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पूर्व विधायक के पौत्र बन शिक्षक बने
आजमगढ़/ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Wed, 06 Sep 2017 12:09 AM IST
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Fraud shimla
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आजमगढ़। कमिश्नर के आदेश पर हो रही 15 हजार और 16448 शिक्षकों की जांच में रवि राय पुत्र अखिलेश कुमार राय की ओर से लगाया गया स्वतंत्रता सेनानी आश्रित का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है। शासन के निर्देशानुसार स्वतंत्रता सेनानी के पौत्र तक को लाभ मिलता है।
जबकि यहां फर्जीवाड़ा कर प्रपौत्र की ओर से प्रमाण पत्र लगा दिया गया था। कमिश्नर और जिलाधिकारी ने मामले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
रवि राय पूर्व विधायक एवं स्वतंत्रता सेनानी स्व. मुक्तिनाथ राय के प्रपौत्र हैं। जुलाई में भाजपा नेता सहजानंद राय की शिकायत पर 15 हजार और 16448 शिक्षकों की भर्ती की जांच शुरू की गई थी। जांच में दोनों भर्ती प्रक्रिया करीब 100 से ज्यादा शिक्षक ऐसे चिह्नित हुए, जिनके अंक और प्रमाण-पत्र संदिग्ध मिले हैं।
इन प्रमाण-पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। अभी कुछ दिन पहले ही पांच शिक्षकों शिवमुनि यादव पुत्री बसंत यादव, यादव उषा पुत्री राम निवास, प्रभाकर मिश्रा पुत्र श्रीनाथ मिश्रा, छोटेलाल यादव पुत्र बाल किरण, रमेश पुत्र मिट्ठू यादव के अकंपत्र फर्जी मिलने पर खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई थी।
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अब फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित के प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी पाने का मामला सामने आया है। रवि राय पुत्र अखिलेश राय की ओर से लगाए प्रमाण पत्र के अनुसार वो पूर्व विधायक एवं स्वतंत्रता सेनानी स्व. मुक्तिनाथ यादव के पौत्र हैं। जांच अधिकारी सुनील सिंह ने प्रमाण पत्र का कुटुंब रजिस्टर से मिलान कराया तो पता चला कि ये उनके परदादा थे।
प्रमाण पत्र 26 मार्च 1996 का निर्गत था। एडीएम वित्त एवं राजस्व ओपीएन सिंह के हस्ताक्षर से जारी किया गया था। जांच में पता चला कि उनका 1992 में ही स्थानांतरण हो गया था। प्रमाण पत्र के फर्जी होने की पुष्टी एडीएम कार्यालय से भी की गई है। मामले में जांच आधिकारी की ओर से जिलाधिकारी से रवि राय की नियुक्ति निरस्त करने की सिफारिश की थी।
जांच अधिकारी सुनील सिंह ने बताया कि रवि राय के एक महिला रिश्तेदार की नियुक्ति भी संदिग्ध पाई गई है। इस संबंध में जिलाधिकारी को अवगत करा दिया गया है। निर्देश मिलने पर उस मामले की भी जांच की जाएगी।
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जबकि यहां फर्जीवाड़ा कर प्रपौत्र की ओर से प्रमाण पत्र लगा दिया गया था। कमिश्नर और जिलाधिकारी ने मामले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
रवि राय पूर्व विधायक एवं स्वतंत्रता सेनानी स्व. मुक्तिनाथ राय के प्रपौत्र हैं। जुलाई में भाजपा नेता सहजानंद राय की शिकायत पर 15 हजार और 16448 शिक्षकों की भर्ती की जांच शुरू की गई थी। जांच में दोनों भर्ती प्रक्रिया करीब 100 से ज्यादा शिक्षक ऐसे चिह्नित हुए, जिनके अंक और प्रमाण-पत्र संदिग्ध मिले हैं।
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इन प्रमाण-पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। अभी कुछ दिन पहले ही पांच शिक्षकों शिवमुनि यादव पुत्री बसंत यादव, यादव उषा पुत्री राम निवास, प्रभाकर मिश्रा पुत्र श्रीनाथ मिश्रा, छोटेलाल यादव पुत्र बाल किरण, रमेश पुत्र मिट्ठू यादव के अकंपत्र फर्जी मिलने पर खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई थी।
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अब फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित के प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी पाने का मामला सामने आया है। रवि राय पुत्र अखिलेश राय की ओर से लगाए प्रमाण पत्र के अनुसार वो पूर्व विधायक एवं स्वतंत्रता सेनानी स्व. मुक्तिनाथ यादव के पौत्र हैं। जांच अधिकारी सुनील सिंह ने प्रमाण पत्र का कुटुंब रजिस्टर से मिलान कराया तो पता चला कि ये उनके परदादा थे।
प्रमाण पत्र 26 मार्च 1996 का निर्गत था। एडीएम वित्त एवं राजस्व ओपीएन सिंह के हस्ताक्षर से जारी किया गया था। जांच में पता चला कि उनका 1992 में ही स्थानांतरण हो गया था। प्रमाण पत्र के फर्जी होने की पुष्टी एडीएम कार्यालय से भी की गई है। मामले में जांच आधिकारी की ओर से जिलाधिकारी से रवि राय की नियुक्ति निरस्त करने की सिफारिश की थी।
जांच अधिकारी सुनील सिंह ने बताया कि रवि राय के एक महिला रिश्तेदार की नियुक्ति भी संदिग्ध पाई गई है। इस संबंध में जिलाधिकारी को अवगत करा दिया गया है। निर्देश मिलने पर उस मामले की भी जांच की जाएगी।