आजमगढ़। जिले में विकास को रफ्तार देने के लिए कई परियोजना संचालित हो रही है। जिनमे कई ऐसी हैं जो शत प्रतिशत पूरी भी हो गई हैं, लेकिन अभी तक कई संसाधनों जैसे मैनपॉवर, उपकरण व फर्नीचर के अभाव में क्रियाशील नहीं हो सकी हैं। ऐसी परियोजना को फिर पूर्ण करने के लिए एक बार फिर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इसे पूरा हो जाएगा जनपद को विकास की रफ्तार देने के लिए शासन ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य शुरू किया। इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए करोड़ों रुपये भी खर्च किए गए लेकिन आज तक यह क्रियाशील नहीं हो पाए। जिले में ऐसी कुल पांच परियोजनाएं शामिल है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की दो, वन विभाग की एक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की एक व पशुपालन विभाग की एक परियोजना शामिल है। शासन ने मंडल स्तर पर पशुपालकों को बहुउद्देशीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पशु चिकित्सा पाली क्लीनिक की स्थापना की जा रही है। सिधारी पर 2016-17 से आठ करोड़, 31 लाख रुपये से परियोजना का निर्माण पूरा कर लिया गया है। पशु पालन विभाग मानव संसाधन, उपकरण, फर्नीचार के अभाव के कारण इसे अभी तक क्रियाशील नहीं कर पाया। यही हाल वन विभाग की परियोजना का भी है। कंधरापुर क्षेत्र स्थित सेहदा जंगल में वन विश्राम गृह सारस का निर्माण 4.99 करोड़ रुपये की लागत किया गया है। यह मार्च 2019 में ही जनता को समर्पित कर दिया गया। इसमें भी मानव संसाधन, उपकरण व फर्नीचर का अभाव है। जिससे यह हमेशा बंद पड़ा रहता है। वहीं चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 100 बेड का चिकित्सालय का विस्तार किया गया है। जिसमें चिकित्सालय को क्रियाशील करने के लिए पदो के सृजन व फर्नीचर आदि की आवश्यकता है। हालांकि स्थानीय व्यवस्था पर चिकित्सालय में कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इसी प्रकार विभाग द्वारा 30 बेड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छॉऊ को कियाशील करने के लिए पदो के सृजन व फर्नीचर एवं उपकरण आदि की आवश्यकता है। ऐसा ही दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय आजमगढ़ का निर्माण कराया गया है। जिसमे प्रधानाचार्य, अधीक्षक, वार्डेन, अध्यापक तथा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति एवं कर्मचारी आवास नहीं बने होने के कारण अक्रियाशील है। इस मामले में अर्थ एवं संख्या अधिकारी आरडी राम ने बताया कि चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, वन विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग व पशु पालन विभाग की कुल पांच परियोजना पूरी हो चुकी है। परियोजनाएं पूर्ण तो हो चुकी लेकिन मानव संसाधन, उपकरण, फर्नीचर के अभाव में क्रियाशील नहीं हो पा रही है। इसकेलिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है।