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जश्ने-आजादी के बीच आशियाने की फिक्र
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Mon, 15 Aug 2016 12:06 AM IST
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घाघरा में उफान
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एक तरफ जहां पूरा जिला स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी में जुटा है। वहीं, दूसरी तरफ देवारा क्षेत्र के लोग कटान के डर से अपना आशियाना खुद उजाड़कर दूसरी जगह बसने की तैयारी में हैं। नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी और कटान से लोग दहशत में हैं।
सगड़ी तहसील के देवरांचल की घाघरा से सुरक्षा के लिए 42 किमी महुला गढ़वल बांध बनाया गया है। इस बंधे में उत्तर तरफ 25943 हेक्टेअर क्षेत्रफल में 115617 की आबादी घाघरा की बाढ़ से प्रभावित होती है। घाघरा नदी का जलस्तर विगत तीन दिनों से लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान भी जारी है। इसके कारण, जहां सोमवार को स्वतंत्रता दिवस को धूमधाम से मनाने की तैयारियों में लगे हुए हैं। वहीं, देवारा खास राजा के मुराली का पुरा गांव के लोगों को कटान की चिंता खाए जा रही है। उनके चेहरे से हंसी गायब हो गई है। उसकी जगह दहशत ने ली है। कटान से डरे ग्रामीण अपना आशियाना खुद उजाड़कर दूसरी जगह बसने की तैयारी में हैं।
मुराली, रामवृक्ष, शिवनाथ, लालबचन, रामकवल, राधेश्याम, तीर्थराज, परसन, पतिराज, बासू, लक्षिराम, त्रिलोकी, तीरथ, मुंशी आदि अपना आशियाना अपने हाथ से खुद उजाड़ रहे है। यह लोग रौनापार नई बस्ती, महुला गढ़वल बांध और गोरखपुर जनपद के गोला, गोपलापुर और बिसरा में शरण ले रहे हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई जा रही है। ग्राम प्रधान इनरावती देवी, पल्टन यादव और लेखपाल रविंद्र पांडेय ने कहा कि इनको सुरक्षित स्थान पर जल्द ही जमीन मुहैया कराई जाएगी। जब तक जमीन नहीं मिल रही है, लोग हमारी जमीन, स्कूल, पंचायत भवन में रह सकते हैं। घाघरा की कटान से विस्थापित लोग रिश्तेदार या संपर्की के यहां शरण ले रहे हैं।
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सगड़ी तहसील के देवरांचल की घाघरा से सुरक्षा के लिए 42 किमी महुला गढ़वल बांध बनाया गया है। इस बंधे में उत्तर तरफ 25943 हेक्टेअर क्षेत्रफल में 115617 की आबादी घाघरा की बाढ़ से प्रभावित होती है। घाघरा नदी का जलस्तर विगत तीन दिनों से लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान भी जारी है। इसके कारण, जहां सोमवार को स्वतंत्रता दिवस को धूमधाम से मनाने की तैयारियों में लगे हुए हैं। वहीं, देवारा खास राजा के मुराली का पुरा गांव के लोगों को कटान की चिंता खाए जा रही है। उनके चेहरे से हंसी गायब हो गई है। उसकी जगह दहशत ने ली है। कटान से डरे ग्रामीण अपना आशियाना खुद उजाड़कर दूसरी जगह बसने की तैयारी में हैं।
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मुराली, रामवृक्ष, शिवनाथ, लालबचन, रामकवल, राधेश्याम, तीर्थराज, परसन, पतिराज, बासू, लक्षिराम, त्रिलोकी, तीरथ, मुंशी आदि अपना आशियाना अपने हाथ से खुद उजाड़ रहे है। यह लोग रौनापार नई बस्ती, महुला गढ़वल बांध और गोरखपुर जनपद के गोला, गोपलापुर और बिसरा में शरण ले रहे हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई जा रही है। ग्राम प्रधान इनरावती देवी, पल्टन यादव और लेखपाल रविंद्र पांडेय ने कहा कि इनको सुरक्षित स्थान पर जल्द ही जमीन मुहैया कराई जाएगी। जब तक जमीन नहीं मिल रही है, लोग हमारी जमीन, स्कूल, पंचायत भवन में रह सकते हैं। घाघरा की कटान से विस्थापित लोग रिश्तेदार या संपर्की के यहां शरण ले रहे हैं।
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