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कैसे होगी रबी की बुआई जब नदारद रहेगा डीएपी खाद
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मेंहनगर के करनेहुवा स्थित साधन सहकारी समिति पर डीएपी और यूरिया की प्रतिक्षा करते किसान।-प्लान ख?
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। जनपद में रबी की बुआई शुरू हो गई लेकिन सहकारी समितियों पर अभी तक डीएपी खाद आवश्यकता के अनुसार नहीं पहुंच पाई है। जिसके कारण किसान बाजारों से महंगे दामों पर डीएपी खाद खरीदने को मजबूर है। 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक रबी की फसल की बुवाई किसान करते है। इस समय गेंहू, जौ, मक्का, चना, मटर, टोरिया, राई सरसों आदि फसलों की बुवाई किसान करते है। समितियों पर डीएपी खाद नदारद होने के कारण रबी की बुवाई में विलंब हो रहा है। वहीं किसानों को खाद ऊंचे दामों पर खरीदारी करनी पड़ रही है।
जनपद में रबी की फसल 279714 हेक्टयर में आच्छादित होता है वहीं अब तक 18625 हेक्टयर में ही पूर्ति हो पाई है। जिसमे गेहूं 241598 हेक्ट के सापेक्ष अभी तक 72220 हे., जौ 2954 हे. के सापेक्ष 2568, चना 3227 हे0 के सापेक्ष 3186 हे. तो मटर 7980 हे0 के सापेक्ष 7792 हेक्टयर पूर्ति हो सकी है। वहीं वहीं केवल मसूर 57 हे. टारिया 1338 हे. के सापेक्ष शत प्रतिशत की पूर्ति हो चुकी है। साथ ही राई सरसों 2478 हेक्टयर के सापेक्ष 2467 हेे. पूर्ति हो चुकी है वहीं मटर की खेती जनपद में न के बराबर होता है। जनपद में रबी की फसल की बुवाई के लिए पिछले वर्ष यूरिया 4756 एमटी उपलब्ध था तो वहीं वितरण 2081 एमटी हुआ वहीं डीएपी की उपलब्धता 8873 एमटी के बदले वितरण 6850 एमटी किया गया।
विभागीय आकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान रबी की बुवाई के लिए आज तक यूरिया 902 एमटी उपलब्ध कराया गया तो वहीं 726 एमटी का वितरण हुआ। साथ ही डीएपी 3392 एमटी के उपलब्ध कराया गया तो वहीं अब तक 3052 एमटी वितरण हो सक। जिससे साफ है कि यूरिया और डीएपी की आमद कम होने से वर्तमान सत्र में किसान बुआई के लिए परेशान है। किसानों को बाहर से महंगे दामों पर यूरिया-डीएपी की खरीदारी करनी पड़ रही है। जिसके कारण किसानों में नाराजगी व्याप्त है। उधर, विभाग का कहना कि अभी चार दिनों तक और किसानों को खाद के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
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अब तक उपलब्ध कराई गई डीएपी का वितरण जनपद के समितियों को करा दिया गया था। 3 दिसंबर को डीएपी की रैक जनपद में पहुंचेगी। जिसका वितरण करा दिया जाएगा।- एआर सहकारिता विभाग
हरिओम सिंह।
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जनपद में रबी की फसल 279714 हेक्टयर में आच्छादित होता है वहीं अब तक 18625 हेक्टयर में ही पूर्ति हो पाई है। जिसमे गेहूं 241598 हेक्ट के सापेक्ष अभी तक 72220 हे., जौ 2954 हे. के सापेक्ष 2568, चना 3227 हे0 के सापेक्ष 3186 हे. तो मटर 7980 हे0 के सापेक्ष 7792 हेक्टयर पूर्ति हो सकी है। वहीं वहीं केवल मसूर 57 हे. टारिया 1338 हे. के सापेक्ष शत प्रतिशत की पूर्ति हो चुकी है। साथ ही राई सरसों 2478 हेक्टयर के सापेक्ष 2467 हेे. पूर्ति हो चुकी है वहीं मटर की खेती जनपद में न के बराबर होता है। जनपद में रबी की फसल की बुवाई के लिए पिछले वर्ष यूरिया 4756 एमटी उपलब्ध था तो वहीं वितरण 2081 एमटी हुआ वहीं डीएपी की उपलब्धता 8873 एमटी के बदले वितरण 6850 एमटी किया गया।
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विभागीय आकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान रबी की बुवाई के लिए आज तक यूरिया 902 एमटी उपलब्ध कराया गया तो वहीं 726 एमटी का वितरण हुआ। साथ ही डीएपी 3392 एमटी के उपलब्ध कराया गया तो वहीं अब तक 3052 एमटी वितरण हो सक। जिससे साफ है कि यूरिया और डीएपी की आमद कम होने से वर्तमान सत्र में किसान बुआई के लिए परेशान है। किसानों को बाहर से महंगे दामों पर यूरिया-डीएपी की खरीदारी करनी पड़ रही है। जिसके कारण किसानों में नाराजगी व्याप्त है। उधर, विभाग का कहना कि अभी चार दिनों तक और किसानों को खाद के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
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अब तक उपलब्ध कराई गई डीएपी का वितरण जनपद के समितियों को करा दिया गया था। 3 दिसंबर को डीएपी की रैक जनपद में पहुंचेगी। जिसका वितरण करा दिया जाएगा।- एआर सहकारिता विभाग
हरिओम सिंह।