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राम का राज्यभिषेक होते ही लगे जय श्रीराम के जयकारे

Mon, 17 Oct 2022 12:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 17 Oct 2022 12:09 AM IST
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Jai Shri Ram's cheers started as soon as Ram's coronation took place.
निजामाबाद कस्बे में ठाकुरद्वारा चौक पर सचल श्री रामलीला में भगवान श्री राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। मार्टीनगंज थाना क्षेत्र के दीदारगंज स्थित पुष्पनगर की रामलीला में शनिवार को राम राज्याभिषेक धूमधाम से किया गया। राज्याभिषेक होते ही जय श्री राम के जयकारे से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
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रामलीला समिति के अध्यक्ष रवि विश्वकर्मा ने बताया किरामलीला बहुत पुरानी है। यहां आस पास के कई गांव के लोग रामलीला देखने आते है। राम का राज्याभिषेक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान अवनीश सिंह आसु, नितेश सिंह, रौनक सिंह, कृष्णकांत सिंह आदि मौजूद थे। निजामाबाद : कस्बे में चल रही श्री रामलीला में शनिवार की देर शाम ठाकुरद्वारा चौक पर भरत मिलाप का आयोजन किया गया। ठाकुरद्वारा मंदिर में भगवान श्रीराम, जानकी, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी की झांकी देखने को लोगों की अपार भीड़ रही। श्रीराम और भरत के मिलन को देख उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखे नम हो गईं। रामलीला में चौदह वर्ष के वनवास के बाद भगवान श्रीराम रावण का वध कर लंका का राज विभीषण को सौंप कर पुष्पक विमान से अयोध्या की ओर लौट पड़े। वहीं 14 वर्ष से भगवान राम की खड़ाऊं को अयोध्या की राजगद्दी पर रखकर उनकी प्रतीक्षा कर रहे भरत श्रीराम के लौटने की खबर सुनते ही उनकी आंखों से आंसू छलक उठे। पूरे नगर को सजाया गया। अयोध्या पहुंच भगवान राम सर्वप्रथम माता कैकेयी से मिले। भगवान राम ने अपना वनवासी वेष त्यागकर राजशाही वेष धारण किया। इसके बाद भगवान राम का धूमधाम से गुरु वशिष्ठ ने राज्याभिषेक किया। रामलीला में अध्यक्ष श्रीप्रकाश चौरसिया, आशीष कसौधन, अजय मोदनवाल, कृपाशंकर उपाध्याय, संतोष सोनी, पंकज सोनीउपस्थित थे। मेजवां : क्षेत्र के शाहजेरपुर गांव में शिव सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीराम लीला मंचन में शनिवार की रात कलाकारों ने पुष्प वाटिका में गौरी पूजन, धनुष यज्ञ, परशुराम संवाद, श्रीराम- सीता के विवाह का मंचन किया। पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। रामलीला में राजा जनक सीता के स्वयंवर की घोषणा करते हैं। वहां रखे शिव के धनुष को कोई नहीं तोड़ सका। आखिर में गुरु की आज्ञा मिलते ही श्रीराम ने शिव के धनुष को तोड़ दिया। ऐसे में सीता ने राम के गले में जयमाल डाल दी। उधर, धनुष की टंकार से परशुराम की तपस्या भंग हो गई। परशुराम और लक्ष्मण के बीच काफी देर तक संवाद होता है, लेकिन असली रूप देख उन्होंने श्रीराम की आरती उतारी। इस मौके पर रमेश चंद्र, किसान मौर्य, पवन जायसवाल, नीकेलाल, डा. एसडी यादव, प्रधान अंकुर यादव मौजूद थे।
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