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इस्लाम का आतंकवाद से कोई संबंध नहीं
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सरायमीर स्थित इमामाबाड़े में आयोजित मजलिस को संबोधित करते मौलाना सैय्यद कमर अब्बास रिजवी।
- फोटो : AZAMGARH
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सरायमीर। कस्बा स्थित इमामाबाड़े में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैय्यद कमर अब्बास रिजवी ने कहा कि इस्लाम का आतंकवाद से कोई संबंध नही है। उन्होंने कहा कि यह जो जेहाद व इस्लाम के नाम पर आतंकी घटनाएं हो रही हैं। यह जेहाद व इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश है।
सही इस्लाम रसूले अकरम व उनकी औलाद और उनके वफादार साथियों से मिलेगा। इस्लाम अमन, शांति, भाईचारा व मोहब्बत प्रेम से रहने वाला मजहब है। मौलाना ने कहा कि आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रदर्शन करबला में हुआ, जहां बातिल अपनी भरपूर ताकत से सही इस्लाम को मिटाने की कोशिश की। लेकिन रसूल के नवासे इमाम हुसैन ने हर जुल्म का मुकाबला सब्र व हिम्मत से करके नाना के लाए हुए दीन की रक्षा की और मानवता की लाज रखी। आज हमारे जुलूस, मजलिस व मातम मजलूमों से मोहब्बत व जालिम आतंकवादियों के खिलाफ एक एहतेजाज है।
नवीं मोहर्रम का जुलूस स्थगित
सरायमीर। जैसे-जैसे यौमे आशूरा दसवीं तारीख करीब आ रही है। अजादारों में गम की शिद्दत बढ़ती जा रही है। हालांकि कोविड-19 गाइडलाइन के तहत सिर्फ 50 लोग ही मजलिस में शामिल हो रहे हैं। इस बार भी जुलूस निकालने की इजाजत प्रशासन द्वारा नहीं मिली है। सातवीं मोहर्रम को रौजा अली आशिकान से निकलने वाला सैकड़ों साल पुराना जुलूस स्थगित कर दिया गया है। शिया कमेटी के मीडिया इंचार्ज मोहम्मद हुसैन ने बताया कि नवीं मोहर्रम का कदीम जुलूस जो इमामबाड़ा बारगाहे हुसैनी से निकाला जाता था, इस साल कोविड-19 को देखते प्रशासन से अनुमति न मिलने के कारण स्थगित कर दिया गया है।
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सही इस्लाम रसूले अकरम व उनकी औलाद और उनके वफादार साथियों से मिलेगा। इस्लाम अमन, शांति, भाईचारा व मोहब्बत प्रेम से रहने वाला मजहब है। मौलाना ने कहा कि आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रदर्शन करबला में हुआ, जहां बातिल अपनी भरपूर ताकत से सही इस्लाम को मिटाने की कोशिश की। लेकिन रसूल के नवासे इमाम हुसैन ने हर जुल्म का मुकाबला सब्र व हिम्मत से करके नाना के लाए हुए दीन की रक्षा की और मानवता की लाज रखी। आज हमारे जुलूस, मजलिस व मातम मजलूमों से मोहब्बत व जालिम आतंकवादियों के खिलाफ एक एहतेजाज है।
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नवीं मोहर्रम का जुलूस स्थगित
सरायमीर। जैसे-जैसे यौमे आशूरा दसवीं तारीख करीब आ रही है। अजादारों में गम की शिद्दत बढ़ती जा रही है। हालांकि कोविड-19 गाइडलाइन के तहत सिर्फ 50 लोग ही मजलिस में शामिल हो रहे हैं। इस बार भी जुलूस निकालने की इजाजत प्रशासन द्वारा नहीं मिली है। सातवीं मोहर्रम को रौजा अली आशिकान से निकलने वाला सैकड़ों साल पुराना जुलूस स्थगित कर दिया गया है। शिया कमेटी के मीडिया इंचार्ज मोहम्मद हुसैन ने बताया कि नवीं मोहर्रम का कदीम जुलूस जो इमामबाड़ा बारगाहे हुसैनी से निकाला जाता था, इस साल कोविड-19 को देखते प्रशासन से अनुमति न मिलने के कारण स्थगित कर दिया गया है।
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