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सगड़ी में वंदना सिंह को छोड़कर आधी आबादी को नहीं मिला प्रतिनिधित्व का मौका

Tue, 25 Jan 2022 11:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jan 2022 11:33 PM IST
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Except Vandana Singh, half the population did not get the chance of representation in Sagadi
आजमगढ़। विधानसभा चुनाव आते ही राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की बात तेज हो गई है। मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिले के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्र सगड़ी में सिर्फ एक बार महिला को विधायक बनने का मौका मिला। ं।
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आजमगढ़ जिले की सगड़ी विधानसभा से सबसे पहले 1952 में सोशलिस्ट पार्टी के स्वामी सत्यानंद ने चुनाव जीता था। वहीं उसके बाद 1953 में सोशलिस्ट पार्टी के विश्राम राय ने चुनाव जीता। 1957 में इंद्र भूषण गुप्ता निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते और पहली बार 1962 में कांग्रेस ने इंद्रासन सिंह के रूप में सगड़ी से चुनाव जीता था। 1967 में मुंशी नर्वदेश्वर लाल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते इसके बाद 1969 में रामकुमार सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। 1974 में राम सुंदर पांडेय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते और 1977 में रामजन्म यादव जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। सर्वेश सिंह सीपू की हत्या के कारण 2017 के विधानसभा चुनाव में सर्वेश सिंह सीपू की पत्नी वंदना सिंह बसपा के टिकट से चुनाव जीत कर विधायक बनीं। उन्होंने बसपा से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है।
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1989 के बाद कांग्रेस नहीं जीत पाई
आजमगढ़। 1980 में पंचानन राय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते और 1985 में रामजन्म यादव फिर से दलित मजदूर किसान पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। 1989 में कांग्रेस सगड़ी सीट पर आखरी बार पंचानन राय के रूप में चुनाव जीती इसके बाद आज तक इस सीट से कांग्रेस पार्टी चुनाव नहीं जीत पाई।1991 में बसपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे बरखुराम वर्मा चुनाव जीते। 1993 में बसपा के टिकट पर फिर से बरखुराम वर्मा विधायक चुने गए जो उत्तर विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे। 1996 में रामप्यारे सिंह सपा के टिकट पर सगड़ी से विधायक बने और मुलायम सिंह यादव के मंत्रिमंडल में मंत्री भी रहे। 2002 में फिर बसपा ने यहां से जीत हासिल की और बसपा के टिकट पर मलिक मसूद चुनाव जीते। 2007 में सपा के टिकट पर रामप्यारे सिंह के पुत्र सर्वेश सिंह सीपू विधायक बने और 2012 में अभय नारायण पटेल सपा के टिकट पर सगड़ी से विधायक बने।
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कांग्रेस ने राना खातून को दिया टिकट
आजमगढ़। विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कांग्रेस ने राना खातून को प्रत्याशी बनाया है। राना खातून सदर विधानसभा क्षेत्र के सदावर्ती मोहल्ले की रहने वाली हैं। वे राजनीति के साथ-साथ अध्यापन कार्य से जुड़ी रही हैं। 1982 से लेकर 1996 तक मऊ नगर पालिका परिषद की चेयरमैन रही हैं। वे मऊ की घोसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। इस समय वे जिला कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष हैं।
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