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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   For the first time in four decades, there was no flood in Devara. Farmers will face delay in sowing Rabi crops

Azamgarh News: चार दशक में पहली बार देवारा में नहीं आई बाढ़, किसानों को रबी फसलों की बोआई में होगी देरी

Wed, 18 Oct 2023 11:50 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 18 Oct 2023 11:50 PM IST
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For the first time in four decades, there was no flood in Devara.

Farmers will face delay in sowing Rabi crops
देवारा क्षेत्र में घाघरा नदी से आने वाली बाढ़ से जन धन के साथ ही फसलें भी प्रभावित होती हैं। चार दशक में देवारावासियों के लिए बीता मानसून ऐसा रहा जब पहले जैसी बाढ़ नहीं आई। जिससे इस बार किसानों को गेहूं की बोआई में विलंब होगा। वहीं बारिश न होने से गन्ने की फसल को फायदा पहुंचेगा।
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जनपद के उत्तर महुला गढ़वल बांध लगभग 43 किलोमीटर लंबा है। बंधे के उत्तर घाघरा नदी और दक्षिण में हरैया, अजमतगढ़ व महाराजगंज ब्लाक के गांवों की एक लाख से अधिक की आबादी निवास करती है। यहां 76000 हेक्टेयर का क्षेत्रफल है। घाघरा की बाढ़ से करीब दो महीने तक पूरा क्षेत्र प्रभावित रहता है। 1980 के बाद 2023 में घाघरा में बाढ़ नहीं आई। बाढ़ न आने के कारण देवारावासियों ने इस बार राहत की सांस ली है। हालांकि बारिश न होने के कारण उन्हें गेहूं की बोआई में थोड़ा विलंब हो सकता है। क्योंकि उन्हें खेतों में पानी भरकर उसकी नमी को लाना होगा। वहीं घाघरा की बाढ़ से किसानों की गन्ने की फसल को सबसे अधिक नुकसान होता था। छोटा गन्ना घाघरा के पानी में डूबकर बर्बाद हो जाता था। लेकिन इस बार गन्ने की फसल में इजाफा होगा क्योंकि उसमें पानी नहीं लगा। क्षेत्र में सबसे ज्यादा गन्ने की खेती इस्माइलपुर, अजगरा,सहदेवगंज, उल्टहवा,चपरी, नैनीजोर होती है।
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घाघरा की कटान से बचे ग्रामीण
लाटघाट। घाघरा नदी का जलस्तर जब बढ़ता था तो यह तटवर्ती गांवों के किसानों की खेती योग्य भूमि को काटती थी। इस बार बाढ़ न आने से किसानों की भूमि कटने से बच गई। हालांकि नदी के जलस्तर में बढ़ाव घटाव के दौरान नदी ने कुछ कटान जरूर की लेकिन यह कटान नाममात्र की रही। जिससे किसान थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं।
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नहीं छोड़ना पड़ा गांव, नहीं आई बाढ़
लाटघाट। घाघरा नदी का जलस्तर जब बढ़ता है तो यह लगभग 50 से अधिक गांव प्रभावित हो जाते हैं। जिसके कारण यहां रहने वालों को सुरक्षित स्थान जाना पड़ता है। लोग महीनों अपने नात-रिश्तेदारों के यहां शरण लेते हैं। लेकिन इस बार बाढ़ न आने से किसानों ने राहत महसूस की है।
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बोले किसान
- देवाराखास गांव के छेदी यादव ने कहा कि हमारे देखने में अभी तक ऐसा नहीं हुआ कि बाढ़ न आई हो। लेकिन इस बार बाढ़ न आने से हमें काफी राहत मिली है। दर्जनों लोगों के आशियाने कटान के मुहाने पर खड़े थे। जो कटने से बच गए।

- अजगरा मंगरवी गांव के रामप्रसाद यादव ने कहा कि 1980 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि बाढ़ नहीं है। जिससे हर बार उजड़ने वाला हमारा गांव बच गया। देवारा क्षेत्र में प्रतिवर्ष सैकड़ों बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ जाती थी लेकिन इस बार वह बच गई।
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