{"_id":"2acdff453c37ad12557902fc93453e21","slug":"goat-for-sale-must-butcher-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"'बकरा बिकाऊ है कसाई चाहिए'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'बकरा बिकाऊ है कसाई चाहिए'
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sun, 15 Nov 2015 11:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वेस्ली इंटर कालेज में शनिवार की शाम सूंड़ फैजाबादी स्मृति-समारोह 2015 एक शाम सुधीर कुमार अग्रवाल उर्फ मुन्ना बाबू के नाम राष्ट्रीय एकता कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से कुरीतियों पर प्रहार किया। वहीं हास्य-व्यंग रचनाओं से लोगों को खुब हंसाया।
सम्मेलन की शुरुआत वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव और नगरपालिका अध्यक्ष इंदिरा जायसवाल ने सुधीर कुमार अग्रवाल के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। लखीमपुर खीरी से आए फारुक सरल ने 'बकरा बिकाऊ है कसाई चाहिए' से दहेज लोभियों पर प्रहार किया।
बनारसी बोली के रचनाकार चपाचप बनारसी ने कविता 'लाल टमाटर देहरादून, काट राजा दूनो जून', मिर्जापुर से आई कवयित्री विभा सिंह ने 'निभाना प्यार तो सीखो, गुलाब फूलों से जो टुटकर भी जो दो दिलों को जोड़ देते हैं' ने श्रोताओं की वाह-वाही लूटी। मऊ के अजय सिंह लकालक, कानपुर के केके अग्रिहोत्री, गीतकार वैभव वर्मा, चंद्रकांत, अश्क चिरैयाकोटी, दशरथ राय रथेश, डा. शिव प्रसाद शर्मा अंबू ने रचनाएं सुनाईं। इस अवसर पर डा. अशोक सिंह, सीताराम पांडेय, एसके सत्येन, धीरज मास्टर, डा. अजीत, डा. सुरेश आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
'... नहीं विश्वास तो जाके आसाराम से पूछो' : जनकल्याण मंच ट्रस्ट के तत्वावधान में शनिवार की रात बाबा मुस ईदास स्मारक जूनियर हाईस्कूल भगवानपुर मदियापार के परिसर में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न हुआ।
शुरुआत मुख्य अतिथि डा. निरंकार सिंह और विशिष्ट अतिथि राम लखन यादव ने किया। कवयित्री सत्यमवदा शर्मा ने सरस्वती वंदना के बाद गजल 'उम्रभर के लिए मीत बन जाऊंगी, तुम बनो छंद मैं दीप बन जाऊंगी' सुनाया। कवि अंजनी कुमार शेष ने नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा 'न खाने की कस्में खाता, पर खा जाता है, पांच साल के लिए जिसे भी, पर खा जाता है' सुनाया। कार्यक्रम के संयोजक डा. राजेंद्र प्रसाद यादव ने बड़े-छोटे का अंतर बताते हुए कहा कि महानता के लिए बड़ा होना जरुरी नहीं, प्यास नदियां बुझाती हैं समुंदर खारा होता है।
वहीं, हास्य कवि लालजी देहाती ने कटाक्ष करते हुए सुनाया, 'बूढ़ों में दम नही होता है ऐसा मत कभी सोचो, नहीं विश्वास है तो जाके आसाराम से पूछो' पर लोगों ने खूब ठहाके लगाए। वहीं, बेलाल तालिब, व्यंग कवि डा. राजाराम सिंह, अजय प्रेमी, ताज आजमी, कवि बजरंग सहाय रवि, अरविंद पथिक, राम अधार व्याकुल रात भर श्रोताओं को रिझाते रहे।
विज्ञापन
सम्मेलन की शुरुआत वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव और नगरपालिका अध्यक्ष इंदिरा जायसवाल ने सुधीर कुमार अग्रवाल के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। लखीमपुर खीरी से आए फारुक सरल ने 'बकरा बिकाऊ है कसाई चाहिए' से दहेज लोभियों पर प्रहार किया।
विज्ञापन
बनारसी बोली के रचनाकार चपाचप बनारसी ने कविता 'लाल टमाटर देहरादून, काट राजा दूनो जून', मिर्जापुर से आई कवयित्री विभा सिंह ने 'निभाना प्यार तो सीखो, गुलाब फूलों से जो टुटकर भी जो दो दिलों को जोड़ देते हैं' ने श्रोताओं की वाह-वाही लूटी। मऊ के अजय सिंह लकालक, कानपुर के केके अग्रिहोत्री, गीतकार वैभव वर्मा, चंद्रकांत, अश्क चिरैयाकोटी, दशरथ राय रथेश, डा. शिव प्रसाद शर्मा अंबू ने रचनाएं सुनाईं। इस अवसर पर डा. अशोक सिंह, सीताराम पांडेय, एसके सत्येन, धीरज मास्टर, डा. अजीत, डा. सुरेश आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
'... नहीं विश्वास तो जाके आसाराम से पूछो' : जनकल्याण मंच ट्रस्ट के तत्वावधान में शनिवार की रात बाबा मुस ईदास स्मारक जूनियर हाईस्कूल भगवानपुर मदियापार के परिसर में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न हुआ।
शुरुआत मुख्य अतिथि डा. निरंकार सिंह और विशिष्ट अतिथि राम लखन यादव ने किया। कवयित्री सत्यमवदा शर्मा ने सरस्वती वंदना के बाद गजल 'उम्रभर के लिए मीत बन जाऊंगी, तुम बनो छंद मैं दीप बन जाऊंगी' सुनाया। कवि अंजनी कुमार शेष ने नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा 'न खाने की कस्में खाता, पर खा जाता है, पांच साल के लिए जिसे भी, पर खा जाता है' सुनाया। कार्यक्रम के संयोजक डा. राजेंद्र प्रसाद यादव ने बड़े-छोटे का अंतर बताते हुए कहा कि महानता के लिए बड़ा होना जरुरी नहीं, प्यास नदियां बुझाती हैं समुंदर खारा होता है।
वहीं, हास्य कवि लालजी देहाती ने कटाक्ष करते हुए सुनाया, 'बूढ़ों में दम नही होता है ऐसा मत कभी सोचो, नहीं विश्वास है तो जाके आसाराम से पूछो' पर लोगों ने खूब ठहाके लगाए। वहीं, बेलाल तालिब, व्यंग कवि डा. राजाराम सिंह, अजय प्रेमी, ताज आजमी, कवि बजरंग सहाय रवि, अरविंद पथिक, राम अधार व्याकुल रात भर श्रोताओं को रिझाते रहे।