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Azamgarh News: पैतृक जमीन का फर्जी बैनामा कराने के आरोप में तत्कालीन रजिस्ट्रार समेत सात पर प्राथमिकी दर्ज
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पैतृक जमीन का फर्जी बैनामा कराने के आरोप में अतरौलिया पुलिस ने तत्कालीन रजिस्ट्रार बूढ़नपुर समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में संजय सिंह, शीला सिंह, प्रेमा देवी, अमित कुमार सिंह और रामसूरत यादव को नामजद किया गया है और तत्कालीन रजिस्ट्रार तहसील बूढ़नपुर और अन्य अज्ञात कर्मचारी को भी आरोपी बनाया गया है।
मादेपुर निवासी गोविंद गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उसके स्थान पर फर्जी व्यक्ति को खड़ा कर उसकी पैतृक जमीन का बैनामा कराया गया और बाद में दाखिल-खारिज भी करा लिया गया।
गोविंद गुप्ता ने 29 सितंबर को अतरौलिया थाने में दी तहरीर में बताया कि हंसेपुर सनूप निवासी संजय सिंह ने साजिश के तहत उसकी पड़ोसन प्रेमा देवी के माध्यम से उसकी पत्नी से पासबुक, पैनकार्ड और आधार कार्ड मंगवाए। उस समय गोविंद मुंबई में था।
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पत्नी ने फोन पर जानकारी दी तो उसने मानवीय आधार पर दस्तावेज देने की अनुमति दी थी। आरोप है कि इसके बाद पत्नी के खाते में भेजी गई धनराशि में से तीन बार 49-49 हजार रुपये और दो लाख रुपये प्रेमा देवी ने अपने पुत्र राज गौड़ और जगदीश गुप्ता के खातों में गूगल-पे के माध्यम से ट्रांसफर करा लिए।
कुछ महीने बाद गोविंद को जानकारी हुई कि उसके हिस्से की पैतृक जमीन 0.417 हेक्टेयर का बैनामा शीला सिंह पत्नी अशोक कुमार सिंह के नाम हो गया है। आरोप लगाया कि शीला सिंह संजय सिंह के छोटे भाई की पत्नी हैं।
गोविंद का आरोप है कि 18 जुलाई 2026 को बूढ़नपुर तहसील पहुंचकर जमीन से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां निकलवाईं तो बैनामे की जानकारी हुई। बैनामे में अमित कुमार सिंह और रामसूरत यादव को गवाह बनाए जाने का उल्लेख है।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि फर्जी बैनामे की प्रक्रिया में तत्कालीन रजिस्ट्रार बूढ़नपुर और अन्य कर्मचारियों की भी मिलीभगत रही। गोविंद का कहना है कि उसने 18 जुलाई को ही पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई।
इसके बाद वह लगातार थाने का चक्कर लगाता रहा और 29 सितंबर को दोबारा तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर संजय सिंह, शीला सिंह, प्रेमा देवी, अमित कुमार सिंह, रामसूरत यादव, तत्कालीन रजिस्ट्रार तहसील बूढ़नपुर और अन्य अज्ञात कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
पुलिस बैनामे से संबंधित अभिलेख, गवाहों और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों और संबंधित लोगों की भूमिका की स्थिति स्पष्ट होगी।
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स्टिंग में रजिस्ट्रार कार्यालयों में भ्रष्टाचार को किया था उजागर
रजिस्ट्रार कार्यालयों में बैनामा और जमीन संबंधी कामकाज के नाम पर भ्रष्टाचार को लेकर अमर उजाला ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए कई मामलों को उजागर किया था। स्टिंग में कार्यालयों की कार्यप्रणाली और अवैध वसूली से जुड़े मामले सामने आए थे। इसके बावजूद रजिस्ट्रार कार्यालयों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब अतरौलिया में पैतृक जमीन का फर्जी बैनामा कराने के आरोप में तत्कालीन रजिस्ट्रार समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एक बार फिर रजिस्ट्रार कार्यालयों की कार्यप्रणाली चर्चा में है।
-- वर्जन
