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फर्जीवाड़े में पेशकार के विरुद्घ एफआईआर और विभागीय कार्रवाई का निर्देश
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आजमगढ़। मंडलायुक्त के निर्देश पर हुई जांच में पेशकार की मिलीभगत से हुई फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आने के बाद मंडलायुक्त कनक त्रिपाठी ने बुधवार को एफआईआर दर्ज कराते हुए विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया। उक्त मामला बूढ़नपुर तहसील के रतुआपार गांव का है।
बूढ़नपुर तहसील के रतुआपार गांव निपासी श्रीराम सहित नौ लोगों ने मंडलायुक्त से शिकायत किया था कि उनके गांव स्थित गाटा संख्या 715 जो नवीन परती खाते की भूमि थी। उसका 1997 में पट्टा उन लोगों को कर दिया गया है, जिस पर गांव के ही एक अन्य व्यक्ति मुन्नर ने उक्त गाटा के साथ ही गाटा संख्या 718 के बावत एक फर्जी पत्रावली तैयार कर मुकदमा संस्थित दिखाकर ग्रामसभा के विरुद्ध 4 अप्रैल 2012 को आदेश प्राप्त कर लिया है। उक्त वाद में मुन्नर ने अपने पूर्वजों की काश्तकारी श्रेणी-8 ए जमींदारी टूटने के बाद सीरदारी व भूमिधरी बताया गया है। फर्जी आदेश व आधार बनाते हुए किया गया पट्टा निरस्त कर दिया गया है। मंडलायुक्त ने पूरे मामले के जांच की जिम्मेदारी अपर आयुक्त प्रशासन अनिल कुमार मिश्र को सौंपी। अपर आयुक्त ने अपनी आख्या बताया कि अतिरिक्त अधिकारी द्वितीय के न्यायालय में गाटा संख्या 715 व 718 के बाबत वाद संख्या 162 धारा 229बी जमींदारी विनाश अधिनियम की पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट हुआ कि वाद परगना अधिकारी बूढ़नपुर के न्यायालय में 1995 में दाखिल हुआ है। लेकिन वहां के मिसिलबंद रजिस्टर में यह वाद कहीं अंकित नहीं है। इसी प्रकार पत्रावली अतिरिक्त अधिकारी द्वितीय के न्यायालय में स्थानांतरित किए जाने संबंधी एसडीएम बूढ़नपुर का आदेश चस्पा है, लेकिन जांच में यह आदेश भी फर्जी पाया गया। 1995 से 2012 तक उक्त पत्रावली कहां रही है और उस पर क्या कार्रवाई होती रही यह पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट नहीं हो पाया। जांच के दौरान इस प्रकार के अनेकों फर्जी अंकन पाए गए। इस प्रकार वर्ष 2012 में अतिरिक्त अधिकारी द्वितीय के न्यायालय में कार्यरत रीडर नन्हे लाल श्रीवास्तव जो अब तहसील सदर आजमगढ़ में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, ने मिली भगत करके फर्जी पत्रावली को बिना किसी आदेश के न्यायालय में दर्ज कराकर अविधिक आदेश ग्रामसभा के विरुद्ध पारित किया गया है, जिससे ग्रामसभा की अपूर्णीय क्षति हुई है। उक्त कृत्य के लिए उन्होंने श्री श्रीवास्तव के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराते हुए उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित किए जाने की संस्तुति की। मंडलायुक्त कनक त्रिपाठी ने प्रकरण में अपर आयुक्त द्वारा की गई संस्तुति पर तत्कालीन रीडर नन्हे लाल श्रीवास्तव जो वर्तमान में तहसील सदर में प्रशासनिक अधिकारी है के विरुद्ध कार्रवाई के लिए डीएम को निर्देश दिया है।
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बूढ़नपुर तहसील के रतुआपार गांव निपासी श्रीराम सहित नौ लोगों ने मंडलायुक्त से शिकायत किया था कि उनके गांव स्थित गाटा संख्या 715 जो नवीन परती खाते की भूमि थी। उसका 1997 में पट्टा उन लोगों को कर दिया गया है, जिस पर गांव के ही एक अन्य व्यक्ति मुन्नर ने उक्त गाटा के साथ ही गाटा संख्या 718 के बावत एक फर्जी पत्रावली तैयार कर मुकदमा संस्थित दिखाकर ग्रामसभा के विरुद्ध 4 अप्रैल 2012 को आदेश प्राप्त कर लिया है। उक्त वाद में मुन्नर ने अपने पूर्वजों की काश्तकारी श्रेणी-8 ए जमींदारी टूटने के बाद सीरदारी व भूमिधरी बताया गया है। फर्जी आदेश व आधार बनाते हुए किया गया पट्टा निरस्त कर दिया गया है। मंडलायुक्त ने पूरे मामले के जांच की जिम्मेदारी अपर आयुक्त प्रशासन अनिल कुमार मिश्र को सौंपी। अपर आयुक्त ने अपनी आख्या बताया कि अतिरिक्त अधिकारी द्वितीय के न्यायालय में गाटा संख्या 715 व 718 के बाबत वाद संख्या 162 धारा 229बी जमींदारी विनाश अधिनियम की पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट हुआ कि वाद परगना अधिकारी बूढ़नपुर के न्यायालय में 1995 में दाखिल हुआ है। लेकिन वहां के मिसिलबंद रजिस्टर में यह वाद कहीं अंकित नहीं है। इसी प्रकार पत्रावली अतिरिक्त अधिकारी द्वितीय के न्यायालय में स्थानांतरित किए जाने संबंधी एसडीएम बूढ़नपुर का आदेश चस्पा है, लेकिन जांच में यह आदेश भी फर्जी पाया गया। 1995 से 2012 तक उक्त पत्रावली कहां रही है और उस पर क्या कार्रवाई होती रही यह पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट नहीं हो पाया। जांच के दौरान इस प्रकार के अनेकों फर्जी अंकन पाए गए। इस प्रकार वर्ष 2012 में अतिरिक्त अधिकारी द्वितीय के न्यायालय में कार्यरत रीडर नन्हे लाल श्रीवास्तव जो अब तहसील सदर आजमगढ़ में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, ने मिली भगत करके फर्जी पत्रावली को बिना किसी आदेश के न्यायालय में दर्ज कराकर अविधिक आदेश ग्रामसभा के विरुद्ध पारित किया गया है, जिससे ग्रामसभा की अपूर्णीय क्षति हुई है। उक्त कृत्य के लिए उन्होंने श्री श्रीवास्तव के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराते हुए उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित किए जाने की संस्तुति की। मंडलायुक्त कनक त्रिपाठी ने प्रकरण में अपर आयुक्त द्वारा की गई संस्तुति पर तत्कालीन रीडर नन्हे लाल श्रीवास्तव जो वर्तमान में तहसील सदर में प्रशासनिक अधिकारी है के विरुद्ध कार्रवाई के लिए डीएम को निर्देश दिया है।
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