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Azamgarh News: 30% बढ़ी बिजली की मांग, रोस्टिंग के नाम पर कटौती
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आजमगढ़। जैसे-जैसे पारा ऊपर चढ़ रहा है, बिजली की खपत भी बढ़ रही है। ट्रांसफॉर्मरों पर लोड बढ़ने से कटौती की जा रही है। वहीं, जिम्मेदार रोस्टिंग की बात कह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। अप्रैल में 30 फीसदी अधिक बिजली की मांग बढ़ी है। लो वोल्टेज की भी समस्या बनी हुई है।
जिले में 6.90 लाख उपभोक्ताओं को छह वितरण खंडों के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जाती है। तापमान बढ़ने के साथ ही घरों, कार्यालयों, दुकानों में पंखा, कूलर, एसी, फ्रिज चलने लगे हैं। इससे ट्रांसफॉर्मर भी ओवरलोड होने लगे हैं।
ओवरलोडिंग से ट्रांसफॉर्मर जले न इसके लिए बिजली काट दी जा रही है। मार्च में जनपद में 375 से 385 मेगावाट के आसपास बिजली की खपत होती थी। अप्रैल में 15 से 20 दिनों के बीच 450 मेगावाट तक पहुंच गई है। इससे अब बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थित बहुत खराब है। लोगों को 18 में से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
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शहरी क्षेत्र का भी यही हाल है, यहां उपभोक्ताओं को 16 से 17 ही घंटे बिजली मिल पा रही है। विभाग के जिम्मेदारी रोस्टिंग होने की बात कह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। इसके अलावा मेंटनेंस के नाम पर की कटौती है।
ट्रांसमिशन के अधिशासी अभियंता नवीन चंद्रा ने बताया कि मार्च की तुलना में अप्रैल में 30 फीसदी की मांग बढ़ी है। इस समय प्रतिदिन 450 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। अहरौला क्षेत्र में रेहड़ा व गोपालगंज भेदौरा सब स्टेशन से बिजली की आपूर्ति होती है। सब स्टेशन रेड़हा की क्षमता वृद्धि होने के बाद भी लोग लो वोल्टेज व कटौती से परेशान हैं। लोगों को घंटे बिजली मिल रही है। बरदह में दिन तो दिन रात में भी बिजली की कटौती की जा रही है। लोगों को करवट बदलकर रात बीतना पड़ रहा है। दिन में कटौती होने से दुकानदारी प्रभावित हो रही है। उपकेंद्र बरदह के ट्रांसफॉर्मर से तेल का रिसाव हो रहा है। इसको अभी तक बनाया नहीं जा सका है।
निर्बाध बिजली आपूर्ति का दावा फेल मेंहनगर में 18 घंटे बिजली देने का निगम का दावा पूरी तरह से फेल है। विद्युत उपकेंद्र मेंहनगर ग्रामीण और शहरी से छह फीडरों पर 70 से अधिक गांव आते हैं। शासन ने कस्बे में 22 और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति करने का निर्देश दिया है।
तापमान बढ़ने से विद्युत आपूर्ति की आंख मिचौली शुरू हो गई है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में 12 तो कस्बे में 16 से 17 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
जर्जर तारों से फॉल्ट भी बिजली आपूर्ति में बाधा बन रहे हैं। एसडीओ सत्य कुमार ने बताया कि शेड्यूल के अनुसार ही बिजली आपूर्ति करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ तकनीकी फॉल्ट के कारण आपूर्ति बाधित होती है।
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जिले में 6.90 लाख उपभोक्ताओं को छह वितरण खंडों के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जाती है। तापमान बढ़ने के साथ ही घरों, कार्यालयों, दुकानों में पंखा, कूलर, एसी, फ्रिज चलने लगे हैं। इससे ट्रांसफॉर्मर भी ओवरलोड होने लगे हैं।
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ओवरलोडिंग से ट्रांसफॉर्मर जले न इसके लिए बिजली काट दी जा रही है। मार्च में जनपद में 375 से 385 मेगावाट के आसपास बिजली की खपत होती थी। अप्रैल में 15 से 20 दिनों के बीच 450 मेगावाट तक पहुंच गई है। इससे अब बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थित बहुत खराब है। लोगों को 18 में से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
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शहरी क्षेत्र का भी यही हाल है, यहां उपभोक्ताओं को 16 से 17 ही घंटे बिजली मिल पा रही है। विभाग के जिम्मेदारी रोस्टिंग होने की बात कह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। इसके अलावा मेंटनेंस के नाम पर की कटौती है।
ट्रांसमिशन के अधिशासी अभियंता नवीन चंद्रा ने बताया कि मार्च की तुलना में अप्रैल में 30 फीसदी की मांग बढ़ी है। इस समय प्रतिदिन 450 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। अहरौला क्षेत्र में रेहड़ा व गोपालगंज भेदौरा सब स्टेशन से बिजली की आपूर्ति होती है। सब स्टेशन रेड़हा की क्षमता वृद्धि होने के बाद भी लोग लो वोल्टेज व कटौती से परेशान हैं। लोगों को घंटे बिजली मिल रही है। बरदह में दिन तो दिन रात में भी बिजली की कटौती की जा रही है। लोगों को करवट बदलकर रात बीतना पड़ रहा है। दिन में कटौती होने से दुकानदारी प्रभावित हो रही है। उपकेंद्र बरदह के ट्रांसफॉर्मर से तेल का रिसाव हो रहा है। इसको अभी तक बनाया नहीं जा सका है।
निर्बाध बिजली आपूर्ति का दावा फेल मेंहनगर में 18 घंटे बिजली देने का निगम का दावा पूरी तरह से फेल है। विद्युत उपकेंद्र मेंहनगर ग्रामीण और शहरी से छह फीडरों पर 70 से अधिक गांव आते हैं। शासन ने कस्बे में 22 और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति करने का निर्देश दिया है।
तापमान बढ़ने से विद्युत आपूर्ति की आंख मिचौली शुरू हो गई है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में 12 तो कस्बे में 16 से 17 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
जर्जर तारों से फॉल्ट भी बिजली आपूर्ति में बाधा बन रहे हैं। एसडीओ सत्य कुमार ने बताया कि शेड्यूल के अनुसार ही बिजली आपूर्ति करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ तकनीकी फॉल्ट के कारण आपूर्ति बाधित होती है।