अतरौलिया थाने में पैतृक जमीन का फर्जी बैनामा कराने का मामला सामने आया था। तहरीर मिलने पर तत्कालीन रजिस्ट्रार बूढ़नपुर समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में तथ्य सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - चिराग जैन, एसपी ग्रामीण आजमगढ़।
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मादेपुर निवासी गोविंद गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उसके स्थान पर फर्जी व्यक्ति को खड़ा कर उसकी पैतृक जमीन का बैनामा कराया गया और बाद में दाखिल-खारिज भी करा लिया गया।
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गोविंद गुप्ता ने 29 सितंबर को अतरौलिया थाने में दी तहरीर में बताया कि हंसेपुर सनूप निवासी संजय सिंह ने साजिश के तहत उसकी पड़ोसन प्रेमा देवी के माध्यम से उसकी पत्नी से पासबुक, पैनकार्ड और आधार कार्ड मंगवाए। उस समय गोविंद मुंबई में था।
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पत्नी ने फोन पर जानकारी दी तो उसने मानवीय आधार पर दस्तावेज देने की अनुमति दी थी। आरोप है कि इसके बाद पत्नी के खाते में भेजी गई धनराशि में से तीन बार 49-49 हजार रुपये और दो लाख रुपये प्रेमा देवी ने अपने पुत्र राज गौड़ और जगदीश गुप्ता के खातों में गूगल-पे के माध्यम से ट्रांसफर करा लिए।
कुछ महीने बाद गोविंद को जानकारी हुई कि उसके हिस्से की पैतृक जमीन 0.417 हेक्टेयर का बैनामा शीला सिंह पत्नी अशोक कुमार सिंह के नाम हो गया है। आरोप लगाया कि शीला सिंह संजय सिंह के छोटे भाई की पत्नी हैं।
गोविंद का आरोप है कि 18 जुलाई 2026 को बूढ़नपुर तहसील पहुंचकर जमीन से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां निकलवाईं तो बैनामे की जानकारी हुई। बैनामे में अमित कुमार सिंह और रामसूरत यादव को गवाह बनाए जाने का उल्लेख है।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि फर्जी बैनामे की प्रक्रिया में तत्कालीन रजिस्ट्रार बूढ़नपुर और अन्य कर्मचारियों की भी मिलीभगत रही। गोविंद का कहना है कि उसने 18 जुलाई को ही पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई।
इसके बाद वह लगातार थाने का चक्कर लगाता रहा और 29 सितंबर को दोबारा तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर संजय सिंह, शीला सिंह, प्रेमा देवी, अमित कुमार सिंह, रामसूरत यादव, तत्कालीन रजिस्ट्रार तहसील बूढ़नपुर और अन्य अज्ञात कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
पुलिस बैनामे से संबंधित अभिलेख, गवाहों और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों और संबंधित लोगों की भूमिका की स्थिति स्पष्ट होगी।
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स्टिंग में रजिस्ट्रार कार्यालयों में भ्रष्टाचार को किया था उजागर
रजिस्ट्रार कार्यालयों में बैनामा और जमीन संबंधी कामकाज के नाम पर भ्रष्टाचार को लेकर अमर उजाला ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए कई मामलों को उजागर किया था। स्टिंग में कार्यालयों की कार्यप्रणाली और अवैध वसूली से जुड़े मामले सामने आए थे। इसके बावजूद रजिस्ट्रार कार्यालयों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब अतरौलिया में पैतृक जमीन का फर्जी बैनामा कराने के आरोप में तत्कालीन रजिस्ट्रार समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एक बार फिर रजिस्ट्रार कार्यालयों की कार्यप्रणाली चर्चा में है।
अतरौलिया थाने में पैतृक जमीन का फर्जी बैनामा कराने का मामला सामने आया था। तहरीर मिलने पर तत्कालीन रजिस्ट्रार बूढ़नपुर समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में तथ्य सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - चिराग जैन, एसपी ग्रामीण आजमगढ़।