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भेदभाव से विखंडित हुआ हिंदू धर्म
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 10 Feb 2015 12:03 AM IST
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कहा कि भेदभाव के ही चलते ही हिंदू धर्म कमजोर हुआ है। अन्य धर्मोँ ने इसका लाभ उठाया, इसी का परिणाम रहा कि देश में तेजी से धर्मांतरण हुआ।
अब उनके घर लौटने पर यूपी सरकार को एतराज है, जबकि इसके विपरीत होने वाले कार्यों पर नहीं। प्रदेश सरकार धर्मांतरण पर सख्त कानून लाए हम सभी उसका स्वागत करेंगे।
अमेरिका के बाबत कहा कि वहां राष्ट्रधर्म है सर्वोपरि है, उससे सीख लेनी चाहिए। वे सोमवार को डीएवी इंटर कालेज में आयोजित विहिप के हिंदू महा सम्मेलन में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि अमेरिका तो दुनिया का दादा है, लेकिन राष्ट्रधर्म में उसका जोड़ नहीं, इसी का परिणाम है कि वर्ष 2001 के बाद वहां कोई आतंकी घटना नहीं हुई।
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जबकि अपने देश में तुष्टिकरण की राजनीति का परिणाम रहा कि लगातार विस्फोट हुए। इसराइल आतंकवादियों के विरुद्ध मुकम्मल लड़ाई लड़ना जानता है।
क्या मजाल है कि उसके देश के एक नागरिक को भी कोई हाथ लगा सकें। कहा कि हिंदू धर्म सांप्रदायिक नहीं हो सकता। क्योंकि इसके अंदर सहनशीलता है, तभी तो यह सबका सम्मान करता है।
अन्य धर्र्मों की तरह हमें भी बताना पड़ेगा हम हिंदू है, तभी हमारी शक्ति बढ़ेगी। अलग-अलग जातियाें, भेदभाव का परिणाम है कि बहुसंख्यक होते हुए भी हम कमजोर हैं।
उन्होंने कहा कि धर्मांतरण का सिलसिला आज से नहीं 1956 से ही शुरू हो गया था। पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू जब मध्यप्रदेश के वनवासी क्षेत्रों में गए तो वहां के लोगों ने उन्हें काला झंडा दिखाया।
पूछने पर पता चला कि ये सभी धर्म परिवर्तन कर ईसाई हो चुके हैं और देश के पीएम को अपना नहीं मानते हैं। तब नेहरू को गलती का एहसास हुआ था।
बोले विश्व हिंदू परिषद ने हिंदू की अस्मिता को बचाने का काम किया। कहा कि, यूपी सरकार को घर लौटने वालों पर एतराज है, जबकि इसके विपरीत होने वाले कार्यों पर नहीं।
बोले प्रदेश सरकार धर्मांतरण पर सख्त कानून लाए हम सभी उसका स्वागत करेंगे। आज आजमगढ़ के नौजवानों को जलालत का सामना करना पड़ता है तो इसकी वजह क्या है? इसका कारण कट्टर पंथी, और गलत सोच।
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अब उनके घर लौटने पर यूपी सरकार को एतराज है, जबकि इसके विपरीत होने वाले कार्यों पर नहीं। प्रदेश सरकार धर्मांतरण पर सख्त कानून लाए हम सभी उसका स्वागत करेंगे।
अमेरिका के बाबत कहा कि वहां राष्ट्रधर्म है सर्वोपरि है, उससे सीख लेनी चाहिए। वे सोमवार को डीएवी इंटर कालेज में आयोजित विहिप के हिंदू महा सम्मेलन में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि अमेरिका तो दुनिया का दादा है, लेकिन राष्ट्रधर्म में उसका जोड़ नहीं, इसी का परिणाम है कि वर्ष 2001 के बाद वहां कोई आतंकी घटना नहीं हुई।
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जबकि अपने देश में तुष्टिकरण की राजनीति का परिणाम रहा कि लगातार विस्फोट हुए। इसराइल आतंकवादियों के विरुद्ध मुकम्मल लड़ाई लड़ना जानता है।
क्या मजाल है कि उसके देश के एक नागरिक को भी कोई हाथ लगा सकें। कहा कि हिंदू धर्म सांप्रदायिक नहीं हो सकता। क्योंकि इसके अंदर सहनशीलता है, तभी तो यह सबका सम्मान करता है।
अन्य धर्र्मों की तरह हमें भी बताना पड़ेगा हम हिंदू है, तभी हमारी शक्ति बढ़ेगी। अलग-अलग जातियाें, भेदभाव का परिणाम है कि बहुसंख्यक होते हुए भी हम कमजोर हैं।
उन्होंने कहा कि धर्मांतरण का सिलसिला आज से नहीं 1956 से ही शुरू हो गया था। पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू जब मध्यप्रदेश के वनवासी क्षेत्रों में गए तो वहां के लोगों ने उन्हें काला झंडा दिखाया।
पूछने पर पता चला कि ये सभी धर्म परिवर्तन कर ईसाई हो चुके हैं और देश के पीएम को अपना नहीं मानते हैं। तब नेहरू को गलती का एहसास हुआ था।
बोले विश्व हिंदू परिषद ने हिंदू की अस्मिता को बचाने का काम किया। कहा कि, यूपी सरकार को घर लौटने वालों पर एतराज है, जबकि इसके विपरीत होने वाले कार्यों पर नहीं।
बोले प्रदेश सरकार धर्मांतरण पर सख्त कानून लाए हम सभी उसका स्वागत करेंगे। आज आजमगढ़ के नौजवानों को जलालत का सामना करना पड़ता है तो इसकी वजह क्या है? इसका कारण कट्टर पंथी, और गलत सोच।