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तमसा की जमीन पर हुए कब्जे की जांच का बढ़ा दायरा
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Thu, 18 Jan 2018 11:53 PM IST
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कोल घाट सिविल लाइन क्षेत्र
- फोटो : अमर उजाला
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तमसा नदी के पुराने रास्ते की जमीन पर हुए कब्जे के मामले में जिलाधिकारी ने इसकी जांच का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। मामले की जांच उन्होंने एसओसी श्रीप्रकाश राय को सौंपी है।
एसओसी को निर्धारित तारीख से पूर्व जांच आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अब नदी के रास्ते की शुरुआत से अंत तक कब्जों की जांच होगी।
अभी तक सिर्फ 20-25 कब्जों का मामला ही संज्ञान में था, जिसका रकबा दो बीघे के आसपास था। अब जांच के दायरे में दो सौ से ज्यादा कब्जों के आने की बात कही जा रही है।
तमसा आज जिस राह पर है पहले वह दूसरी थी। नदी शहर से सटे गुरुघाट और रामघाट से होकर बहती थी। समय के साथ नदी ने नया रास्ता बना लिया और पुराने रास्ते को छोड़कर लगभग एक किमी दूर नए रास्ते से बहने लगी।
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जिसके कारण नदी का पुराना रास्ता वीरान हो गया। इस रास्ते से नाले के रूप में शहर का गंदा पानी तमसा में प्रवाहित होने लगा। शहर बसता गया और यह जगह शहर के बीच आ गई। इस जमीन पर भूमाफियाओं की नजर इस पर पड़ी और उन्होंने प्लाटिंग कराकर इसकी बिक्री करना शुरू कर दिया।
बहुत से लोगों ने उसी तरह से जमीन पर कब्जा कर लिया। इन लोगों द्वारा अभिलेखों में हेराफेरी कर नदी की जमीन पर अपना नाम भी चढ़वा लिया गया। इस बीच किसी ने उक्त कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन से कर दी। अभी नदी की लगभग दो से ढाई बीघे जमीन पर 20 से 25 लोगों के कब्जे का मामला संज्ञान में है।
जमीन पर हुई फर्जी इंट्री को निरस्त कराने के लिए मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंच गया। अब डीएम ने नदी की पूरी जमीन की जांच का आदेश दि या है। साथ ही मामले में अगली तारीख का निर्धारण कर दिया है और एसओसी को उक्त तिथि के पूर्व जांच आख्या उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर हो रही इस जांच में दो सौ से अधिक अवैध कब्जे होने का मामला प्रकाश में आने की संभावना जताई जा रही है।
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एसओसी को निर्धारित तारीख से पूर्व जांच आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अब नदी के रास्ते की शुरुआत से अंत तक कब्जों की जांच होगी।
अभी तक सिर्फ 20-25 कब्जों का मामला ही संज्ञान में था, जिसका रकबा दो बीघे के आसपास था। अब जांच के दायरे में दो सौ से ज्यादा कब्जों के आने की बात कही जा रही है।
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तमसा आज जिस राह पर है पहले वह दूसरी थी। नदी शहर से सटे गुरुघाट और रामघाट से होकर बहती थी। समय के साथ नदी ने नया रास्ता बना लिया और पुराने रास्ते को छोड़कर लगभग एक किमी दूर नए रास्ते से बहने लगी।
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जिसके कारण नदी का पुराना रास्ता वीरान हो गया। इस रास्ते से नाले के रूप में शहर का गंदा पानी तमसा में प्रवाहित होने लगा। शहर बसता गया और यह जगह शहर के बीच आ गई। इस जमीन पर भूमाफियाओं की नजर इस पर पड़ी और उन्होंने प्लाटिंग कराकर इसकी बिक्री करना शुरू कर दिया।
बहुत से लोगों ने उसी तरह से जमीन पर कब्जा कर लिया। इन लोगों द्वारा अभिलेखों में हेराफेरी कर नदी की जमीन पर अपना नाम भी चढ़वा लिया गया। इस बीच किसी ने उक्त कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन से कर दी। अभी नदी की लगभग दो से ढाई बीघे जमीन पर 20 से 25 लोगों के कब्जे का मामला संज्ञान में है।
जमीन पर हुई फर्जी इंट्री को निरस्त कराने के लिए मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंच गया। अब डीएम ने नदी की पूरी जमीन की जांच का आदेश दि या है। साथ ही मामले में अगली तारीख का निर्धारण कर दिया है और एसओसी को उक्त तिथि के पूर्व जांच आख्या उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर हो रही इस जांच में दो सौ से अधिक अवैध कब्जे होने का मामला प्रकाश में आने की संभावना जताई जा रही है।