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किसानों के माथे पर खिंची चिंता की लकीरें
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 16 Mar 2015 12:01 AM IST
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रविवार को बेमौसम शुरू हुई बरसात ने जहां किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है, वहीं शहर की सड़कें कीचड़ से सराबोर हो गईं। इस बारिश से किसानों को अपनी फसल के बरबाद होने की आशंका सता सता रही है।
हालांकि, अभी बारिश इतनी तेज नहीं हुई है कि इससे कोई नुकसान हो लेकिन जिन किसानों ने सरसों आदि फसलों को काटकर खलिहानों में रखा है उन्हें उसके खराब होने का डर सता रहा है।
इसके साथ जिन किसानों की आलू की फसल अभी खेतों में है, वह उसके सड़ने की आशंका में डरे हुए हैं। वहीं, शहर की सड़कें भी हलकी बारिश से कीचड़ से भर गई हैं। चूंकि नगर क्षेत्र में इन दिनों केबिल डालने के लिए शहर के कई मुहल्लों में सड़क के किनारे नाली खोदी गई है।
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खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी को सड़क किनारे रखा गया है, जो बारिश होने से कीचड़ में तब्दील हो गई है। सबसे बुरा हाल मुकेरीगंज से बिलरियागंज जाने वाले मार्ग का है। इस मार्ग पर बने कीचड़ से लोगों का पैदल चलना दूभर हो गया है। रविवार को जनपद में हल्की लेकिन रुक-रुककर कई बार बारिश हुई। वहीं बारिश के साथ चलने वाली हवा ने लोगों को ठंड का एहसास करा दिया।
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हालांकि, अभी बारिश इतनी तेज नहीं हुई है कि इससे कोई नुकसान हो लेकिन जिन किसानों ने सरसों आदि फसलों को काटकर खलिहानों में रखा है उन्हें उसके खराब होने का डर सता रहा है।
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इसके साथ जिन किसानों की आलू की फसल अभी खेतों में है, वह उसके सड़ने की आशंका में डरे हुए हैं। वहीं, शहर की सड़कें भी हलकी बारिश से कीचड़ से भर गई हैं। चूंकि नगर क्षेत्र में इन दिनों केबिल डालने के लिए शहर के कई मुहल्लों में सड़क के किनारे नाली खोदी गई है।
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खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी को सड़क किनारे रखा गया है, जो बारिश होने से कीचड़ में तब्दील हो गई है। सबसे बुरा हाल मुकेरीगंज से बिलरियागंज जाने वाले मार्ग का है। इस मार्ग पर बने कीचड़ से लोगों का पैदल चलना दूभर हो गया है। रविवार को जनपद में हल्की लेकिन रुक-रुककर कई बार बारिश हुई। वहीं बारिश के साथ चलने वाली हवा ने लोगों को ठंड का एहसास करा दिया।