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नियम को ताक पर रख वाहनों के स्वरूप में कर रहे बदलाव
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आजमगढ़। नए मोटर व्हीकल एक्ट में वाहनों के मॉडिफिकेशन (परिवर्तन) कराने पर रजिस्ट्रेशन रद करने का प्रावधान है। बावजूद इसके नियमों के पालन में घनघोर लापरवाही के चलते शौकीन लोग धड़ल्ले से वाहनों का मॉडिफिकेशन करा रहे हैं। इतना ही नहीं चार पहिया वाहनों (पिकअप व जीप) को डीजे के रूप में तब्दील कर रहे हैं जो पूरी तरह गलत है। यह बिना फिटनेस सड़कों पर कैसे दौड़ रहे यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के मुताबिक व्हीकल के बेसिक स्ट्रक्चर से ‘छेड़छाड़’ कानून का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अगर किसी वाहन के साथ कोई मॉडिफिकेशन कराया तो, वाहन का रजिस्ट्रेशन तक रद हो सकता है। यह नियम तकरीबन सभी वाहनों कार, बाइक, बस और ट्रक पर लागू होता है। बॉडी या चेसिस के साथ कोई आधारभूत बदलाव या फिर बैटरी, सीएनजी, सोलर पॉवर या एलपीजी पर वाहन चलाना या फिर किसी प्रकार की कनवर्जन किट लगाना नियम के खिलाफ है। बावजूद इसके जीप व पिकअप में परिवर्तन कर उसे डीजे के रूप में बदल रहे हैं। इतना ही नहीं इसमें कंडम वाहनों का भी प्रयोग किया जा रहा है। जिसपर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर आज तक नहीं पड़ी। तिराहे व चौराहों पर खड़ी पुलिस व परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम मूकदर्शक बन तमाशा देखती है। एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव ने बताया कि कंपनी द्वारा जो वाहन दिया जाता है, उसमें कोई भी परिवर्तन करना कानूनी अपराध है। यदि कोई ऐसा करता है तो वह गलत है। ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। ताकि उनपर अंकुश लग सके।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के मुताबिक व्हीकल के बेसिक स्ट्रक्चर से ‘छेड़छाड़’ कानून का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अगर किसी वाहन के साथ कोई मॉडिफिकेशन कराया तो, वाहन का रजिस्ट्रेशन तक रद हो सकता है। यह नियम तकरीबन सभी वाहनों कार, बाइक, बस और ट्रक पर लागू होता है। बॉडी या चेसिस के साथ कोई आधारभूत बदलाव या फिर बैटरी, सीएनजी, सोलर पॉवर या एलपीजी पर वाहन चलाना या फिर किसी प्रकार की कनवर्जन किट लगाना नियम के खिलाफ है। बावजूद इसके जीप व पिकअप में परिवर्तन कर उसे डीजे के रूप में बदल रहे हैं। इतना ही नहीं इसमें कंडम वाहनों का भी प्रयोग किया जा रहा है। जिसपर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर आज तक नहीं पड़ी। तिराहे व चौराहों पर खड़ी पुलिस व परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम मूकदर्शक बन तमाशा देखती है। एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव ने बताया कि कंपनी द्वारा जो वाहन दिया जाता है, उसमें कोई भी परिवर्तन करना कानूनी अपराध है। यदि कोई ऐसा करता है तो वह गलत है। ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। ताकि उनपर अंकुश लग सके।
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