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Azamgarh News: पीएम श्री विद्यालयों में बनेंगे हर्बल एवं औषधि उद्यान, पर्यावरण की समझ होगी विकसित
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पीएम श्री विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने के लिए हर्बल एवं औषधीय उद्यान विकसित किए जाएंगे। इन उद्यानों में विद्यार्थियों को औषधीय और सुगंधित पौधों की पहचान, उनके महत्व और उपयोग की जानकारी दी जाएगी।
इससे बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ ही स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।जिले में 44 पीएम श्री विद्यालय हैं।
शासन की ओर से प्रत्येक विद्यालय में हर्बल एवं औषधीय उद्यान की स्थापना के लिए 30 हजार रुपये की दर से कुल 13 लाख 20 हजार रुपये का बजट जारी किया गया है। विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को उपलब्ध धनराशि से उद्यान विकसित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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उद्यान में लगाए जाने वाले पौधों के नाम भी प्रदर्शित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी उन्हें आसानी से पहचान सकें। उद्यान में विद्यार्थियों को पौधों की देखभाल और उनके उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी।
विद्यालय परिसर को स्वच्छ एवं हरित कैंपस के रूप में विकसित करने के साथ उद्यान को स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण और पर्यावरणीय शिक्षा से जोड़ा जाएगा। पर्यावरण क्लब और बाल संसद के माध्यम से विद्यार्थी उद्यान की देखभाल में भी भागीदारी करेंगे।
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स्थानीय जलवायु के अनुसार होगा पौधों का चयन
उद्यान में पौधों का चयन स्थानीय जलवायु और मिट्टी की अनुकूलता को ध्यान में रखकर किया जाएगा। औषधीय पौधों में अश्वगंधा, तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, नीम, हरड़ और आंवला लगाए जाएंगे। सुगंधित पौधों में लेमनग्रास, पुदीना, शतावरी और सिट्रोनेला के अलावा उपयोगी पौधों में गेंदा, हल्दी, अदरक और सहजन को शामिल किया जाएगा। पौधों की देखभाल और उद्यान के विकास के लिए शिक्षक कृषि एवं उद्यान विभाग से तकनीकी जानकारी प्राप्त करेंगे।
00 वर्जन
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। विद्यार्थियों में पौधों की पहचान और उनके संरक्षण की समझ विकसित होगी। इससे वे घर और आसपास पौधे लगाने के लिए भी प्रेरित होंगे। -राजीव कुमार पाठक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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इससे बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ ही स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।जिले में 44 पीएम श्री विद्यालय हैं।
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शासन की ओर से प्रत्येक विद्यालय में हर्बल एवं औषधीय उद्यान की स्थापना के लिए 30 हजार रुपये की दर से कुल 13 लाख 20 हजार रुपये का बजट जारी किया गया है। विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को उपलब्ध धनराशि से उद्यान विकसित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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उद्यान में लगाए जाने वाले पौधों के नाम भी प्रदर्शित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी उन्हें आसानी से पहचान सकें। उद्यान में विद्यार्थियों को पौधों की देखभाल और उनके उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी।
विद्यालय परिसर को स्वच्छ एवं हरित कैंपस के रूप में विकसित करने के साथ उद्यान को स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण और पर्यावरणीय शिक्षा से जोड़ा जाएगा। पर्यावरण क्लब और बाल संसद के माध्यम से विद्यार्थी उद्यान की देखभाल में भी भागीदारी करेंगे।
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स्थानीय जलवायु के अनुसार होगा पौधों का चयन
उद्यान में पौधों का चयन स्थानीय जलवायु और मिट्टी की अनुकूलता को ध्यान में रखकर किया जाएगा। औषधीय पौधों में अश्वगंधा, तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, नीम, हरड़ और आंवला लगाए जाएंगे। सुगंधित पौधों में लेमनग्रास, पुदीना, शतावरी और सिट्रोनेला के अलावा उपयोगी पौधों में गेंदा, हल्दी, अदरक और सहजन को शामिल किया जाएगा। पौधों की देखभाल और उद्यान के विकास के लिए शिक्षक कृषि एवं उद्यान विभाग से तकनीकी जानकारी प्राप्त करेंगे।
00 वर्जन
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। विद्यार्थियों में पौधों की पहचान और उनके संरक्षण की समझ विकसित होगी। इससे वे घर और आसपास पौधे लगाने के लिए भी प्रेरित होंगे। -राजीव कुमार पाठक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी