिन संसाधन का प्रयोग पालिका का किया गया। 90 कर्मियों के स्थान पर मात्र 20 से 30 कर्मी लगाए जाए हैं। भुगतान के पूर्व में 2-4 कर्मियों को अनुपस्थित दिखा कर खानापूर्ति करके लगभग 7-8 लाख रुपये माहवार ठेकेदार को भुगतान किया जाता है।
इस धन की अधिकारियों, पदाधिकारी और कर्मचारियों की ओर से बंदरबांट की जा रही थी। दूसरा ठेका आउटसोर्सिंग के माध्यम से 10 चालकों और 50 सफाईकर्मियों का हुआ। निकाय को 10 चालकों और इन सफाई कर्मियों की जरूरत थी कि नहीं इसकी जांच की जा रही है।
जिलाधिकारी की ओर से पिछले दिनों ईओ प्रतिभा सिंह से सफाईकर्मियों की जांच कराई गई तो मामला पकड़ में आ गया। इसके बाद रविवार को जिलाधिकारी ओर से आवास पर अधिशासी अधिकारी, सफाई निरीक्षक, टीएसी/प्रोटोकाल सहायक और सफाई ठेकेदारों के प्रतिनिधियों को बुलाकर पूछताछ की गई।
जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह ने नगर की सफाई व्यवस्था खराब पाए जाने और सफाई व्यवस्था के नाम पर शासकीय धन का अबतक किए गए दुरुपयोग, अभिलेखों में छेड़छाड़-हेराफेरी, ठगी के लिए जिम्मेदार पदाधिकारी, अधिकारी, ठेकेदार के विरुद्ध अपराधिक मामला दर्ज कराने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए है।
कमेटी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में गठित की गयी है, इसमें उप जिलाधिकारी सदर तथा मुख्य कोषाधिकारी सदस्य होंगे।
प्रति कर्मचारी होता था 259 रुपये का भुगतान
आजमगढ़। पालिका का ओर से नियम विरुद्ध रखे गए कर्मचारियों को प्रतिदिन के हिसाब से 259 रुपये का भुगतान किया जाता था। 90 कर्मचारियों को हर माह लगभग सात से आठ लाख रुपये का भुगतान किया जाता था। इसके अलावा 60 कर्मचारी और हैं। इनमें 50 सफाईकर्मियों अन्य वार्डों में सफाई के लिए लगाया गया था। 10 चालक थे जिनकी पालिका को जरूरत थी भी या नहीं इसकी जांच होगी। बिना जरूरत के ये कर्मचारी रखे गए हैं तो इनको भी जारी किया गया मानदेय घोटाले में शामिल हो जाएगा।
300 सौ कर्मचारी फिर भी शहर में कूड़े के ढेर
पालिका में 144 कर्मचारी स्थायी और संविदा के तौर पर तैनात हैं। इसके बाद भी 150 कर्मचारियों डेलीवेजर के तौर पर रखा गया है। कुल 25 वार्ड में इस तरह से लगभग 300 सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके बाद भी शहर में कूड़े के ढेर लगे हैं। सफाई के नाम पर एक साल से ज्यादा समय तक पालिका में फर्जीवाड़ा किया जाता रहा।
अब श्रेणीवार वार्डों में तैनात होंगे कर्मचारी, अधिकारी रखेंगे नजर
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि अब वार्डों के हिसाब से स्थायी, संविदा और डेलीवेजर कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। इनकी जांच के लिए अधिकारियों को भी तैनात किया जा रहा है। जो वार्डों में जाकर देखेंगे की सफाई हो रही है या नहीं।
इसके बाद ही इन्हें वेतन जारी किया जाएगा। गायब रहने पर इनके खिलाफ निलंबन और एफआईआर की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही स्थायी, संविदा और डेलीवेजर कर्मचारियों को पहचान पत्र भी जारी किया जाएगा। इसे काम करते वक्त पहनना जरूरी होगा, ताकि जांच को पहुंचने वाले अधिकारी उसके बारे में जान सकें। साथ ही नागरिक भी सफाईकर्मी के न आने पर उसकी शिकायत कर सकें।
पिछले दिनों निरीक्षण और जांच के दौरान पाया गया कि नियम विरुद्ध डेलीवेजरों को रखने के लिए ठेका दिया गया है। बिना काम किए ही उनको बुगतान जारी कर धन की बंदरबांट की जा रही है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। रिपोर्ट के बाद एफआईर और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी
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शासन ने वर्ष 2004 और 05 में निकार्यों में वार्डों की सफाई के लिए कर्मचारियों की कमी को देखते हुए ठेके के माध्यम से दैनिक सफाईकर्मियों को रखने के निर्देश दिए थे। इसके लिए जिलाधिकारी की अनुमति से ठेका दिया गया था। वर्ष 2005 से 11 तक जनपद में भी जिलाधिकारी के आदेश पर ठेके पर आठ वार्डों की सफाई के लिए दैनिक कर्मचारी रखे गए।
