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बगहवा में मकान घाघरा में विलीन
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लाटघाट। घाघरा का जलस्तर तो नीचे आ रहा है लेकिन रुक-रुक कर कटान जारी है। कटान की गति कम जरूर हुई है। इससे देवारावासियों ने राहत की सांस ली है। हगहवा में मंगरू यादव का आशियाना घाघरा में विलीन हो गया है। वहीं, देवाराखास राजा का जूनियर हाईस्कूल पूरी तरीके से घाघरा में समाने को आतुर है।
महाराजगंज ब्लॉक के अराजी सेमरी, हरैया ब्लाक के अचल नगर, देवारा खास राजा, साधु का पुरवा, झगरहवा, बासु का पुरा में आबादी की जमीन के साथ-साथ घाघरा नदी खेती योग्य जमीन काट रही है। गन्ना की फसल भी कट रही है। इससे किसानों का आर्थिक नुकसान हो रहा है। बगहवा गांव में कुल 68 परिवार निवास करते हैं। इसमें 12 लोगों का मकान घाघरा नदी के कटान के मुहाने पर है। मंगरु यादव का मकान कट कर घाघरा नदी में विलीन हो गया। जूनियर विद्यालय देवाराखास राजा घाघरा नदी में विलीन होने की कगार पर है। साधु के पुरा में 75 परिवार निवास करते हैं। इसमें 14 लोगों का मकान घाघरा नदी के कटान के मुहाने पर है। झगरहवा में 50 लोगों का परिवार निवास करता है। इसमें 10 लोगों का मकान घाघरा नदी के कटान के मुहाने पर है। बासु का पुरा में 16 परिवार रहते हैं। इसमें आठ लोगों का मकान घाघरा नदी के कटान के मुहाने पर है। घाघरा नदी जलस्तर के घटने के साथ ही तमाम दुश्वारियों को छोड़ गई है। जगह-जगह पानी के सड़ने से संक्रामक बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहे हैं। उधर, बाढ़ चौकियों पर दवा का अभाव है। इससे इलाज नहीं हो पा रहा है।
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महाराजगंज ब्लॉक के अराजी सेमरी, हरैया ब्लाक के अचल नगर, देवारा खास राजा, साधु का पुरवा, झगरहवा, बासु का पुरा में आबादी की जमीन के साथ-साथ घाघरा नदी खेती योग्य जमीन काट रही है। गन्ना की फसल भी कट रही है। इससे किसानों का आर्थिक नुकसान हो रहा है। बगहवा गांव में कुल 68 परिवार निवास करते हैं। इसमें 12 लोगों का मकान घाघरा नदी के कटान के मुहाने पर है। मंगरु यादव का मकान कट कर घाघरा नदी में विलीन हो गया। जूनियर विद्यालय देवाराखास राजा घाघरा नदी में विलीन होने की कगार पर है। साधु के पुरा में 75 परिवार निवास करते हैं। इसमें 14 लोगों का मकान घाघरा नदी के कटान के मुहाने पर है। झगरहवा में 50 लोगों का परिवार निवास करता है। इसमें 10 लोगों का मकान घाघरा नदी के कटान के मुहाने पर है। बासु का पुरा में 16 परिवार रहते हैं। इसमें आठ लोगों का मकान घाघरा नदी के कटान के मुहाने पर है। घाघरा नदी जलस्तर के घटने के साथ ही तमाम दुश्वारियों को छोड़ गई है। जगह-जगह पानी के सड़ने से संक्रामक बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहे हैं। उधर, बाढ़ चौकियों पर दवा का अभाव है। इससे इलाज नहीं हो पा रहा है।
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