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Azamgarh News: व्यवस्थाओं का अभाव, कई परियोजनाएं क्रियाशील नहीं
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जिले में विकास को रफ्तार देने के लिए कई परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। जिनमे कई ऐसी हैं जो शत प्रतिशत पूरी भी हो गई हैं, लेकिन अभी तक कई संसाधनों जैसे मैनपॉवर, उपकरण व फर्नीचर के अभाव में क्रियाशील नहीं हो सकी हैं। ऐसी परियोजना को पूर्ण करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जिले में ऐसी कुल तीन परियोजनाएं शामिल है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं वन विभाग की एक व पशुपालन विभाग की एक परियोजना शामिल है। शासन ने मंडल स्तर पर पशुपालकों को बहुउद्देशीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पशु चिकित्सा पाली क्लीनिक की स्थापना की है। सिधारी पर 2016-17 से आठ करोड़, 31 लाख रुपये से परियोजना का निर्माण पूरा कर लिया गया है। पशु पालन विभाग मानव संसाधन, उपकरण के अभाव के कारण इसे चालू नहीं कर सका है।
यही हाल वन विभाग की परियोजना का भी है। कंधरापुर क्षेत्र स्थित सेहदा जंगल में वन विश्राम गृह सारस का निर्माण 4.99 करोड़ रुपये की लागत किया गया है। यह मार्च 2019 में ही जनता को समर्पित कर दिया गया। इसमें भी मानव संसाधन, उपकरण व फर्नीचर का अभाव है। जिससे यह हमेशा बंद पड़ा रहता है। इतना ही नहीं यहां तो बिजली भी नहीं है।
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ऐसा ही दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय आजमगढ़ का निर्माण कराया गया है। जिसमे प्रधानाचार्य, अधीक्षक, वार्डेन, अध्यापक तथा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। मामले में अर्थ एवं संख्यिकी अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि काफी समय पूर्व वन विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग व पशु पालन विभाग की कुल पांच परियोजनाएं पूर्ण तो हो चुकी है। इनमे मानव संसाधन, उपकरण, फर्नीचर के लिए शासन को पत्र भेजा गया था। अब हमारे यहां व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है। अब संबंधित विभाग ही मांग पत्र देगा।
कोट
सारस वन विश्राम गृह का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इसमें कुछ व्यवस्थाएं भी हो चुकी है लेकिन बिजली की व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण वह बंद है। गंगादत्त मिश्रा, डीएफओ आजमगढ़।
पाली क्लीनिक में कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति हो गई है। उपकरण अभी नहीं आया है। इसी वजह से पूर्ण रूप से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। उपकरण के लिए मांग की गई है। -सीबी कश्यप, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आजमगढ़।
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जिले में ऐसी कुल तीन परियोजनाएं शामिल है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं वन विभाग की एक व पशुपालन विभाग की एक परियोजना शामिल है। शासन ने मंडल स्तर पर पशुपालकों को बहुउद्देशीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पशु चिकित्सा पाली क्लीनिक की स्थापना की है। सिधारी पर 2016-17 से आठ करोड़, 31 लाख रुपये से परियोजना का निर्माण पूरा कर लिया गया है। पशु पालन विभाग मानव संसाधन, उपकरण के अभाव के कारण इसे चालू नहीं कर सका है।
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यही हाल वन विभाग की परियोजना का भी है। कंधरापुर क्षेत्र स्थित सेहदा जंगल में वन विश्राम गृह सारस का निर्माण 4.99 करोड़ रुपये की लागत किया गया है। यह मार्च 2019 में ही जनता को समर्पित कर दिया गया। इसमें भी मानव संसाधन, उपकरण व फर्नीचर का अभाव है। जिससे यह हमेशा बंद पड़ा रहता है। इतना ही नहीं यहां तो बिजली भी नहीं है।
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ऐसा ही दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय आजमगढ़ का निर्माण कराया गया है। जिसमे प्रधानाचार्य, अधीक्षक, वार्डेन, अध्यापक तथा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। मामले में अर्थ एवं संख्यिकी अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि काफी समय पूर्व वन विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग व पशु पालन विभाग की कुल पांच परियोजनाएं पूर्ण तो हो चुकी है। इनमे मानव संसाधन, उपकरण, फर्नीचर के लिए शासन को पत्र भेजा गया था। अब हमारे यहां व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है। अब संबंधित विभाग ही मांग पत्र देगा।
कोट
सारस वन विश्राम गृह का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इसमें कुछ व्यवस्थाएं भी हो चुकी है लेकिन बिजली की व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण वह बंद है। गंगादत्त मिश्रा, डीएफओ आजमगढ़।
पाली क्लीनिक में कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति हो गई है। उपकरण अभी नहीं आया है। इसी वजह से पूर्ण रूप से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। उपकरण के लिए मांग की गई है। -सीबी कश्यप, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आजमगढ़।