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वर्ष 2016 में बिना जिलाधिकारी के अनुमति के तत्कालीन पालिकाध्यक्ष इंदिरा देवी जायसवाल और ईओ दिनेश कुमार विश्वकर्मा की ओर से एक वर्ष के लिए ठेके पर सफाई कर्मचारियों को रखने के लिए निविदा निकाली गई और नियम विरुद्ध पांच साल के लिए अनुबंध करा दिया गया है। ठेके की पत्रावली में भी छेड़छाड़ और हेराफेरी की गई।
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आठ वार्डों की सफाई के लिए 90 कर्मचारी रखे गए। इनको संसाधन भी ठेकेदार की ओर से उपलब्ध कराना था, लेकिन संसाधन का प्रयोग पालिका का किया गया। 90 कर्मियों के स्थान पर मात्र 20 से 30 कर्मी लगाए जाए हैं। भुगतान के पूर्व में 2-4 कर्मियों को अनुपस्थित दिखा कर खानापूर्ति करके लगभग 7-8 लाख रुपये माहवार ठेकेदार को भुगतान किया जाता है।
इस धन की अधिकारियों, पदाधिकारी और कर्मचारियों की ओर से बंदरबांट की जा रही थी। दूसरा ठेका आउटसोर्सिंग के माध्यम से 10 चालकों और 50 सफाईकर्मियों का हुआ। निकाय को 10 चालकों और इन सफाई कर्मियों की जरूरत थी कि नहीं इसकी जांच की जा रही है।
जिलाधिकारी की ओर से पिछले दिनों ईओ प्रतिभा सिंह से सफाईकर्मियों की जांच कराई गई तो मामला पकड़ में आ गया। इसके बाद रविवार को जिलाधिकारी ओर से आवास पर अधिशासी अधिकारी, सफाई निरीक्षक, टीएसी/प्रोटोकाल सहायक और सफाई ठेकेदारों के प्रतिनिधियों को बुलाकर पूछताछ की गई।
जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह ने नगर की सफाई व्यवस्था खराब पाए जाने और सफाई व्यवस्था के नाम पर शासकीय धन का अबतक किए गए दुरुपयोग, अभिलेखों में छेड़छाड़-हेराफेरी, ठगी के लिए जिम्मेदार पदाधिकारी, अधिकारी, ठेकेदार के विरुद्ध अपराधिक मामला दर्ज कराने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए है।
कमेटी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में गठित की गयी है, इसमें उप जिलाधिकारी सदर तथा मुख्य कोषाधिकारी सदस्य होंगे।
प्रति कर्मचारी होता था 259 रुपये का भुगतान
आजमगढ़। पालिका का ओर से नियम विरुद्ध रखे गए कर्मचारियों को प्रतिदिन के हिसाब से 259 रुपये का भुगतान किया जाता था। 90 कर्मचारियों को हर माह लगभग सात से आठ लाख रुपये का भुगतान किया जाता था। इसके अलावा 60 कर्मचारी और हैं। इनमें 50 सफाईकर्मियों अन्य वार्डों में सफाई के लिए लगाया गया था। 10 चालक थे जिनकी पालिका को जरूरत थी भी या नहीं इसकी जांच होगी। बिना जरूरत के ये कर्मचारी रखे गए हैं तो इनको भी जारी किया गया मानदेय घोटाले में शामिल हो जाएगा।
300 सौ कर्मचारी फिर भी शहर में कूड़े के ढेर
पालिका में 144 कर्मचारी स्थायी और संविदा के तौर पर तैनात हैं। इसके बाद भी 150 कर्मचारियों डेलीवेजर के तौर पर रखा गया है। कुल 25 वार्ड में इस तरह से लगभग 300 सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके बाद भी शहर में कूड़े के ढेर लगे हैं। सफाई के नाम पर एक साल से ज्यादा समय तक पालिका में फर्जीवाड़ा किया जाता रहा।
अब श्रेणीवार वार्डों में तैनात होंगे कर्मचारी, अधिकारी रखेंगे नजर
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि अब वार्डों के हिसाब से स्थायी, संविदा और डेलीवेजर कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। इनकी जांच के लिए अधिकारियों को भी तैनात किया जा रहा है। जो वार्डों में जाकर देखेंगे की सफाई हो रही है या नहीं।
इसके बाद ही इन्हें वेतन जारी किया जाएगा। गायब रहने पर इनके खिलाफ निलंबन और एफआईआर की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही स्थायी, संविदा और डेलीवेजर कर्मचारियों को पहचान पत्र भी जारी किया जाएगा। इसे काम करते वक्त पहनना जरूरी होगा, ताकि जांच को पहुंचने वाले अधिकारी उसके बारे में जान सकें। साथ ही नागरिक भी सफाईकर्मी के न आने पर उसकी शिकायत कर सकें।
पिछले दिनों निरीक्षण और जांच के दौरान पाया गया कि नियम विरुद्ध डेलीवेजरों को रखने के लिए ठेका दिया गया है। बिना काम किए ही उनको बुगतान जारी कर धन की बंदरबांट की जा रही है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। रिपोर्ट के बाद एफआईर और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी