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Azamgarh News: घाघरा की कटान से 3 गांवों की 90 बीघा जमीन नदी में समाई
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लाटघाट। सगड़ी तहसील क्षेत्र में उत्तर दिशा से बहने वाली घाघरा नदी ने एक बार फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही सहबदिया, टेकनपुर और बरामदपुर गांवों में तेजी से कटान शुरू हो गया है।
अब तक इन गांवों के किसानों की 80 से 90 बीघा उपजाऊ भूमि घाघरा की धारा में समा चुकी है। बताते चलें कि सिंचाई विभाग द्वारा सहबदिया गांव को बचाने के लिए 4.15 करोड़ रुपये की परियोजना चलाई गई थी, जिससे गांव की आबादी तो बचा ली गई लेकिन आगे की जमीन को बचाने के लिए कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला गया।
नदी की कटान अब उस क्षेत्र से आगे बढ़ गई है और किसानों की कीमती खेती योग्य भूमि को लील रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग सिर्फ कागजी परियोजनाएं बनाकर खानापूर्ति करता है, जबकि हकीकत में किसानों की जमीनें एक-एक कर खत्म होती जा रही हैं।
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यदि समय रहते पूरी योजना को विस्तार नहीं मिला और कटान रोकने के लिए मजबूत बांध व रिटेनिंग वॉल नहीं बनी, तो भविष्य में दर्जनों गांवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी सगड़ी श्याम प्रताप सिंह ने बताया कि टेक्निकल मामला है, संबंधित विभाग को बताया जाएगा। कटान के संबंध में वही कुछ कर सकते हैं।
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अब तक इन गांवों के किसानों की 80 से 90 बीघा उपजाऊ भूमि घाघरा की धारा में समा चुकी है। बताते चलें कि सिंचाई विभाग द्वारा सहबदिया गांव को बचाने के लिए 4.15 करोड़ रुपये की परियोजना चलाई गई थी, जिससे गांव की आबादी तो बचा ली गई लेकिन आगे की जमीन को बचाने के लिए कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला गया।
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नदी की कटान अब उस क्षेत्र से आगे बढ़ गई है और किसानों की कीमती खेती योग्य भूमि को लील रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग सिर्फ कागजी परियोजनाएं बनाकर खानापूर्ति करता है, जबकि हकीकत में किसानों की जमीनें एक-एक कर खत्म होती जा रही हैं।
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यदि समय रहते पूरी योजना को विस्तार नहीं मिला और कटान रोकने के लिए मजबूत बांध व रिटेनिंग वॉल नहीं बनी, तो भविष्य में दर्जनों गांवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी सगड़ी श्याम प्रताप सिंह ने बताया कि टेक्निकल मामला है, संबंधित विभाग को बताया जाएगा। कटान के संबंध में वही कुछ कर सकते हैं।