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समाज कल्याण घोटाले के चार आरोपियों पर लगा गैंगेस्टर
ballia
Updated Tue, 07 Nov 2017 11:54 PM IST
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आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़। जिले में वर्ष 2007 से 2013 के दौरान समाज कल्याण विभाग में हुए 150 करोड़ से अधिक के घोटाले के गिरफ्तार चार आरोपियों के खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई कर दी गई है। इनमें से तीन की अभी कुछ दिन पहले ही गिरफ्तारी हुई थी। सूत्रों की माने तो प्रशासन की ओर से 18 आरोपियों पर गैंगेस्टर लगाने की तैयारी की गई है। आरोपियों को एनएसए में निरुद्ध करने की भी कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई से आरोपियों में हड़कंप मचा हुआ है।
जनपद में वर्ष 2007 से 13 के दौरान समाज कल्याण, प्रोबेशन और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में 150 करोड़ से अधिक का घोटाला हुआ था। 2.86 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिले थे। दो थानों में चार एसफआईआर दर्ज हुई थी और 34 आरोपी नामजद हुए थे। विभागीय बाबुओं की ओर से बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी खाते खुलवा कर छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के रिटर्निंग चेकों को भुनाया गया था। कुछ बाबुओं को निलंबित भी किया गया था, लेकिन बाद में ये विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से फिर से बहाल हो गए और दूसरे जिलों में तैनात भी हो गए। इस तरह से इनकी ऊपर नकेल नहीं कसी जा सकी थी। मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अमर उजाला की ओर से फिर से समाज कल्याण विभाग में हुए घोटाले की मुद्दा उठाने के बाद जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने सख्ती बरती थी और डीसीबी की मुख्य शाखा के प्रबंधक समेत सात लोगों के खिलाफ पिछले दिनों 2.86 लाख रुपये की रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद लगभग 50 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में 50 स्कूल कालेजों को भी छात्रों के सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया था।
घोटाले में अभी तक चार आरोपियों को गिरफ्तार जेल भेजा जा चुका है। इसमें प्रोबेशन विभाग में तत्कालीन बाबू सुभाषचंद्र पुत्र श्रीराम, जिला सहकारी बैंक की कप्तानगंज शाखा के तत्कालीन प्रबंधक हरीराम यादव पुत्र मुन्नर यादव और समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक संतोष कुमार श्रीवास्तव को अभी कुछ दिनों पहले ही गिरफ्तार किया गया था। एक आरोपी धर्म सिंह पुत्र शीतल बिंद को 2014-15 में ही गिरफ्तारी हुई थी। इसमें सुभाष और संतोष अभी जेल में हैं। शेष दो को जमानत मिल चुकी है। अमर उजाला की ओर से दो नवंबर के अंक में घोटाले में सम्मिलत आरोपियों पर गैंगेस्टर लगाने की तैयारी का खुलासा किया गया था। मंगलवार को उक्त चारों आरोपियों को गैंगेस्टर में निरुद्ध कर जमानत पर चल रहे आरोपियों की फिर से गिरफ्तारी की मुहीम छेड़ दी गई है।
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जनपद में वर्ष 2007 से 13 के दौरान समाज कल्याण, प्रोबेशन और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में 150 करोड़ से अधिक का घोटाला हुआ था। 2.86 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिले थे। दो थानों में चार एसफआईआर दर्ज हुई थी और 34 आरोपी नामजद हुए थे। विभागीय बाबुओं की ओर से बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी खाते खुलवा कर छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के रिटर्निंग चेकों को भुनाया गया था। कुछ बाबुओं को निलंबित भी किया गया था, लेकिन बाद में ये विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से फिर से बहाल हो गए और दूसरे जिलों में तैनात भी हो गए। इस तरह से इनकी ऊपर नकेल नहीं कसी जा सकी थी। मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अमर उजाला की ओर से फिर से समाज कल्याण विभाग में हुए घोटाले की मुद्दा उठाने के बाद जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने सख्ती बरती थी और डीसीबी की मुख्य शाखा के प्रबंधक समेत सात लोगों के खिलाफ पिछले दिनों 2.86 लाख रुपये की रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद लगभग 50 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में 50 स्कूल कालेजों को भी छात्रों के सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया था।
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घोटाले में अभी तक चार आरोपियों को गिरफ्तार जेल भेजा जा चुका है। इसमें प्रोबेशन विभाग में तत्कालीन बाबू सुभाषचंद्र पुत्र श्रीराम, जिला सहकारी बैंक की कप्तानगंज शाखा के तत्कालीन प्रबंधक हरीराम यादव पुत्र मुन्नर यादव और समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक संतोष कुमार श्रीवास्तव को अभी कुछ दिनों पहले ही गिरफ्तार किया गया था। एक आरोपी धर्म सिंह पुत्र शीतल बिंद को 2014-15 में ही गिरफ्तारी हुई थी। इसमें सुभाष और संतोष अभी जेल में हैं। शेष दो को जमानत मिल चुकी है। अमर उजाला की ओर से दो नवंबर के अंक में घोटाले में सम्मिलत आरोपियों पर गैंगेस्टर लगाने की तैयारी का खुलासा किया गया था। मंगलवार को उक्त चारों आरोपियों को गैंगेस्टर में निरुद्ध कर जमानत पर चल रहे आरोपियों की फिर से गिरफ्तारी की मुहीम छेड़ दी गई है।
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